सरकारी जमीन पर अतिक्रमण से जूझ रहा मध्य विद्यालय भंडरा, तीन कमरों में 176 बच्चों की पढ़ाई

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मध्य विद्यालय भंडरा

मध्य विद्यालय भंडरा

मध्य विद्यालय भंडरा की सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण के कारण स्कूल के विस्तार में बाधा आ रही है. 176 छात्र-छात्राएं केवल तीन कमरों में पढ़ रहे हैं और मध्याह्न भोजन भी अस्थायी तंबू में बनता है. ग्रामीणों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है.

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School Encroachment: खैरा प्रखंड के बेला पंचायत स्थित मध्य विद्यालय भंडरा की सरकारी भूमि पर कथित अतिक्रमण को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है. ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय के नाम दर्ज सरकारी भूमि के एक हिस्से पर अवैध कब्जा होने के कारण अतिरिक्त भवन, रसोईघर और अन्य आवश्यक सुविधाओं का निर्माण नहीं हो पा रहा है. इससे विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है.

20 डिसमिल सरकारी भूमि, फिर भी विस्तार रुका

ग्रामीणों के आवेदन के अनुसार विद्यालय के नाम कुल 20 डिसमिल सरकारी भूमि दर्ज है, जिसकी विधिवत नापी 8 अगस्त 2023 को की जा चुकी है. इसके बावजूद भूमि के एक हिस्से पर कथित रूप से अतिक्रमण बना हुआ है. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत और कार्रवाई की मांग के बावजूद अब तक अतिक्रमण नहीं हटाया गया.

176 बच्चों की पढ़ाई केवल तीन कमरों में

विद्यालय में कक्षा 1 से 8 तक कुल 176 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. यहां छह शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें एक महिला और पांच पुरुष शिक्षक शामिल हैं. औसतन 70 प्रतिशत विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति रहती है. प्रधानाध्यापिका रेणु देवी ने बताया कि केवल तीन कमरों में पूरे विद्यालय का संचालन करना पड़ रहा है. पहली से पांचवीं तक के बच्चों को एक ही कमरे में बैठाकर पढ़ाना पड़ता है, जबकि छठी और सातवीं की संयुक्त कक्षाएं संचालित होती हैं. आठवीं कक्षा के लिए केवल एक कमरा उपलब्ध है.

किचन शेड नहीं, तंबू में बनता है मध्याह्न भोजन

विद्यालय में स्थायी रसोईघर नहीं होने के कारण मध्याह्न भोजन बांस और तिरपाल से बने अस्थायी तंबू में तैयार किया जाता है. प्रधानाध्यापिका ने बताया कि बारिश, तेज धूप और हवा के दौरान भोजन बनाने में काफी कठिनाई होती है, जिससे बच्चों की भोजन व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है.

ग्रामीणों ने दबंगई का लगाया आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी कथित कब्जाधारियों से सरकारी भूमि खाली करने की बात कही जाती है तो विवाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. उनका कहना है कि इस कारण गांव के लोग खुलकर विरोध भी नहीं कर पाते.

पहले भी जारी हो चुका है नोटिस

ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2024 में अंचलाधिकारी द्वारा कथित अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी किया गया था, लेकिन उसके बाद भी प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. ग्रामीणों ने अब मुख्यमंत्री सहित संबंधित विभागों से विद्यालय की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है.

क्या कहते हैं संबंधित लोग

School Encroachment: पूर्व मुखिया ललन सिंह ने कहा कि विद्यालय की जमीन पर कई वर्षों से अतिक्रमण है. इस संबंध में पूर्व में नोटिस भी जारी हुआ था, लेकिन स्थिति अब भी जस की तस बनी हुई है.विद्यालय की प्रधानाध्यापिका रेणु देवी ने बताया कि केवल तीन कमरों में विद्यालय का संचालन करना पड़ रहा है. किचन शेड नहीं होने के कारण अस्थायी तंबू में मध्याह्न भोजन बनाना पड़ता है, जिससे विशेषकर बारिश के मौसम में काफी परेशानी होती है.


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गुलशन कश्यप

लेखक के बारे में

By गुलशन कश्यप

गुलशन कश्यप प्रिंट माध्यम में 15 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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