जहानाबाद के एसएस कॉलेज की पूर्व छात्रा को नेट-जेआरएफ में 93वीं रैंक, सुषमा को सफलता पर मिल रही बधाई
छात्रा को सम्मानित करते विधायक | Prabhat Khabar Network
एस.एस. कॉलेज की पूर्व छात्रा कुमारी सुषमा ने सीएसआईआर-यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा में 93वीं रैंक हासिल कर प्रदेश का नाम रोशन किया है. उनकी यह सफलता छोटे शहरों के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है, जो दर्शाती है कि लगन और परिश्रम से राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन संभव है.
NET-JRF Result : जहानाबाद एस.एस. कॉलेज की पूर्व छात्रा एवं बीएससी जैव प्रौद्योगिकी के शैक्षणिक सत्र 2019-22 की छात्रा कुमारी सुषमा ने राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित सीएसआईआर-यूजीसी नेट जेआरएफ परीक्षा में अखिल भारतीय 93वीं रैंक हासिल कर महाविद्यालय, परिवार और पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है. उनकी इस उल्लेखनीय सफलता से महाविद्यालय परिवार में हर्ष और उत्साह का वातावरण है.
सुषमा की उपलब्धि न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिभा, परिश्रम और संकल्पशीलता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि उचित मार्गदर्शन, निरंतर अध्ययन और लक्ष्य के प्रति अटूट प्रतिबद्धता के बल पर छोटे शहरों के विद्यार्थी भी राष्ट्रीय स्तर की अत्यंत प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त कर सकते हैं.
सुषमा की इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर स्थानीय विधायक राहुल कुमार ने उन्हें पुष्पगुच्छ एवं प्रेरणादायी पुस्तक ‘इग्नाइटेड माइंड्स’ भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं. उन्होंने कहा कि किसी विद्यार्थी की सफलता केवल उसके व्यक्तिगत जीवन की उपलब्धि नहीं होती, बल्कि वह उसके शिक्षण संस्थान, परिवार और पूरे समाज के लिए भी गौरव का विषय बनती है. सुषमा की सफलता एस.एस. कॉलेज के लिए ऐसा ही गौरवपूर्ण अवसर है.
महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. डॉ. दीपक कुमार ने सुषमा को बधाई देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को अपनी परिस्थितियों को अपनी सीमा नहीं, बल्कि अपनी शक्ति बनाना चाहिए. सुषमा ने अपनी लगन, अनुशासन और सतत परिश्रम से यह सिद्ध किया है कि प्रतिभा को जब परिश्रम के पंख मिलते हैं, तो सफलता की उड़ान को कोई परिस्थिति रोक नहीं सकती.
उन्होंने कहा कि सुषमा की उपलब्धि वर्तमान विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से प्रेरणादायी है. राष्ट्रीय स्तर की कठिन परीक्षा में सफलता केवल मेधा के बल पर संभव नहीं होती, बल्कि इसके लिए दीर्घकालिक तैयारी, विषय की गहरी समझ, धैर्य, आत्मविश्वास तथा असफलताओं के बावजूद निरंतर आगे बढ़ने का साहस आवश्यक होता है. सुषमा ने इन सभी गुणों का परिचय देते हुए अपने लिए शोध और अकादमिक उत्कृष्टता के नए द्वार खोले हैं.
महाविद्यालय के शिक्षकों के अनुसार सुषमा अपने विद्यार्थी जीवन से ही मेधावी, अनुशासित और जिज्ञासु रही हैं. वह अपनी कक्षाओं में नियमित रहने के साथ-साथ विषयों को गहराई से समझने के लिए सदैव उत्सुक रहती थीं. उनकी अध्ययनशील प्रवृत्ति, एकाग्रता और कठिन परिश्रम ने ही उन्हें इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित परीक्षा में उत्कृष्ट सफलता दिलाई है.
सुषमा ने स्नातक स्तर पर ‘प्रतिरक्षा तंत्र’ विषय पर अपनी शोध-परियोजना पूरी की थी. यह परियोजना उन्होंने अपने शिक्षक एवं प्रख्यात इम्यूनोलॉजिस्ट प्रो. प्रवीण दीपक के कुशल मार्गदर्शन में तैयार की थी. प्रतिरक्षा तंत्र के क्षेत्र में प्रो. दीपक का शोध कार्य कैंसर इम्यूनोलॉजी, कंप्यूटर-एडेड ड्रग डिस्कवरी तथा रूमेटॉयड आर्थराइटिस एक्सपेरिमेंटल थेराप्युटिक्स जैसे आधुनिक और जटिल विषयों पर केंद्रित रहा है. उनके मार्गदर्शन और अनुभव ने सुषमा की वैचारिक एवं शोधपरक आधारभूमि को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
प्रो. प्रवीण दीपक ने सुषमा की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उच्च शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल उपाधि प्राप्त करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में जिज्ञासा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण, शोध चेतना और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है. सुषमा की जेआरएफ में सफलता उनकी शोधपरक यात्रा की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सुषमा भविष्य में उच्चस्तरीय शोध कार्य करते हुए विज्ञान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देंगी तथा अपने महाविद्यालय और परिवार का नाम और अधिक ऊँचा करेंगी.
उन्होंने विद्यार्थियों का आह्वान करते हुए कहा कि सफलता किसी एक दिन की उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रतिदिन किए जाने वाले छोटे-छोटे प्रयासों का संचयी परिणाम होती है. विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति स्पष्ट दृष्टि रखते हुए नियमित अध्ययन, आत्मानुशासन और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए. सुषमा जैसी पूर्व छात्राओं की उपलब्धियाँ वर्तमान विद्यार्थियों के लिए जीवंत प्रेरणा का कार्य करती हैं.
महाविद्यालय परिवार की ओर से सुषमा को हार्दिक बधाई देते हुए उनके आगामी शोध एवं अकादमिक जीवन के लिए मंगलकामनाएँ व्यक्त की गईं. महाविद्यालय को विश्वास है कि वह अपनी प्रतिभा, ज्ञान और परिश्रम के बल पर शोध के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करेंगी तथा आने वाली पीढ़ियों के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी.
इस अवसर पर डॉ. विनोद कुमार राय, डॉ. अंशु कुमार मल्लिक, डॉ. कमल कुमार, डॉ. अविनाश कुमार, डॉ. अमित कुमार, डॉ. सूर्यदेव सिंह, डॉ. भागवत कुमार, अनील कुमार द्विवेदी, सुबोध कुमार सुमन सहित महाविद्यालय के अनेक शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मी उपस्थित रहे. सुषमा की यह सफलता उस विश्वास की सशक्त अभिव्यक्ति है कि सपने तभी सार्थक होते हैं, जब उन्हें परिश्रम, धैर्य और संकल्प के पंख मिलते हैं.
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