दियारा के गुप्त रास्तों से पहुंच रही थी शराब, पुलिस ने बढ़ाई निगरानी, SDPO बोले- नेटवर्क होगा नेस्तनाबूद

Published by : Suryakant Kumar Updated At : 07 Jun 2026 7:00 AM

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जब्त शराब के साथ पुलिस

Buxar News: बिहार में शराबबंदी के बीच उत्तर प्रदेश (यूपी) से बक्सर के दियारा क्षेत्र के रास्ते शराब तस्करी का एक बेहद शातिर नेटवर्क सामने आया है. इस काले कारोबार में 18 से 25 वर्ष के बेरोजगार युवाओं को बतौर 'कूरियर बॉय' इस्तेमाल किया जा रहा है. ये युवा पुलिस से बचकर कच्चे रास्तों, घनी झाड़ियों और छोटी नावों के सहारे शराब की खेप बिहार लाते हैं. इस बीच चक्की दियारा में पकड़ी गई खेप के बाद पुलिस ने गश्त तेज कर दी है.

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Buxar News (ब्रह्मपुर से संतोष कांत की रिपोर्ट) :
बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून को धता बताते हुए उत्तर प्रदेश से शराब की तस्करी का एक बेहद शातिर और संगठित नेटवर्क सक्रिय है. ग्राउंड रिपोर्ट और खोजी पड़ताल में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस काले कारोबार को अंजाम देने के लिए दियारा क्षेत्र के 18 से 25 वर्ष के युवाओं का इस्तेमाल बतौर ‘कूरियर’ किया जा रहा है. ये युवा यूपी की सीमा से शराब की बड़ी खेप उठाते हैं और दियारा की दुर्गम भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर बिहार में प्रवेश करते हैं. इस पूरे खेल में इन युवाओं का काम सिर्फ माल को तय ठिकाने पर पहुंचाना और अपनी दिहाड़ी लेकर गायब हो जाना है. इसके असली मास्टरमाइंड पर्दे के पीछे पूरी तरह सुरक्षित हैं, जबकि ये युवा चंद रुपयों के लिए अपनी जिंदगी और करियर दांव पर लगा रहे हैं.

कच्चे रास्ते, घनी झाड़ियां और छोटी नावें बनीं तस्करी का ‘डेथ रूट’

शराब तस्करों ने पुलिस और उत्पाद विभाग की आंखों में धूल झोंकने के लिए मुख्य सड़कों और चेकपोस्टों के बजाय दियारा के बेहद दुर्गम रास्तों को अपना मुख्य जरिया बना लिया है. यूपी की सीमा से शराब लोड करने के बाद ये युवा तस्कर दियारा क्षेत्र की ऊंची-ऊंची घनी झाड़ियों (कास) और रेतीले कच्चे रास्तों का इस्तेमाल करते हैं. इन गुप्त रास्तों की सटीक जानकारी सिर्फ स्थानीय लोगों को ही होती है, जिससे पुलिस की गाड़ियों का यहां अचानक पहुंचना लगभग नामुमकिन हो जाता है. इसके अलावा कई जगहों पर नदी पार करने के लिए छोटी नावों का सहारा लिया जाता है. रात के घने अंधेरे या अहले सुबह के वक्त ये लड़के पूरी मुस्तैदी से खेप को बिहार की सीमा में दाखिल करा देते हैं.

कॉर्पोरेट स्टाइल में ‘ड्रॉप एंड रन’ नेटवर्क, कोडवर्ड से होती है डिलीवरी

इस अवैध नेटवर्क की कार्यप्रणाली किसी हाईटेक कॉर्पोरेट डिलीवरी सिस्टम की तरह काम करती है, ताकि कोई पकड़ा भी जाए तो मुख्य माफिया तक कानून के हाथ न पहुंच सके. यूपी से माल उठाने वाले कूरियर लड़कों को यह बिल्कुल नहीं पता होता कि शराब का असली खरीदार कौन है. उन्हें सिर्फ मोबाइल पर एक ‘तय लोकेशन’ (जैसे- किसी खास मोड़ का पेड़, खंडहर या सुनसान बथान) का विवरण दिया जाता है. इन लड़कों का काम सिर्फ इतना होता है कि वे अपनी जान जोखिम में डालकर शराब की खेप को उस तय लोकेशन पर सुरक्षित छोड़ दें. काम पूरा होते ही इन लड़कों को डिजिटल पेमेंट या किसी तीसरे माध्यम से 2,000 से 5,000 रुपये तक की तय मजदूरी मिल जाती है. जो इन बेरोजगार युवाओं के लिए बड़ा आकर्षण है.

चक्की में पकड़ी गई शराब की खेप, तस्करों के नेटवर्क को नेस्तनाबूद करेगी पुलिस: SDPO

इस खोजी खुलासे के बीच, हाल ही में दियारा क्षेत्र के चक्की में पुलिस द्वारा शराब की एक बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है. इस पूरे मामले और तस्करों के सिंडिकेट पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए डुमरांव एसडीपीओ (SDPO) पोलस्त कुमार ने बताया कि चक्की दियारे क्षेत्र में शराब की खेप पकड़ी गई है और पुलिस अपराधियों के इस नए पैंतरे को लेकर पूरी तरह अलर्ट है. उन्होंने कहा कि दियारा के इलाकों में खुफिया और सूचना तंत्र को पहले से कहीं अधिक सक्रिय कर दिया गया है. इसके साथ ही नदी और कच्चे रास्तों पर पुलिस की गश्त और सघन छापेमारी काफी बढ़ा दी गई है. एसडीपीओ पोलस्त कुमार ने सख्त लहजे में कहा कि अंतर्राज्यीय शराब तस्करी के इस पूरे नेटवर्क को बहुत जल्द चिन्हित कर पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया जायेगा.

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सूर्यकांत कुमार प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर हैं. डिजिटल मीडिया में तीन वर्षों का अनुभव रखते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल चैनल न्यूज रील्स से की. इसके बाद नेशन दर्पण और खबरिया जंक्शन में कार्य किया, जहां कंटेंट राइटिंग, वीडियो एडिटिंग और वॉयस ओवर से जुड़े विभिन्न कार्यों का अनुभव हासिल किया. उन्होंने पटना यूनिवर्सिटी से मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन किया है. वर्तमान में वे स्थानीय (हाइपरलोकल) खबरों पर काम कर रहे हैं. इसके अलावा खेल और मनोरंजन से जुड़ी खबरों में भी विशेष रुचि रखते हैं.

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