वैशाली: लालगंज में खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर बह रही गंडक नदी; तिरहुत तटबंध से सटकर हो रहा तेज बहाव, संवेदनशील घाटों पर एसडीआरएफ तैनात

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नदी के मुहाने पर बसे स्थल व तटबंध की सुरक्षा हेतु युद्धस्तर पर बिछाई गईं बालू की बोरियां।

वैशाली के लालगंज में गंडक नदी का जलस्तर खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर चला गया है. नदी का पानी ऐतिहासिक तिरहुत तटबंध से सीधे टकरा रहा है, जिससे बाढ़ का गंभीर खतरा पैदा हो गया है. संवेदनशील तटबंधों पर प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है.

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Flood In Vaishali: जिले के लालगंज प्रखंड क्षेत्र में गंडक नदी के विकराल रूप धारण करने से बाढ़ का खतरा बेहद गंभीर हो गया है. नदी का जलस्तर लाल निशान (खतरे के निशान) से एक मीटर से अधिक ऊपर दर्ज किया जा रहा है. जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण नदी का पानी कई स्थानों पर ऐतिहासिक तिरहुत तटबंध से सीधे सटकर तीव्र गति से बहने लगा है. निचले और तटीय इलाकों में तेजी से फैल रहे पानी के चलते नदी किनारे बसे दर्जनों गांवों में दहशत का माहौल है.

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200 मीटर दूर बह रही धारा तटबंध से सटी

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार कुछ ही दिन पहले तक गंडक नदी की मुख्य धारा तटबंध से करीब 100 से 200 मीटर की सुरक्षित दूरी पर प्रवाहित हो रही थी. लेकिन नेपाल के तराई इलाकों और जलग्रहण क्षेत्रों में हो रही बारिश के बाद पानी का दायरा तेजी से बढ़ा और अब पानी तटबंध के आधार से टकरा रहा है. तटबंध के बेहद करीब पहुंच चुके पानी की तेज लहरों को देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग दिन-रात बांध पर जुट रहे हैं और संभावित खतरे को लेकर रतजगा करने को विवश हैं.

कदम घाट से बलहा घाट तक अतिसंवेदनशील स्थिति

प्रशासनिक आकलन के अनुसार तिरहुत तटबंध के कदम घाट, महादेव घाट, बसंता घाट और बलहा घाट सबसे ज्यादा दबाव वाले और संवेदनशील क्षेत्र चिह्नित किए गए हैं. इन स्थानों पर नदी की धारा का सीधा दबाव तटबंध के ढलानों पर पड़ रहा है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लालगंज के अंचलाधिकारी (सीओ) विश्वजीत सिंह और जल संसाधन विभाग के एसडीओ जनार्दन सिंह अपनी तकनीकी टीम के साथ मौके पर लगातार कैंप कर रहे हैं.

रात में निगरानी के लिए लाइट और एसडीआरएफ अलर्ट

अधिकारियों ने बताया कि तटबंध की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की कोताही न हो, इसके लिए रात के समय भी 24 घंटे निरंतर निगरानी रखी जा रही है. संवेदनशील घाटों पर बड़े जेनरेटर लगाकर पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था की गई है. गश्ती दलों को टॉर्च और संचार उपकरणों से लैस किया गया है. किसी भी संभावित आकस्मिक कटाव या आपात स्थिति से निपटने के लिए राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) की टीमों को बोट और लाइफ जैकेट के साथ स्टैंडबाय पर रखा गया है.

कमजोर हिस्सों पर सैंडबैग से बचाव कार्य जारी

तटबंध के जिन हिस्सों में मिट्टी का क्षरण, कमजोरी या पानी के रिसाव (सीपेज) की जरा सी भी आशंका सामने आ रही है, वहां जल संसाधन विभाग द्वारा तत्काल युद्धस्तर पर सुरक्षा कार्य कराया जा रहा है. बोल्डर क्रेटिंग के साथ-साथ बोरियों में मिट्टी और बालू भरकर तटबंध के किनारों को मजबूत किया जा रहा है, ताकि दबाव के कारण तटबंध को कोई नुकसान न पहुंचे.

स्थायी समाधान न होने से ग्रामीणों में रोष

दूसरी ओर तटबंध के बार-बार संवेदनशील होने से स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन केवल बाढ़ के समय ही आनन-फानन में मिट्टी-बालू की बोरियां डालकर करोड़ों रुपये खर्च करता है. लेकिन बाढ़ खत्म होने के बाद कटाव वाले मुख्य बिंदुओं पर बोल्डर पिचिंग या स्थायी सुरक्षा दीवार बनाने की दिशा में कोई ठोस कार्य नहीं होता. ग्रामीणों का कहना है कि यदि संवेदनशील घाटों पर पहले से पक्का और मजबूत तटबंध बना दिया जाए, तो हर साल मंडराने वाले इस विनाशकारी खतरे से हमेशा के लिए निजात मिल सकती है.

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