कैमूर में चकबंदी विभाग 'प्रभार' के सहारे: 8 कार्यालयों में एक भी स्थायी पदाधिकारी नहीं, खतियान-नकल के लिए भटक रहे रैयत
कैमूर जिले का चकबंदी विभाग गंभीर प्रशासनिक संकट से जूझ रहा है. जिले के 8 चकबंदी कार्यालयों में एक भी स्थायी पदाधिकारी नहीं है, जिससे जमीन संबंधी कार्यों के लिए रैयतों को हफ्तों तक चक्कर काटना पड़ रहा है. प्रभारी व्यवस्था के कारण कामकाज प्रभावित हो रहा है.
Kaimur News: जिले में चकबंदी विभाग लंबे समय से घोर प्रशासनिक संकट से जूझ रहा है. जिले के 11 प्रखंडों के चकबंदी और भू-अभिलेख संबंधी मामलों के निपटारे के लिए कुल आठ चकबंदी कार्यालय संचालित हैं, लेकिन विडंबना यह है कि इनमें से एक भी कार्यालय में स्थायी चकबंदी पदाधिकारी पदस्थापित नहीं है. पूरी व्यवस्था केवल प्रभार के भरोसे घिसट रही है, जिसके चलते जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों, खतियान और नकल निकलवाने के लिए रैयतों को हफ्तों तक कार्यालयों की चौखट नापनी पड़ रही है.
एक अधिकारी और दो जिलों के कई कार्यालयों का भारी बोझ
वर्तमान में रोहतास जिले के चेनारी चकबंदी कार्यालय में पदस्थापित चकबंदी पदाधिकारी संजीव कुमार द्विवेदी को ही कैमूर जिले के सभी चकबंदी कार्यालयों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है. इसके अलावा उनके पास रोहतास जिले के भी कुछ अन्य कार्यालयों की जिम्मेदारी है. इतने बड़े भूभाग और दर्जनों फाइलों के बीच अकेले एक अधिकारी के लिए सभी जगह नियमित रूप से बैठकर काम निपटाना प्रशासनिक रूप से बेहद कठिन साबित हो रहा है.
सप्ताह में महज दो दिन की व्यवस्था, वह भी अनिश्चितता की भेंट
प्रशासनिक व्यवस्था के अनुसार, प्रभारी अधिकारी को सप्ताह में केवल दो दिन कैमूर जिले के कार्यालयों में बैठकर कामकाज देखना होता है. हालांकि, वास्तविक स्थिति यह है कि:
- एक दिन में कई प्रखंडों का दबाव: जब अधिकारी कैमूर पहुंचते हैं, तो उन्हें भभुआ, चैनपुर सहित अन्य सभी कार्यालयों के मामले एक साथ देखने पड़ते हैं.
- सीमित समय: कुछ ही घंटों के भीतर सैकड़ों लंबित फाइलों की जांच और सुनवाई संभव नहीं हो पाती.
- रैयतों में असमंजस: दूर-दराज के गांवों से आने वाले किसानों को यह तय जानकारी तक नहीं मिल पाती कि अधिकारी किस दिन और किस वक्त कार्यालय में मिलेंगे.
समय और पैसे की बर्बादी, रैयतों ने उठाई नियमित तैनाती की मांग
चकबंदी से जुड़े मुकदमों की सुनवाई, अभिलेखों की पड़ताल, खतियान सुधार और नकल प्राप्ति जैसे जरूरी कार्यों के लिए जिले के किसान बार-बार भभुआ और स्थानीय कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं. अधिकारी के मौजूद न रहने पर उन्हें मायूस होकर बैरंग लौटना पड़ता है, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है. स्थानीय रैयतों ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग से मांग की है कि कैमूर के चकबंदी कार्यालयों में तत्काल पूर्णकालिक और नियमित पदाधिकारियों की तैनाती की जाए, ताकि उन्हें प्रभार की व्यवस्था से निजात मिल सके.
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