Dussehra Special: छपरा में करेंगे न्यूयॉर्क का गोल्डेन श्रीकृष्ण इस्कॉन मंदिर का दर्शन, यहां बन रहा पंडाल
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 11 Sep 2022 4:50 AM
छपरा में न्यूयॉर्क का गोल्डेन श्रीकृष्ण इस्कॉन मंदिर का शहरवासी दीदार कर सकेंगे. पंकज सिनेमा के पास 100 फूट ऊंचे और 60 फूट चौड़े पंडाल का निर्माण हो रहा है. 122 सालों से यहां पूजा हो रही है. पहला दुर्गा स्थान जहां शंकर भी विराजमान रहते हैं.
छपरा. न्यूयॉर्क का गोल्डेन श्रीकृष्ण इस्कॉन मंदिर का दीदार छपरावासी इस बार छपरा शहर में ही कर पायेंगे. पंकज सिनेमा पूजा समिति के सदस्यों ने बताया कि यह पूजा समिति 122 साल पुराना है. यहां भगवान शिव और पार्वती की 10-10 फूट ऊंची पत्थर की प्रतिमा है. सदस्यों ने बताया कि इस नवरात्र में गोल्डेन थर्मोकोल से न्यूयॉर्क का गोल्डेन श्रीकृष्ण इस्कॉन मंदिर पंडाल का निर्माण हो रहा है. इस पंडाल को बनाने के लिए कोलकाता से कारीगर बुलाये गये हैं. पंडाल निर्माता और कारीगर ज्योति दादा 20 दिनों में इसे तैयार कर देंगे.
गोल्डेन थर्मोकॉल पंडाल का यह पंडाल इस बार जिले के लिए खास होगा. पंडाल बना रहे कारीगर ज्योति दादा ने बताया कि करीब 20 दिन और लगेंगे. पंडाल के निर्माण में 650 बांस, 1000 लकड़ी का बीट और 2500 मीटर कपड़ा और लगभग दो लाख रुपये का थर्मोकॉल लग जायेगा. पूरे पंडाल के निर्माण में बारह लाख रुपये लगेंगे. बेहतर लाइटिंग की व्यवस्था तथा 200 से अधिक घरों को सजाया जायेगा. आधे किलोमीटर में ट्यूबलाइट लगेंगे.
इस पूजा पंडाल की खासियत यह है कि यहां मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ भोलेनाथ की भी प्रतिमा बनायी जाती है और द्वादशी के दिन नगर भ्रमण के दौरान मां भवानी के साथ भोलेनाथ भी नगर का भ्रमण करते हैं. पूजा समिति के अध्यक्ष जयप्रकाश पटवा, सचिव मुकेश कुमार सिंह, कोषाध्यक्ष मुकेश कुमार गुप्ता व समिति के अन्य सदस्यों में राजू राय, आकाश कुमार, मोनू कुमार आदि ने बताया कि मां दुर्गा की प्रतिमा के साथ ही माता लक्ष्मी, माता सरस्वती आदि की प्रतिमा बनती है. सारण जिले के जलालपुर के मूर्तिकार बृजेश पंडित प्रतिमाओं को अंतिम रूप देते हैं.
पंकज सिनेमा रोड पूजा समिति के अधिकारियों और सदस्यों ने बताया कि यहां 1901 से पूजा होती है. पुराने सदस्यों में शिवरतन राय, नगीना प्रसाद आदि ने बताया कि सबसे पहले यहां छोटा मंदिर था. लोग यहां पूजा अर्चना करते थे. बाद में धीरे-धीरे यह विशाल रूप लेता गया. अब यहां पर भव्य पंडाल बनाया जाता है. साथ ही भगवान भोलेनाथ और मां पार्वती की विशाल प्रतिमा बनायी गयी है. जिसका दर्शन करने हजारों की संख्या में प्रतिदिन लोग आते हैं. आयोजकों ने बताया कि पूजा अर्चना शुरू होने के प्रमाण हाल ही में पूजा स्थल से मिले एक ऑफिस से पता चला है, जहां पर लोहे के पोल और ईट आदि पर 1901 अंकित है.
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