95 वर्षीय पंडित विश्वनाथ तिवारी का निधन, 40 वर्षों तक श्री गणेश मंदिर की करते रहे सेवा

Updated:
विज्ञापन

प्रख्यात पुजारी विश्वनाथ तिवारी का फाइल फोटो

फुलवरिया प्रखंड क्षेत्र के प्राचीन श्री गणेश मंदिर, माझा गांव के 95 वर्षीय मुख्य पुजारी पंडित विश्वनाथ तिवारी का रविवार की सुबह निधन हो गया. चार दशकों तक मंदिर की सेवा में लीन रहे तिवारी के निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई.

विज्ञापन

Pandit Vishwanath Tiwari Death: फुलवरिया प्रखंड क्षेत्र की धार्मिक व आध्यात्मिक धरोहर प्राचीन श्री गणेश मंदिर, माझा गांव के वयोवृद्ध मुख्य पुजारी 95 वर्षीय पंडित विश्वनाथ तिवारी का रविवार की अहले सुबह निधन हो गया. उनके साकेतवास की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गयी और हर आंख नम हो गयी. अपने प्रिय साधक के देवलोक गमन पर सम्मान और शोक स्वरूप श्री गणेश मंदिर के कपाट कुछ घंटों के लिए बंद रखे गये.

आपके शहर में

विज्ञापन

40 वर्षों से मंदिर की सेवा में थे लीन

गांव के युवा प्रेम पांडेय ने भावुक होकर बताया कि बाबा विश्वनाथ तिवारी पिछले 40 वर्षों से अनवरत श्री गणेश मंदिर की सेवा और पूजा-अर्चना में लीन थे. चार दशकों तक उनके मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहने वाला मंदिर प्रांगण उनके निधन के बाद निःशब्द और शोकाकुल नजर आया. मंदिर और भगवान गणेश के प्रति उनकी गहरी आस्था और समर्पण के कारण क्षेत्र के श्रद्धालुओं के बीच उनका विशेष सम्मान था.

इकलौते पुत्र ने निभायी अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी

उनके इकलौते पुत्र हरेंद्र तिवारी भारी मन से अंतिम संस्कार की धार्मिक प्रक्रियाओं को संपन्न कराने में जुटे हैं. पिता के निधन से परिजनों में शोक का माहौल है. अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु उनके आवास पर पहुंचते रहे.

जनप्रतिनिधियों और श्रद्धालुओं ने जतायी संवेदना

निधन की सूचना मिलते ही स्थानीय जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों और श्रद्धालुओं का उनके आवास पर तांता लग गया. सभी ने परिजनों से मिलकर इस अपूरणीय क्षति पर गहरी संवेदना व्यक्त की और उन्हें इस कठिन घड़ी में संबल प्रदान किया.

चार दशक की धार्मिक सेवा का हुआ अंत

स्थानीय लोगों ने कहा कि पंडित विश्वनाथ तिवारी ने अपना जीवन श्री गणेश मंदिर की सेवा और पूजा-अर्चना के लिए समर्पित कर दिया था. चार दशकों तक मंदिर में उनकी उपस्थिति श्रद्धालुओं के लिए आस्था और विश्वास का केंद्र रही. उनके निधन से माझा गांव ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के धार्मिक और आध्यात्मिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है. प्रख्यात पुजारी का जाना एक युग के अंत के समान है.

Also Read : सारण के गांव से डेथ वैली तक शैलेश की ऐतिहासिक उड़ान, किसान के बेटे ने 29 घंटे में 217 किमी दौड़कर बनाया रिकॉर्ड


विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन