झाझा में 30 नवंबर तक चलेगा एनीमिया मुक्त भारत अभियान, रोज 30 लोगों की होगी जांच, जानें किसे मिलेगा लाभ
प्रशिक्षण में उपस्थित लोग | Prabhat Khabar Network
झाझा में 25 अगस्त से 30 नवंबर तक एनीमिया मुक्त भारत अभियान चलाया जाएगा. इस दौरान स्वास्थ्य केंद्रों पर छह माह से अधिक उम्र के लोगों की खून की कमी की जांच की जाएगी. अभियान का लक्ष्य अधिक से अधिक लोगों की पहचान कर उन्हें समय पर उपचार उपलब्ध कराना है.
Jhajha Anemia Campaign: शरीर में खून की कमी यानी एनीमिया को लेकर झाझा में स्वास्थ्य विभाग ने अब जांच और जागरूकता अभियान तेज करने की तैयारी शुरू कर दी है. 25 अगस्त से 30 नवंबर तक चलने वाले एनीमिया मुक्त भारत अभियान के तहत क्षेत्र के स्वास्थ्य केंद्रों पर लोगों की जांच की जाएगी. खास बात यह है कि प्रत्येक स्वास्थ्य उपकेंद्र को रोजाना कम से कम 30 लोगों की जांच का लक्ष्य दिया गया है.
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अभियान को प्रभावी बनाने के लिए मंगलवार को रेफरल अस्पताल के सभागार में एएनएम और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया. स्वास्थ्यकर्मियों को जांच से लेकर एनीमिया की पहचान और उपचार तक की प्रक्रिया समझायी गयी.
रोज 30 लोगों की होगी जांच
रेफरल अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ नबाब ने बताया कि अभियान के दौरान क्षेत्र के सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर जांच का काम किया जाएगा.
प्रत्येक स्वास्थ्य उपकेंद्र को प्रतिदिन 30 लोगों की जांच करने का लक्ष्य दिया गया है. इसका उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों में खून की कमी की पहचान करना है, ताकि बीमारी का समय पर उपचार शुरू कराया जा सके.
स्वास्थ्य विभाग का जोर केवल जांच तक सीमित नहीं रहेगा. जिन लोगों में एनीमिया की पुष्टि होगी, उन्हें आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने के साथ नियमित इलाज जारी रखने पर भी ध्यान दिया जाएगा.
छह महीने से अधिक उम्र के लोग अभियान के दायरे में
अभियान में छह माह से अधिक उम्र के सभी लोगों को लक्षित लाभार्थियों में शामिल किया गया है. यानी छोटे बच्चों से लेकर वयस्क और बुजुर्ग तक जांच के दायरे में रहेंगे.
स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्र में अधिक से अधिक लोगों की जांच कर एनीमिया से पीड़ित लोगों की पहचान करें.
इससे ऐसे लोगों तक भी स्वास्थ्य सुविधा पहुंचाने की कोशिश होगी, जो सामान्य तौर पर बीमारी की जांच के लिए अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र नहीं पहुंचते.
हीमोग्लोबिन जांच की दी गयी जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान बीएचएम सुभाषचंद्र ने स्वास्थ्यकर्मियों को हीमोग्लोबिन मापक यंत्र के इस्तेमाल की जानकारी दी.
स्वास्थ्यकर्मियों को बताया गया कि उपलब्ध उपकरण के माध्यम से लोगों के हीमोग्लोबिन की जांच कैसे की जानी है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई किस तरह करनी है.
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्यकर्मियों को अभियान के दौरान होने वाली जांच के लिए तैयार करना है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों की स्क्रीनिंग व्यवस्थित तरीके से हो सके.
सिर्फ दवा नहीं, खान-पान पर भी रहेगा जोर
एनीमिया की पहचान होने के बाद नियमित उपचार के साथ लोगों को संतुलित आहार के प्रति जागरूक करने की योजना है.
स्वास्थ्य विभाग अभियान के दौरान लोगों को संतुलित भोजन, समय पर जांच और नियमित उपचार के महत्व की जानकारी देगा.
ग्रामीण इलाकों में जागरूकता पर विशेष जोर दिया जा रहा है. चिकित्सा प्रभारी ने स्वास्थ्यकर्मियों को सुदूर क्षेत्रों में भी अभियान चलाने का निर्देश दिया है, ताकि बीमारी की जांच केवल अस्पताल और आसपास के क्षेत्रों तक सीमित न रहे.
Jhajha Anemia Campaign: ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचेगा अभियान
एनीमिया की समस्या का समय पर पता नहीं चलने पर लोग लंबे समय तक कमजोरी जैसी परेशानियों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर सकते हैं. ऐसे में घर और समुदाय के स्तर पर जांच बढ़ाना अभियान की अहम कड़ी होगी.
झाझा में 25 अगस्त से शुरू होने वाला अभियान 30 नवंबर तक चलेगा. इस दौरान स्वास्थ्य विभाग की कोशिश अधिक से अधिक लोगों की जांच करने और एनीमिया की पहचान के बाद उन्हें उपचार से जोड़ने की होगी.
अगर स्वास्थ्य उपकेंद्र निर्धारित दैनिक लक्ष्य के अनुसार जांच करते हैं, तो अभियान के तीन महीने से अधिक समय में बड़ी संख्या में लोगों की स्क्रीनिंग की जा सकेगी.
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