बंदरों के उत्पात से शहरवासी परेशान, छतों पर लोगों का जाना मुश्किल

Updated at : 08 Jan 2025 10:01 PM (IST)
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बंदरों के उत्पात से शहरवासी परेशान, छतों पर लोगों का जाना मुश्किल

शहर बंदरों के उत्पात से परेशान है. बक्सर शहर का कोई ऐसा इलाका नहीं है, जहां बंदर उत्पात नहीं करते हो. बंदरों के उत्पात से शहरवासियों के छतों पर लगे पानी की टंकियों को भी नुकसान पहुंच रहा है.

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बक्सर.

शहर बंदरों के उत्पात से परेशान है. बक्सर शहर का कोई ऐसा इलाका नहीं है, जहां बंदर उत्पात नहीं करते हो. बंदरों के उत्पात से शहरवासियों के छतों पर लगे पानी की टंकियों को भी नुकसान पहुंच रहा है. वहीं छत पर सूखने के लिए कपड़े भी बंदर से बच नहीं पा रहे हैं. स्थिति तो यह है कि यदि कोई बक्सर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने के लिए सीढ़ियों का उपयोग या प्लेटफाॅर्म पर ट्रेन पकड़ने के इंतजार में है और उनके हाथ में थैला है तो ये बंदर वैसे लोगों को भी निशाना बना रहे हैं. बक्सर शहर में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रहीं है, इस समस्या को लेकर कई बार लिखित में जिम्मेदारों को अवगत कराया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई. इस ओर नगर परिषद बक्सर के अधिकारी भी ध्यान नहीं दे रहे हैं. जबकि बंदरों के उत्पात से बचने के लिए नगर परिषद शहरवासियों को टॉल फ्री नंबर उपलब्ध कराया था. मगर उस टॉल फ्री नंबर पर बंदरों के उत्पाद की दी जा रही शिकायत को उसके अधिकारी सुनने को अब तैयार नहीं है.पानी की टंकियों को भी पहुंचा रहे नुकसान : शहर के वीर कुंवर सिंह कॉलोनी, चरित्रवन, स्टेशन रोड, अंबेडकर चौक, सिविल लाइन, सत्यदेव गंज समेत पूरा शहरी क्षेत्र में इन दिनों लोग बंदरों के आंतक से परेशान हैं। लोगों का कहना है कि जिम्मेदारों से कई बार बंदरों से छुटकारा दिलाने की मांग की, लेकिन कोई समाधान नहीं हुआ. स्थानीय निवासी अजय मानसिंहका ने बताया कि कॉलोनी में निरंतर बढ़ रहे बंदरों की संख्या के कारण लोग लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गये हैं. स्थानीय विक्की राय ने बताया कि गलियों की दीवार पर बंदर टोलियों के साथ बैठे रहते हैं, ऐसे में राहगीरों का गुजरना तक मुश्किल हो गया है. खासकर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को हर समय बंदरों का डर बना रहता है. स्थानीय लोगों ने बताया कि बंदरों की टोलियां घरों में घुस कर आए दिन सामान उठा कर ले जाती है. महिलाओं को छतों पर कपड़े सुखाने के बाद बंदरों के आतंक के चलते कपड़ों की रखवाली करनी पड़ती है. वहीं छतों पर रखी पानी की टंकियों को भी बंदर अपना शिकार बनाकर क्षतिग्रस्त देते हैं.

क्या कहते हैं अधिकारीबंदरों को पकड़ने का सिलसिला जारी था. मगर जिस जगह पर बंदरों को ले जाकर छोड़ा जा रहा था. वहां के लोगों ने विरोध करना शुरु कर दिया था. जिस कारण फिलहाल बंदर पकड़ने का काम रोक दिया गया है. वहीं बंदर पकड़ने वाले लोगों के पेमेंट का भी कुछ मामला था. जिस कारण फिलहाल बंदर नहीं पकड़े जा रहे हैं. मगर फिर बंदरों को पकड़ने का काम शुरु किया जायेगा.

आशुतोष कुमार गुप्ता, इओ, नगर परिषद

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