बक्सर के बड़का सिंहनपुरा में धूमधाम से मना मां काली का वार्षिकोत्सव, अंगारों से भरा खप्पड़ लेकर निकली शोभायात्रा
बड़का सिंहनपुरा स्थित काली माता | Prabhat Khabar Network
डुमरांव के बड़का सिंहनपुरा में मां काली का वार्षिकोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। वैदिक मंत्रोच्चारण और शोभायात्रा से पूरा वातावरण भक्तिमय रहा।
Buxar News : अनुमंडल क्षेत्र के पैगम्बरपुर पंचायत अंतर्गत बड़का सिंहनपुरा गांव में शुक्रवार को ग्राम देवी मां काली का वार्षिक वार्षिकोत्सव श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया. पूजा-अर्चना में सभी वर्गों के ग्रामीणों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. वार्षिकोत्सव को लेकर मंदिर परिसर को फूल-मालाओं, रंग-बिरंगी लाइटों और आकर्षक सजावट से भव्य रूप दिया गया था. अहले सुबह से ही मां काली के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, जो दोपहर तक जारी रहा.
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नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशती पाठ के बाद हुआ विशेष पूजन
मंदिर परिसर में पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ मां काली की पूजा-अर्चना और हवन कराया. शंख, घंटे और जय मां काली के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा. परंपरा के अनुसार गांव के प्रत्येक घर से एक हथेली से तैयार आटे का पीठार मां काली को अर्पित किया गया. पंडित त्रिवेणी तिवारी, पं. विकास ओझा और पं. जितेंद्र ओझा ने बताया कि नौ दिनों तक दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के बाद विशेष पूजन और हवन किया जाता है. यह आयोजन ग्रामीणों की सुख-शांति और समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है. सावन मास की सप्तमी के बाद अंतिम शुक्रवार को पूजा करने की परंपरा रही है.
अंगारों से भरा खप्पड़ लेकर गांव में निकले मां के भगत
दोपहर में मां काली के भगत श्रीराम चौधरी जलते हुए अंगारों से भरा खप्पड़ लेकर पूरे गांव का भ्रमण किया. इस दौरान श्रद्धालुओं ने मां काली के जयकारे लगाए. महिलाओं ने घरों में तैयार पुआ, पूड़ी और अन्य पकवान मां को प्रसाद के रूप में अर्पित किए. मंदिर परिसर में महिलाओं ने पारंपरिक देवी गीत भी प्रस्तुत किए. ‘निमिया की डाढ़ मैया लावेली झुलुहवा’ सहित अन्य देवी गीतों से माहौल भक्तिमय हो उठा.
मेले में उमड़ी भीड़, बच्चों के लिए रहा खास आकर्षण
वार्षिकोत्सव के दौरान मंदिर के बाहर बच्चों के लिए मेला भी लगाया गया, जो आकर्षण का केंद्र रहा. आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे. मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि ग्राम देवी मां काली की पूजा गांव की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में शामिल है और प्रत्येक वर्ष ग्रामीणों के सहयोग से इसका आयोजन किया जाता है. श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मंदिर परिसर में आवागमन की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया गया.
पूजनोत्सव को सफल बनाने में पूजा समिति के सदस्य विमलेश ओझा, रमेश ओझा, बबलू ओझा, मुकेश ओझा, पप्पू ओझा, शिवजी ओझा, पवन ओझा, आशीष भंडारी ओझा, रवि ठाकुर सहित ग्रामीणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही.


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