बक्सर: दूसरे दिन भी जारी रही नगर निकाय कर्मियों की हड़ताल, 27 सदस्यीय संचालन समिति का गठन

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हड़ताल में शामिल सफाई कर्मचारी | Prabhat Khabar Network

हड़ताल में शामिल सफाई कर्मचारी | Prabhat Khabar Network

बक्सर के डुमरांव में नगर निकाय कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल अपने दूसरे दिन भी जारी है. कर्मचारियों ने सरकार की नीतियों के विरोध में विरोध मार्च निकाला और 27 सदस्यीय संचालन समिति का गठन किया.

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Buxar News: बक्सर के डुमरांव में बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ (ऐक्टू) और बिहार लोकल बॉडीज इंप्लाइज फेडरेशन के संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले नगर निकाय कर्मियों की राज्यव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही. सफाईकर्मियों ने विरोध मार्च निकालकर सरकार की नीतियों और नगर परिषद में खर्च को लेकर सवाल उठाए. इस दौरान आंदोलन को गति देने के लिए 27 सदस्यीय संचालन समिति का भी गठन किया गया.

27 सदस्यीय संचालन समिति का हुआ गठन

हड़ताल के दूसरे दिन सुबह छह बजे सभी सफाईकर्मी पुराना नगर परिषद कार्यालय परिसर में एकत्रित हुए. यहां आंदोलन को प्रभावी ढंग से संचालित करने के लिए 27 सदस्यीय संचालन समिति का गठन किया गया. कर्मचारियों ने एकजुट होकर मांगें पूरी होने तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रखने का संकल्प लिया.

शहर की सड़कों पर उतरे सफाईकर्मी

समिति के गठन के बाद सफाईकर्मियों ने पुराना नगर परिषद कार्यालय से विरोध मार्च निकाला. मार्च गोला रोड, चौक रोड होते हुए छठिया पोखरा पहुंचा, जहां सभा आयोजित कर कर्मचारियों ने अपनी मांगों को दोहराया. इसके बाद जुलूस गौशाला रोड, शहीद मर्द रोड और शक्ति द्वार होते हुए जंगल बाजार चौक पहुंचा तथा अंत में पुनः नगर परिषद कार्यालय परिसर में समाप्त हुआ.

सरकार की नीतियों पर नेताओं का हमला

सभा को संबोधित करते हुए बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ के सचिव शिवशंकर तिवारी, भाकपा (माले) नगर कमेटी के नेता सर्वेश कुमार पांडेय और बिहार लोकल बॉडीज इंप्लाइज फेडरेशन के नेता ओमप्रकाश यादव ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निकायों को निजी हाथों और गैर-सरकारी संस्थाओं (NGO) के हवाले करने की कोशिश की जा रही है, जिससे कर्मचारियों के भविष्य पर संकट गहरा रहा है.

नगर परिषद के खर्च पर उठाए सवाल

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि डुमरांव नगर परिषद में सफाई व्यवस्था के नाम पर हर महीने करीब 96 लाख रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन इस राशि के उपयोग में पारदर्शिता नहीं है. उनका दावा था कि वास्तविक सफाई कार्य पर बहुत कम राशि खर्च होती है, जबकि शेष खर्च को लेकर कई सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और नगर निकायों के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग की.

सैकड़ों कर्मचारियों ने आंदोलन में लिया हिस्सा

हड़ताल और विरोध मार्च में भगवान पासवान, जाबिर कुरैशी, राधेश्याम शर्मा, सीपीआई नेता कृष्णा जी, पूजा यादव, किस्मत कुमार, चंदन राम, रूपक बास्फोर, करन बास्फोर, शीला देवी, रमिया देवी, शोभा देवी सहित सैकड़ों सफाईकर्मियों ने भाग लिया. कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.


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Sujeet Kumar

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By Sujeet Kumar

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