पितृपक्ष में गया जी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ा प्लान, AI से भीड़ पर नजर; 50 रिंग बस और 150 ई-रिक्शा की सुविधा
डीएम के साथ बैठक करते नगर विकास मंत्री | Prabhat Khabar Network
गया जी में पितृपक्ष मेला-2026 की तैयारियों को लेकर मंत्री नीतीश मिश्रा और डीएम शशांक शुभंकर की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक हुई. मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए एआई आधारित क्राउड मैनेजमेंट, ड्रोन निगरानी, 70 स्वास्थ्य शिविर, विशेष पार्किंग, लेज़र शो और डिजिटल हेल्प डेस्क जैसी व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं.
Gaya Pitru Paksha Mela 2026 : नगर विकास व आवास मंत्री नीतीश मिश्रा की अध्यक्षता में शनिवार को आगामी 'पितृपक्ष मेला' की तैयारियों को लेकर गया जी जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और नगर निगम द्वारा की गई विभिन्न व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा बैठक समाहरणालय के सभागार में आयोजित की गई.
इस महत्वपूर्ण बैठक का संचालन और प्रस्तुतीकरण गया के जिलाधिकारी (DM) शशांक शुभंकर द्वारा किया गया. इस वर्ष विश्व प्रसिद्ध पितृपक्ष मेला का आयोजन 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक निर्धारित किया गया है, जिसकी तैयारियां जिला प्रशासन द्वारा जुलाई महीने से ही युद्ध स्तर पर शुरू कर दी गई थीं.
बैठक के दौरान मंत्री नीतीश मिश्रा ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि प्रशासन ने काफी छोटी-छोटी बारीकियों को भी अच्छे तरीके से हाईलाइट करते हुए बेहद बेहतरीन तैयारियां की हैं. यह काफी हर्ष की बात है कि मेला शुरू होने से पहले ही सभी एक्शन प्लान पूरी तरह तैयार हैं.
विशेष रूप से भीड़ नियंत्रण और प्रबंधन का प्लान बहुत बेहतर तरीके से तैयार किया गया है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो और भगदड़ जैसी कोई भी शिकायत न मिले.
गया और बिहार की ब्रांडिंग का बड़ा अवसर है पितृपक्ष मेला
मंत्री नीतीश मिश्रा ने जोर देते हुए कहा कि प्रशासन के साथ-साथ गया जी जिले के आम नागरिकों की भी यह नैतिक और व्यक्तिगत जिम्मेदारी है कि वे इस पाउंड मेले में बढ़-चढ़कर अपना सहयोग दें.
चूंकि विभिन्न राज्यों और विदेशों से बड़ी संख्या में तीर्थयात्री गयाजी आते हैं, इसलिए गया जी की पहचान और बिहार की यह अनूठी सांस्कृतिक पहचान पूरी दुनिया में फैले, इसके लिए हम सभी को मिलकर आने वाले तीर्थयात्रियों का पूरी आत्मीयता के साथ सेवा-सत्कार करना चाहिए. उन्होंने कहा कि पितृपक्ष मेला एक ऐसा विशेष अवसर है जिसके जरिए गया और पूरे बिहार की एक शानदार ब्रांडिंग की जा सकती है.
21 प्रमुख कोषांगों का गठन, शहर में विशेष सजावट और सौंदर्यीकरण
समीक्षा बैठक के दौरान गया जी डीएम शशांक शुभंकर ने बताया कि मेला के सुचारू संचालन और प्रबंधन के लिए कुल 21 प्रमुख कोषांगों का गठन किया गया है, जिनमें आवासन, साफ-सफाई, जलापूर्ति व स्वच्छता, सड़क व नाली मरम्मति, स्वास्थ्य, विद्युत व प्रकाश, परिवहन व यातायात, विधि-व्यवस्था, प्रचार-प्रसार, सूचना केंद्र, खोया-पाया और आपदा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विभाग शामिल हैं.
