बाढ़ के पानी ने रोकी ग्रामीणों की राह, बच्चों की पढ़ाई और मरीजों का इलाज बना चुनौती
सुघराईन गांव बाढ़ से घिरा हुआ
कोशी और भूतही बलान नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कुशेश्वरस्थान पूर्वी के निचले इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर कर दी है. कई गांवों में पानी फैलने से ग्रामीण पथ और घाट डूब गए हैं, जिससे लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है. प्रशासन 10 नावें चला रहा है, लेकिन ग्रामीणों ने और नावों और राहत सामग्री की मांग की है.
Darbhanga News: कोशी और भूतही बलान नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कुशेश्वरस्थान पूर्वी प्रखंड के निचले इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है. नदियों का पानी गांवों के आसपास फैलने से कई ग्रामीण पथ और घाट डूब गये हैं. इससे लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है. बाढ़ प्रभावित इलाकों में सुरक्षित आवागमन सबसे बड़ी समस्या बन गयी है.
कई गांवों में फैला बाढ़ का पानी
कोशी नदी के बढ़ते पानी से उजुआ सिमरटोका पंचायत के सिमरटोका, झाझा, कोदरा, गैजोरी और बुढ़िया सुकरासी गांव प्रभावित हैं. तिलकेश्वर पंचायत के अरथुआ, गोलमा और तिलकेश्वर तथा उसरी पंचायत के हरिनाही, कौनिया और सगरदीना गांव में भी पानी फैल गया है. सूघराईन पंचायत के भरैन गांव में भी बाढ़ का पानी पहुंचने से ग्रामीण परेशान हैं. वहीं, भूतही बलान के बढ़ते जलस्तर ने सूघराईन पंचायत के सभी गांवों की परेशानी बढ़ा दी है.
बच्चों और बुजुर्गों की बढ़ी चिंता
पानी से रास्ते डूबने के कारण बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो गया है. बुजुर्ग, बीमार और गर्भवती महिलाओं को इलाज के लिए बाहर ले जाना भी चुनौती बन गया है. दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों को काम पर जाने में परेशानी हो रही है. बाजार से राशन, दवा और अन्य जरूरी सामान लाने में भी ग्रामीणों को दिक्कत हो रही है.
कई घाटों पर आवागमन हुआ मुश्किल
सबसे गंभीर स्थिति सूघराईन गोंगा घाट तथा सूघराईन पुरबारी टोल मुसहरी-मलहर टोली घाट पर बतायी जा रही है. नए बाबू और मंटून राय के घर के आगे स्थित घाट पर भी पानी का दबाव बढ़ गया है. ग्रामीणों के अनुसार इन रास्तों से आवागमन बेहद कठिन हो गया है. लोगों ने प्रभावित घाटों पर पर्याप्त संख्या में सरकारी नाव उपलब्ध कराने की मांग की है.
पानी बढ़ा तो कई गांवों का संपर्क हो सकता है प्रभावित
ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदियों का जलस्तर और बढ़ता है तो कई गांवों का संपर्क पूरी तरह प्रभावित हो सकता है. ऐसे में प्रभावित इलाकों में पहले से नाव की पर्याप्त व्यवस्था जरूरी है. ग्रामीणों ने घाटों और बाढ़ प्रभावित गांवों में लगातार निगरानी बढ़ाने की मांग की है.
चलायी जा रही 10 नावें : सीओ
सीओ राकेश रौशन भारती ने बताया कि बाढ़ प्रभावित गांवों में फिलहाल 10 नावें चलायी जा रही हैं. जहां भी नाव की आवश्यकता होगी, वहां नाव का संचालन कराया जाएगा. प्रशासन बाढ़ की स्थिति पर नजर रख रहा है. ग्रामीणों ने प्रभावित गांवों और घाटों का लगातार निरीक्षण करने के साथ नाव, राहत सामग्री और बचाव दल की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करने की मांग की है.
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