डुमरांव में नगर परिषद की खुली पोल, 10 साल से 'नरक' बना हरिजी का हाता, अफसरों ने कोर्ट के आदेश को भी दिखाया ठेंगा!

Published by : Aditya Kumar Ravi Updated At : 07 Jun 2026 9:54 PM

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जल जमाव की समस्या

Buxar Waterlogging News: डुमरांव नगर परिषद के वार्ड नंबर 22 (थाना के पीछे) में पिछले 10 वर्षों से नाली का गंदा पानी सड़क पर बह रहा है. घरों के आंगन और शौचालय में बैक मार रहा पानी. अफसरों की लापरवाही के खिलाफ फूटा गुस्सा. पढ़ें पूरी ग्राउंड रिपोर्ट.

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Buxar Waterlogging News (सुजीत कुमार ओझा): एक तरफ सरकार और प्रशासन ‘स्वच्छ भारत मिशन’ और ‘चमकते शहर’ के बड़े-बड़े विज्ञापनों से अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बक्सर जिले के डुमरांव नगर परिषद का वार्ड नंबर 22 प्रशासनिक नाकामी और घोर उपेक्षा का सबसे जीता-जागता और शर्मनाक उदाहरण बना हुआ है. यहाँ थाना के ठीक पीछे स्थित ‘हरि जी का हाता’ मोहल्ले के सैकड़ों लोग पिछले लगभग दस वर्षों से नारकीय त्रासदी झेलने को विवश हैं. आलम यह है कि सालों भर नाली का बदबूदार और गंदा पानी मुख्य सड़क पर बहता रहता है, जिससे स्थानीय नागरिकों का जीना पूरी तरह दूभर हो गया है.

आवेदनों का लगा अंबार, पर कुंभकर्णी नींद में सोया रहा प्रशासनिक अमला

इस जानलेवा समस्या से तंग आकर वार्ड के सजग नागरिकों ने पहली बार 14 सितंबर 2015 को तत्कालीन नगरपालिका को एक सामूहिक आवेदन सौंपा था. तब से लेकर आज तक यानी पिछले 10 सालों से केवल आवेदनों का सिलसिला चल रहा है. नागरिकों ने 23 अगस्त 2016, 06 सितंबर 2016, 20 अक्टूबर 2016 और अभी हाल ही में बीते वर्ष 13 अक्टूबर 2025 को भी नगर परिषद को अंतिम गुहार लगाई, मगर लापरवाह अफसरों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी.

लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के आदेश की भी उड़ाई गईं धज्जियां

जब स्थानीय प्रशासन ने कोई सुनवाई नहीं की, तो मोहल्ला वासियों ने 22 अक्टूबर 2016 को अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण कार्यालय (डुमरांव) में बकायदा मुकदमा दर्ज कराया था. आवेदन में नगर विकास विभाग और माननीय उच्च न्यायालय (High Court) के सख्त आदेशों का हवाला देते हुए मांग की गई थी कि सड़क के ऊपर सड़क बनाकर उसे ऊंचा न किया जाए, बल्कि नाली को गहरा कर मुख्य नाले से जोड़ा जाए. इसके साथ ही पूरे मोहल्ले में स्ट्रीट लाइट लगाने की भी मांग थी. तत्कालीन लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने मामले को सही पाते हुए 27 अक्टूबर 2016 को आदेश जारी कर नगर पालिका को मार्च 2017 तक इसका स्थाई समाधान करने का अल्टीमेटम दिया था. लेकिन नगर परिषद ने इस सरकारी आदेश को ठेंगा दिखाते हुए मनमाने ढंग से फिर से सड़क के ऊपर सड़क की ढलाई कर दी, जिससे जलजमाव की समस्या पहले से और ज्यादा खौफनाक हो गई.

घरों के आंगन और शौचालय में बैक मार रहा गंदा पानी, संक्रामक बीमारियों का खतरा

इस विभागीय मनमानी का नतीजा यह है कि मोहल्ले के पुराने मकानों के शौचालय और आंगन का निकास द्वार सालों भर नाली के गंदे पानी में डूबा रहता है. नाली का पानी अब लोगों के घरों के भीतर बैक मार रहा है, जिससे चौबीसों घंटे उठने वाली दुर्गंध और संक्रामक बीमारियों (महामारी) के खतरे के बीच लोग जीने को मजबूर हैं. इस दौरान कई डीएम, कार्यपालक पदाधिकारी बदले और विधायक भी आए-गए, परंतु जनता की तकदीर नहीं बदली.

अब एक बार फिर सिर पर मॉनसून दस्तक देने वाला है, जिससे स्थानीय नागरिकों की धड़कनें बढ़ गई हैं. मोहल्ले वासियों ने नगर परिषद को दोटूक अल्टीमेटम देते हुए मांग की है कि बरसात शुरू होने से ठीक पहले मुख्य नाले और नालियों की समुचित उड़ाही (सफाई) युद्ध स्तर पर कराई जाए. साथ ही नाली के उन मुहानों को चौड़ा किया जाए जहां अक्सर कचरा फंसने से पानी रुक जाता है. अब देखना यह है कि नगर परिषद इस बार भी अपनी पुरानी ढर्रे पर चलते हुए कागजी खानापूर्ति करती है, या फिर जनता को इस 10 साल पुराने नरक से सच में मुक्ति मिलती है.

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