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बच्चों के बीच आयोजित लोगो (Logo) डिजाइन प्रतियोगिता में 120 प्रतिभागियों में से टॉप-10 डिजाइन का चयन कर उन्हें पुरस्कृत और सम्मानित किया गया है. इसके अलावा 'पेंट द सिटी' अभियान के तहत 293 प्रविष्टियों में से चुनी गई 27 बेहतरीन कलाकृतियों को शहर के चिन्हित प्रमुख मार्गों और दीवारों पर चित्रित कराया जा रहा है.
जिससे गयाजी को आस्था और संस्कृति का एक बिल्कुल नया और आकर्षक स्वरूप मिल सके. मेला क्षेत्र में कुल 75,348 तीर्थयात्रियों एवं पुलिस बल के ठहरने के लिए व्यापक और पुख्ता इंतजाम किए गए हैं.
सफाई, शौचालय और जलापूर्ति के हाई-टेक इंतजाम
- जोन और सेक्टर विभाजन: संपूर्ण मेला क्षेत्र को 5 जोन और 54 सेक्टरों में विभाजित किया गया है. सफाई व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए तीन पालियों में एजेंसी के माध्यम से कुल 39,500 मानवबल तैनात किए जा रहे हैं.
- फल्गु नदी और तालाब: फल्गु नदी के जल की विशेष नौकाओं (बोट) द्वारा सफाई कराई जाएगी. संपूर्ण मेला क्षेत्र की निगरानी ड्रोन कैमरों से और नालों की सफाई अत्याधुनिक रोबोटिक मशीनों के जरिए की जाएगी. ब्रह्मसरोवर, रुक्मिणी, पितामहेश्वर, वैतरणी, सूर्यकुंड और गोदावरी सहित नौ प्रमुख तालाबों व घाटों की दो पालियों में विशेष सफाई और पेंटिंग का कार्य चल रहा है.
- शौचालय और स्नानागार: मेला क्षेत्र में 30 फैब्रिकेटेड, 4 डीलक्स, 8 बायो-टॉयलेट, 6 मोबाइल शौचालय तथा कुल 579 शौचालय, 134 स्नानागार और 74 चेंजिंग रूम का निर्माण व रखरखाव किया गया है.
- पेयजल व्यवस्था: शुद्ध पेयजल आपूर्ति के लिए 197 चापाकल और 53 स्टैंड पोस्ट की मरम्मति व रंग-रोगन कराया गया है. साथ ही 18 प्रमुख स्थलों पर शुद्ध आरओ (RO) जल की पनशालाएं और गंगाजल आपूर्ति के विशेष प्याऊ लगाए गए हैं.
निर्बाध बिजली आपूर्ति और आकर्षक प्रकाश व्यवस्था
विष्णुपद मंदिर को 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति प्रदान करने के लिए इसे दो प्रमुख 33 केवी (KV) स्रोतों (मानपुर एवं चंदौती) तथा डंडीबाग पीएसएस (PSS) के दो पावर ट्रांसफार्मर और 11 केवी फीडरों से जोड़ा गया है.
पूरे मेला क्षेत्र में कुल 24,000 स्ट्रीट लाइटें (जिसमें 4,000 नई लाइटें शामिल हैं), 184 हाईमास्ट, 87 मिनी हाईमास्ट, स्पाइरल लाइट और 10,000 पोलों पर तिरंगे के रंग की रोप लाइटें लगाई जा रही हैं. सुरक्षा की दृष्टि से तमाम लोहे के पोलों पर डाई-इलेक्ट्रिक पेंट की विशेष कोटिंग की गई है.
सड़क मरम्मत, स्वास्थ्य सुविधाएं और परिवहन प्रबंधन
- सड़क और नाली: नगर निगम द्वारा सड़क व नाली मरम्मत की 53 योजनाएं चलाई जा रही हैं, जबकि पथ निर्माण विभाग द्वारा 35 प्रमुख पथों (कुल 169.74 किमी) की मरम्मति का कार्य तेजी से जारी है.
- चिकित्सा सेवा: मेला क्षेत्र में कुल 70 स्वास्थ्य शिविर स्थापित किए जा रहे हैं, जहां 125 डॉक्टर, 178 पैरामेडिकल स्टाफ और 52 चतुर्थ श्रेणी कर्मी तैनात रहेंगे. सभी शिविरों में 53 प्रकार की जीवन रक्षक दवाएं, 12 एम्बुलेंस, 2 शव वाहन और 5 मोबाइल मेडिकल टीमें मुस्तैद रहेंगी.
