बिहार के पहले न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्माण का रास्ता साफ, जानिए कब तक बनेगा डीपीआर

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न्यूक्लियर पावर प्लांट (AI फोटो)

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Nuclear Power Plant: बिहार के पहले न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है. 6 महीने में डीपीआर बनकर तैयार हो जाएगा. इसके बन जाने के बाद बिहार को विकास के साथ-साथ युवाओं को नौकरी भी मिल सकेगी.

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Nuclear Power Plant: बिहार के बांका जिले में न्यूक्लियर पावर प्लांट का निर्माण होने वाला है. राज्य के पहले न्यूक्लियर पावर प्लांट के निर्माण में कई अड़चन आ रहे थे, जिसे अब दूर कर लिया गया है. जल संसाधन विभाग की ओर से इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए तैयारी कर ली गई है. साथ ही न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए बेहद जरूरी पानी की व्यवस्था विभाग की ओर से कर दी गई है.

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यहां से की जाएगी प्लांट को पानी की आपूर्ति

जानकारी के मुताबिक, बांका के न्यूक्लियर पावर प्लांट को बदुआ जलाशय से पानी मिलेगा. यहां से लगभग आठ करोड़ घनमीटर हर साल पानी की आपूर्ति की जाएगी. बदुआ जलाशय से सालों भर पानी आपूर्ति नहीं होने की स्थिति में जलाशय में गंगा के पानी को लाया जाएगा. इसे लेकर नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी कर बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी के प्रबंध निदेशक को जानकारी दी गई है. जिले के भितिया गांव में 700 मेगावाट की दो यूनिट्स का निर्माण एनटीपीसी की ओर से किया जाएगा.

जल संसाधन विभाग ने जारी किया लेटर

बदुआ जलाशय से पानी की आपूर्ति को लेकर प्रस्ताव सिंचाई सृजन भागलपुर के मुख्य अभियंता ने मुख्यालय को भेजा. इसी को लेकर जल संसाधन विभाग ने नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट जारी किया है. पावर प्लांट के संचालन के दौरान हर साल 22 एमसीएम रेडिएशन रहित जल फ्लोबैक के रूप में बदुआ जलाशय में प्रवाहित करना पड़ेगा.

साथ ही न्यूक्लियर पावर प्लांट निर्माण या फिर उपयोग के दौरान अगर जमीन अधिग्रहण की जरुरत पड़ेगी तो उस मद की राशि निर्माण एजेंसी को ही खर्च करनी पड़ेगी. इसके अलावा अगर और ज्यादा पानी की जरुरत पड़ेगी तो इसके लिए अलग से एनओसी लेनी पड़ेगी. इतना ही नहीं, अभियंता प्रमुख (मुख्यालय) ब्रजेश मोहन की ओर से यह क्लियर किया गया है कि अगर विभागीय शर्तों का उल्लंघन किया जाएगा, तो एनओसी रद्द हो जाएगी.

हो सकेंगे ये फायदे

जानकारी के मुताबिक, एटॉमिक इनर्जी कॉरपोरेशन को एनटीपीसी की ओर से प्रस्ताव मंजूरी के लिए भेज दिया गया है. अगले 6 महीनों में डीपीआर तैयार कर लिया जाएगा. जानकारी के मुताबिक, नवंबर महीने में इसका शिलान्यास हो सकता है. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से बिहार को नई पहचान मिल सकेगी. साथ ही राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध हो सकेंगे.

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