गांवों में फिर से सुनायी देगी जागते रहो की आवाज

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विनय कुमार, पटेढ़ी बेलसर : अंधेरी रातों में गांवों गूंजने वाली जागते रहो की आवाज जल्द ही एक फिर सुनने को मिलेगी. लगभग एक दशक से गुम हो चुकी चौकीदारों की यह आवाज सरकार के अवर सचिव के फरमान के बाद लोग सुन सकेंगे. चौकीदारों की ड्यूटी अब गांव के माहाैल में ही लगेगी. उनसे […]

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विनय कुमार, पटेढ़ी बेलसर : अंधेरी रातों में गांवों गूंजने वाली जागते रहो की आवाज जल्द ही एक फिर सुनने को मिलेगी. लगभग एक दशक से गुम हो चुकी चौकीदारों की यह आवाज सरकार के अवर सचिव के फरमान के बाद लोग सुन सकेंगे.

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चौकीदारों की ड्यूटी अब गांव के माहाैल में ही लगेगी. उनसे बैंक ड्यूटी, बंदी एस्कॉर्ट, डाक ड्यूटी, निजी आवास ड्यूटी जैसे कार्य अब नहीं लिये जायेंगे. बिहार चौकीदार संवर्ग के कर्मियों को केवल बीट ड्यूटी में लगाये जाने का आदेश राज्य सरकार ने दिया है. सरकार के अवर सचिव गिरीश मोहन ठाकुर ने इस संबंध में सभी जिले के एसपी को निर्देश दिया है.
विभागीय पत्र में किसी भी परिस्थिति में चौकीदारों को बंदियों को थाना से कोर्ट ले जाने व लाने दायित्व नहीं देने तथा उक्त कार्य पुलिस से कराने का निर्देश दिया गया है. प्रावधान के अनुसार चौकीदार पुलिस नहीं है. चौकीदार अपने बीट में रहकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे. चौकीदार अब बाल विवाह, शराबबंदी जैसे महत्वपूर्ण दायित्वों का निर्वहन कर पुलिस का सहयोग करेंगे.
मालूम हो कि एक दशक पूर्व तक चौकीदारों की गांवों की सुरक्षा में अहम भूमिका थी. चौकीदार रतजगा कर चोरी की घटनाओं से घरों को सुरक्षित रखते थे. चौकीदार रात को घूमकर-घूमकर लोगो को जागते रहो की आवाज लगाते थे. लेकिन धीरे-धीरे चौकीदारों को उक्त कार्य से अलग कर बैंक ड्यूटी, बंदी एस्कॉर्ट, डाक ड्यूटी सहित अन्य काम लिया जाने लगा.
पूर्व में पुलिस प्रशासन के लिये चौकीदार सूचना संकलन का बेहतरीन माध्यम था. चौकीदार के माध्ययम से ही छोटे मामलों का ग्रामीण स्तर पर निपटारा होता था. लेकिन आज गांव की ड्यूटी से इतर दूसरे कार्य लेने से चौकीदारों की महत्ता घट रही है.
पहले की उपेक्षा आज ओपी क्षेत्र में चौकीदारों के आधे से अधिक पद खाली है. कारण चौकीदार के सेवानिवृत्त के बाद नई बहाली नहीं हो पायी है. एक दशक पूर्व तक बेलसर ओपी क्षेत्र में 45 चौकीदार कार्यरत थे. आज 25 चौकीदार ही क्षेत्र में कार्यरत है. चौकीदारों की घटती संख्या से क्षेत्र के दर्जनों गांव चौकीदार विहीन हो गये हैं.
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