चौठ चंद्र पर चांद को अर्घ्य देकर मांगा दोषमुक्त रहने का आशीर्वाद, जानें कैसे हुई पूजा और क्या रहा खास

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चौठ चंद्र का पूजन करती व्रती महिला | Prabhat Khabar Network

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चंद्रोपासना का लोकपर्व चौठ चंद्र श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. व्रतियों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अर्घ अर्पित किया और चंद्र दर्शन कर स्वयं को दोषमुक्त रखने का आशीर्वाद मांगा. जानिए इस पर्व से जुड़ी खास परंपराएं और प्रसाद.

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दरभंगा: चंद्रोपासना का लोकपर्व चौठ चंद्र सोमवार को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया. व्रतियों ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर अर्घ अर्पित किया और चंद्र दर्शन कर स्वयं को दोषमुक्त रखने का आशीर्वाद मांगा. पर्व को लेकर दो दिन पूर्व से ही घरों में उत्सवी माहौल बनने लगा था. रविवार को दही जमाने के लिए दूध की व्यवस्था को लेकर लोगों को मशक्कत करनी पड़ी, वहीं सोमवार सुबह शहरी क्षेत्र में दूध की किल्लत अपेक्षाकृत कम रही.

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सुबह से शुरू हो गयी थी पूजा की तैयारी

चौठ चंद्र पूजन को लेकर सुबह से ही व्रतियों के साथ परिवार के सदस्य तैयारियों में जुट गये. अर्घ की डाली को धोकर पवित्र किया गया. इसके बाद टिकरी, पिरुकिया सहित विभिन्न पारंपरिक प्रसाद तैयार किये गये. खीर और पूरी भी बनायी गयी. शाम ढलने से पहले पूजन स्थल की साफ-सफाई कर अरिपन बनाया गया और उस पर अर्घ सजाया गया.

अर्घ में शामिल किये गये कई पारंपरिक फल और सामग्री

मिट्टी के बर्तन में जमाये गये दही को विशेष रूप से रखा गया. केले के पत्ते पर खीर का मरड़ बनाया गया और उस पर तुलसी दल रखकर पूरी से ढक दिया गया. अर्घ में केला, सेब, अनार समेत विभिन्न फल रखे गये. मक्का का बाल और खीरा भी विशेष रूप से शामिल किया गया. अरता का पत्ता और बद्धी भी अर्घ का हिस्सा रहे.

चंद्र दर्शन कर मांगी सुख-समृद्धि की कामना

सभी तैयारियां पूरी होने के बाद विधि-विधान से पूजा शुरू हुई. सबसे पहले व्रती ने अर्घ अर्पित किया. इसके बाद परिवार के अन्य सदस्यों ने अर्घ अथवा फल-दही के साथ विशेष मंत्र का पाठ करते हुए चंद्र दर्शन किया. इस दौरान परिवार की सुख-समृद्धि और दोषमुक्त रहने की कामना की गयी.

मरड़ खंडित करने के बाद ग्रहण किया प्रसाद

पूजा समाप्त होने के बाद घर के पुरुष सदस्य ने मरड़ को खंडित किया. इसके बाद प्रसाद ग्रहण किया गया. भोजन में खीर-पूरी के साथ साग और झिगनी की सब्जी खाने की भी परंपरा निभायी गयी. देर रात तक लोग एक-दूसरे के घर प्रसाद पहुंचाते और पर्व की शुभकामनाएं देते नजर आये.

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