7 माह से 3 साल तक के बच्चों के लिए वरदान बने झाझा के 80 'शिशु घर', कुपोषण के खिलाफ जंग में नया अध्याय
कार्यक्रम में उपस्थित लोग | Prabhat Khabar Network
झाझा में 'समग्र सेवा' संस्था ने 'खुशहाल बचपन, बाल पोषण' थीम पर अपना 26वां स्थापना दिवस मनाया. इस अवसर पर 80 शिशु घरों की उपलब्धियों को रेखांकित किया गया, जहां 7 महीने से 3 साल तक के बच्चों की सुरक्षित देखभाल की जा रही है.
Jhajha News: जमुई जिले अंतर्गत झाझा शहर में रविवार को एक ऐसा ही सकारात्मक बदलाव देखने को मिला, जिसने बच्चों के सुरक्षित बचपन और बेहतर स्वास्थ्य की उम्मीद जगाई है. शहर के पुरानी बाजार स्थित चैती दुर्गा के समीप सामुदायिक विवाह भवन में 'समग्र सेवा' संस्था ने 'खुशहाल बचपन, बाल पोषण' की थीम पर अपना 26वां स्थापना दिवस बड़े ही धूमधाम से मनाया. इस अवसर पर राष्ट्रीय बाल देखभाल दिवस का आयोजन भी किया गया, जिसमें स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भारी मौजूदगी रही.
दीप प्रज्वलन से हुई शुरुआत, 26 वर्षों के बेमिसाल सफर को किया गया याद
कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ करहरा पंचायत की मुखिया सुभद्रा देवी, समग्र सेवा के जिला सचिव मकेश्वर रावत और संस्था के निदेशक अजय कुमार सिंह द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया. दीप की लौ के साथ ही संस्था के 26 वर्षों के लंबे और संघर्षपूर्ण सामाजिक सफर की यादें ताजा हो गईं. वक्ताओं ने बताया कि किस तरह दो दशक से भी अधिक समय से संस्था ने धरातल पर उतरकर जरूरतमंद बच्चों, महिलाओं और वंचित समाज के उत्थान के लिए लगातार काम किया है. इस दौरान मंच पर मौजूद अतिथियों का स्वागत पारंपरिक गर्मजोशी के साथ किया गया.
झाझा में चल रहे हैं 80 शिशु घर, 7 माह से 3 साल के बच्चों की हो रही सुरक्षित देखभाल
इस अवसर पर संस्था के जिला सचिव मकेश्वर रावत ने संस्था की उपलब्धियों और भावी योजनाओं का खाका पेश किया. उन्होंने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य 'खुशहाल बचपन और बाल पोषण' की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को और अधिक प्रभावी बनाना तथा समाज के बीच बाल स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जागरूकता फैलाना है. उन्होंने एक बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा करते हुए बताया कि वर्तमान में अकेले झाझा प्रखंड में संस्था की ओर से 80 'शिशु घर' (क्रैश केंद्र) संचालित किए जा रहे हैं. इन केंद्रों पर 7 माह से लेकर 3 वर्ष तक के छोटे बच्चों के लिए सुरक्षित देखभाल, संतुलित आहार और पोषण की पुख्ता व्यवस्था की गई है.
कुपोषण के खिलाफ डिजिटल ट्रैकिंग और प्रशिक्षित केयरगिवर की बड़ी भूमिका
इन शिशु घरों की कार्यप्रणाली केवल बच्चों को संभालने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बाल स्वास्थ्य की एक मजबूत ढाल बनी हुई है. प्रत्येक शिशु घर में बच्चों की नियमित स्वास्थ्य निगरानी, स्वास्थ्य परामर्श, समय पर टीकाकरण और पोषणयुक्त आहार सुनिश्चित किया जाता है. विकास चार्ट के माध्यम से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास की स्थिति पर पैनी नजर रखी जाती है. यदि किसी बच्चे में कुपोषण के लक्षण पाए जाते हैं, तो उसे तुरंत चिह्नित कर विशेष पोषण और देखभाल उपलब्ध कराई जाती है. सबसे खास बात यह है कि हर शिशु घर में दो प्रशिक्षित और कुशल केयरगिवर तैनात हैं, जो बच्चों को मां जैसा दुलार और सुरक्षित माहौल देती हैं.
जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं का हुआ सम्मान, प्रदर्शनी स्टालों ने खींचा ध्यान
संस्था के निदेशक अजय कुमार सिंह ने कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि 26 वर्षों की इस स्वर्णिम यात्रा में जमीन से जुड़े कार्यकर्ताओं और स्थानीय समुदाय का योगदान अमूल्य रहा है. उन्होंने सभी सहयोगियों से इसी निष्ठा के साथ एक स्वस्थ और खुशहाल समाज के निर्माण में अपना योगदान जारी रखने की अपील की. उत्कृष्ट कार्य करने वाले और समाज सेवा में सक्रिय भूमिका निभाने वाले समाजसेवियों को मंच से अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया. कार्यक्रम स्थल पर शिशु घरों की गतिविधियों और बाल पोषण से संबंधित आकर्षक स्टॉल भी लगाए गए थे, जहां आम लोगों को बच्चों के समग्र विकास की जानकारी दी गई.
Jhajha News: महिला पर्यवेक्षिकाओं की मौजूदगी और समाज पर गहरा सकारात्मक प्रभाव
कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रशिक्षक राजनंदनी ने किया. इस मौके पर क्रैश प्रोजेक्ट के परियोजना प्रबंधक सिधेश्वर मंडल, राजेश शर्मा, आनंद कुमार के साथ-साथ आईसीडीएस की महिला पर्यवेक्षिकाएं, प्रखंड की आशा फैसिलिटेटर और भारी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे. झाझा के ग्रामीण अंचलों में संचालित ये 80 शिशु घर आज कामकाजी महिलाओं के लिए सबसे बड़ा सहारा बन चुके हैं. जब मां बेफिक्र होकर काम पर जाती है और बच्चा सुरक्षित हाथों में रहकर सही पोषण पाता है, तब वास्तव में एक खुशहाल समाज की नींव मजबूत होती है.
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