- आपात स्थिति से निपटने के लिए मगध मेडिकल अस्पताल में 100 बेड, प्रभावती अस्पताल में 10 बेड, जेपी नारायण अस्पताल में 5 बेड और सीजीएचएस (CGHS) दर पर निजी अस्पतालों में कुल 125 बेड आरक्षित किए गए हैं.
- ट्रैफिक और पार्किंग: शहर के बाहरी और आंतरिक हिस्सों में कुल 18 वाहन पड़ाव (पार्किंग) स्थल बनाए गए हैं. तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए 50 रिंग बसें, वृद्ध व अशक्त श्रद्धालुओं के लिए 150 निःशुल्क ई-रिक्शा तथा गया रेलवे स्टेशन (2 काउंटर) एवं गया एयरपोर्ट (1 काउंटर) पर प्रीपेड ऑटो/टैक्सी काउंटर की मुकम्मल व्यवस्था की गई है.
एआई तकनीक, सुरक्षा के कड़े पहरे और विशेष डिजिटल सुविधाएं
- एआई क्राउड मैनेजमेंट: शहर भर में लगाए गए 543 सीसीटीवी कैमरों के जरिए रियल-टाइम अलर्ट और भीड़ नियंत्रण की निगरानी एआई तकनीक से की जाएगी. बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्हें यूनिक क्यूआर (QR) कोड युक्त बैंड दिए जाएंगे, जो उनके अभिभावकों के मोबाइल नंबर से लिंक होंगे ताकि बच्चा खोने पर तुरंत ट्रेस किया जा सके.
- भाषिणी ऐप: दक्षिण भारत और अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं की मदद के लिए 'भाषिणी' ऐप और एआई की सहायता से 'मे आई हेल्प यू' (May I Help You) काउंटरों पर उनकी अपनी मातृभाषा में सहायता प्रदान की जाएगी.
- सुरक्षा व्यवस्था: पूरे मेला क्षेत्र को 44 जोन और 510 सेक्टरों में बांटकर तीन पालियों में दंडाधिकारी और पुलिस बल तैनात किए गए हैं. विष्णुपद मंदिर के पास अस्थायी पुलिस थाना और 87 पुलिस शिविर/हेल्प डेस्क बनाए गए हैं. इसके अलावा वाच टॉवर, सादे लिबास में पुलिसकर्मी, 24 घंटे गश्ती और 67 प्रमुख स्थानों पर 335 अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं.
हेल्प डेस्क, नियंत्रण कक्ष और 'पितृवाटिका' की अनूठी पहल
- हेल्पलाइन नंबर: किसी भी सहायता या शिकायत के लिए 24x7 टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 9266628168 पर ऑटोमेटेड कॉल मैनेजमेंट की सुविधा दी गई है.
- कंट्रोल रूम: संवास सदन में मुख्य नियंत्रण कक्ष (दूरभाष: 0631-2222500) तथा अक्षयवट व देवघाट पर मिनी नियंत्रण कक्ष बनाए गए हैं. यात्री सुविधा के लिए 'Pinddaan Gaya' ऐप और एलईडी डिस्प्ले स्क्रीन लगाए गए हैं.
- लेज़र शो और पितृवाटिका: रबर डैम और ब्रह्मसत तालाब परिसर में भव्य लेज़र लाइट व साउंड शो का आयोजन किया जाएगा. साथ ही 'एक पेड़ पूर्वजों के नाम' (पितृवाटिका) अभियान के तहत ब्रह्मयोनि पहाड़ी (खटकाचक) पर तीर्थयात्री अपने दिवंगत परिजनों की स्मृति में पौधारोपण कर सकेंगे, जिसकी देखरेख वन विभाग द्वारा की जाएगी.
- इसके अलावा श्रद्धालुओं को मात्र 30 रुपये में स्वच्छ व पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने के लिए जीविका 'दीदी की रसोई' के 5 स्टॉल भी शुरू किए गए हैं.
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