कैमूर के इस 71 साल पुराने स्कूल में अब तक नहीं बनी चारदीवारी, सड़क किनारे पढ़ते हैं 154 बच्चे, हर दिन हादसे का डर
मध्यांतर में विद्यालय परिषर में खेलते बच्चे | Prabhat Khabar Network
रामपुर का 71 साल पुराना पसाई विद्यालय बिना चारदीवारी के आवारा पशुओं और नशेड़ियों का अड्डा बन गया है। सड़क किनारे होने से बच्चों की जान को हर पल खतरा है।
Kaimur News : कैमूर जिला के रामपुर प्रखंड क्षेत्र के पसाई पंचायत मुख्यालय स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय पसाई की स्थापना 1955 में हुई थी. करीब 71 साल पुराने इस विद्यालय में आज भी चारदीवारी नहीं है. विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक 154 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं होने के कारण बच्चों को हर दिन खतरे के बीच स्कूल आना-जाना पड़ रहा है.
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154 बच्चों के लिए 9 शिक्षक, 8 कमरों में चलती हैं कक्षाएं
प्रधानाध्यापक सच्चिदानंद गुप्ता ने बताया कि विद्यालय में कक्षा एक से आठ तक पढ़ाई होती है. विद्यालय में छोटे-बड़े कुल 10 कमरे हैं, जिनमें आठ कमरों में कक्षाएं संचालित होती हैं. यहां कुल 154 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं, जिनमें 73 छात्र और 81 छात्राएं हैं. पठन-पाठन के लिए नौ शिक्षक-शिक्षिकाएं नियुक्त हैं.
चारदीवारी नहीं तो विद्यालय बना आवारा पशुओं का ठिकाना
विद्यालय की चारदीवारी नहीं होने के कारण स्कूल बंद होने के बाद परिसर में आवारा पशुओं का जमावड़ा लग जाता है. बरामदे में गोबर और मूत्र फैला रहता है. सुबह छोटे बच्चे परिसर में खेलने के दौरान कई बार गोबर में गिर जाते हैं, जिससे उनके कपड़े गंदे हो जाते हैं. परिसर में लगाए गए पौधों और फूलों को भी पशु नष्ट कर देते हैं. शाम होते ही ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय परिसर में नशा करने वालों का जमावड़ा भी लग जाता है.
मुख्य सड़क के किनारे स्कूल, बच्चों की सुरक्षा पर सवाल
विद्यालय के ठीक बगल से मुख्य सड़क गुजरती है. यह सड़क रामपुर प्रखंड मुख्यालय से बेलाव, रोहतास के चेनारी बाजार, दुर्गावती जलाशय और नक्सल प्रभावित क्षेत्र से होते हुए भगवानपुर मुंडेश्वरी तक जाती है. इस मार्ग पर दिन-रात सैकड़ों वाहनों की आवाजाही रहती है.
मध्यांतर में सड़क पर पहुंच जाते हैं बच्चे
प्रधानाध्यापक के अनुसार मध्यांतर के दौरान बच्चे खेलने के लिए विद्यालय परिसर से बाहर निकल जाते हैं. चारदीवारी नहीं होने के कारण खेलते-खेलते कई बार बच्चे मुख्य सड़क तक पहुंच जाते हैं. इससे किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है.
दर्जनों बच्चे हो चुके हैं दुर्घटना के शिकार
एचएम सच्चिदानंद गुप्ता ने बताया कि अब तक दर्जनों छात्र-छात्राएं और छोटे बच्चे सड़क दुर्घटनाओं में घायल हो चुके हैं. कई बच्चों को चोट लगने के बाद अस्पताल तक ले जाना पड़ा है. वाहनों की चपेट में आने से हाथ-पैर में कटने और छिलने की घटनाएं भी होती रहती हैं. संयोग से अब तक कोई बड़ी अनहोनी नहीं हुई है, लेकिन खतरा लगातार बना हुआ है.
71 साल में दर्जनों आवेदन, फिर भी नहीं बनी चारदीवारी
विद्यालय की चारदीवारी निर्माण को लेकर विभाग को मौखिक और लिखित रूप से कई बार सूचना दी गई है. प्रधानाध्यापक ने बताया कि उन्होंने स्वयं कई बार आवेदन दिया है. उनसे पहले पदस्थ रहे प्रधानाध्यापकों ने भी विभाग को दर्जनों बार इसकी जानकारी दी, लेकिन अब तक चारदीवारी निर्माण की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई.
अधिकारी रोज गुजरते हैं, फिर भी समस्या पर नजर नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि इसी रास्ते से बीईओ, बीडीओ और अन्य वरीय पदाधिकारी प्रखंड मुख्यालय आते-जाते हैं, लेकिन किसी का ध्यान विद्यालय की चारदीवारी और बच्चों की सुरक्षा की ओर नहीं गया. ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि यदि बच्चों के साथ कोई बड़ी अनहोनी होती है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी.
ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन व शिक्षा विभाग से जल्द विद्यालय की चारदीवारी निर्माण कराने और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है.
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