गया जी : मगध मेडिकल में ऑपरेशन के दो-तीन दिन बाद ही खुल जा रहा टांका, मरीजों को दोबारा कराना पड़ रहा इलाज

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मगध मेडिकल अस्पताल | Prabhat Khabar Network

मगध मेडिकल अस्पताल में प्रसूताओं के टांके ऑपरेशन के कुछ दिनों में ही खुल जाने की गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं. मरीजों के परिजनों का आरोप है कि साफ-सफाई की कमी और लापरवाही के कारण माताओं को दोबारा इलाज से गुजरना पड़ रहा है, जिससे उनकी परेशानी बढ़ रही है.

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Gaya News : मगध मेडिकल अस्पताल के गायनी वार्ड में ऑपरेशन के बाद प्रसूताओं के टांका खुलने की शिकायत सामने आ रही है. मरीजों के परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के दो-तीन दिन बाद ही टांका खुल जाने से उन्हें काफी परेशानी हो रही है. टांका खुलने के बाद प्रसूताओं को दोबारा इलाज और टांका लगाने के लिए अस्पताल में अधिक दिनों तक रहना पड़ता है.

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बताया जाता है कि इस तरह की शिकायत अस्पताल प्रशासन को पहले से मिल रही है. इसके बावजूद समस्या के समाधान के लिए अब तक प्रभावी कदम नहीं उठाये जाने की बात कही जा रही है. कई मरीजों के परिजन शिकायत लेकर अस्पताल उपाधीक्षक के पास भी पहुंच रहे हैं. परिजनों के अनुसार, उन्हें समस्या के समाधान का आश्वासन दिया जाता है.

मरीजों के परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद सामान्य स्थिति में प्रसूताओं को पांच-छह दिनों के बाद घर जाने की अनुमति मिल जाती है. लेकिन टांका खुल जाने की स्थिति में उन्हें दोबारा अस्पताल में रुकना पड़ता है. इससे प्रसूताओं और उनके परिजनों की परेशानी बढ़ रही है.

इन परिस्थितियों में खुल सकता है टांका

डॉक्टरों का मानना है कि महिलाओं के ऑपरेशन (सिजेरियन या सी-सेक्शन) के बाद टांके मुख्य रूप से शरीर पर अधिक दबाव पड़ने, पोषक तत्वों की कमी या संक्रमण (इंफेक्शन) के कारण खुल जाते हैं. पेट की मांसपेशियों पर जोर पड़ने, भारी बच्चा या सामान उठाने, जल्दी से उठने-बैठने या जोर से खांसने-छींकने से टांकों पर दबाव पड़ता है, जिससे वे ढीले होकर खुल सकता है.

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शुगर या डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं में घाव भरने की गति बहुत धीमी होती है, जिससे टांकों के पकने और खुलने का खतरा बढ़ जाता है.मरीज की सही देखभाल न करने, साफ-सफाई न रखने या गीलापन बने रहने से पस पड़ सकती है और टांके खुल सकते हैं.

परिजनों का कहना है पूरी तौर से लापरवाही

सविता देवी बताती है कि ऑपरेशन के बाद यहां पर साफ-सफाई का खास ख्याल नहीं रखा जाता है. इसके चलते इंफेक्शन यहां अधिक प्रसूताओं को अपने चपेट में ले रहा है. यहां किसी तरह के काम नहीं करने के बाद भी टांका खुल जा रहा है.

गायत्री देवी कहती है कि उनके मरीज का टांका चार दिनों में ही खुल गया. डॉक्टर ने कहा कि वहां पर गिलापन खत्म होने के बाद दोबारा टांका दिया जायेगा. इसी तरह की शिकायत कई मरीज के परिजन ने की है.

क्या कहते हैं उपाधीक्षक

अस्पताल उपाधीक्षक डॉ पीके अग्रवाल ने कहा कि टांका खुलने की शिकायत उनके पास बार-बार आ रही है. इस संबंध में संबंधित विभाग के हेड से बात की जायेगी. साफ-सफाई विशेष तौर से रखने का निर्देश दिया गया है. आगे से कोशिश होगी कि इस तरह की बात किसी मरीज में नहीं आये.

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