पटना में खून के काले कारोबार का खुलासा, ब्लड बैंक से चोरी कर पटना के छह अस्पतालों को बेचता था खून

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 24 Jul 2022 8:00 AM

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खून के काले कारोबार का खुलासा और दो सरगनाओं की गिरफ्तारी के बाद औषधि विभाग के ड्रग इंस्पेक्टर व पुलिस प्रशासन ने कई चौंकाने वाले खुलासे किये हैं. आरोपित संतोष कुमार व अजय पटना के छह से अधिक बड़े अस्पतालों और जरूरतमंदों को ब्लड सप्लाइ करते थे.

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पटना. खून के काले कारोबार का खुलासा और दो सरगनाओं की गिरफ्तारी के बाद औषधि विभाग के ड्रग इंस्पेक्टर व पुलिस प्रशासन ने कई चौंकाने वाले खुलासे किये हैं. आरोपित संतोष कुमार व अजय पटना के छह से अधिक बड़े अस्पतालों और जरूरतमंदों को ब्लड सप्लाइ करते थे. औषधि विभाग के सहायक औषधि निरीक्षक विश्वजीतदास गुप्ता ने बताया कि खून की जांच का जिम्मा ड्रग इंस्पेक्टर यशवंत कुमार को दी गयी है. प्रथम दृष्टया जांच में पता चला कि दोनों आरोपित कई प्राइवेट अस्पतालों से जुड़े थे. ब्लड बैंक से खून चोरी कर घर लाकर डंप करते थे और फिर महंगे दामों में बेचते थे.

कई और बड़े अस्पतालों के आ सकते हैं नाम

छापेमारी में जिन लोगों के कागजात मिले हैं, उनमें कंकड़बाग के कई बड़े अस्पताल और डाइग्नोसिस सेंटर है. पुलिस मिले कागजात के आधार पर जांच शुरू कर दी है. खून के इस काले धंधे में केवल संतोष और अजय नहीं बल्कि कई बड़े अस्पताल के कर्मचारियों के अलावे अन्य लोग शामिल हैं. दोनों के मोबाइल में भी अस्पतालों के कर्मचारियों के नंबर मिले हैं.

खास टेंप्रेचर वाले डीप फ्रीजर में रखा जाता है खून

पीएमसीएच ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ रवींद्र कुमार शुक्ला ने बताया कि ब्लड को खास टेंप्रेचर वाले डीप फ्रीजर में रखा जाता है. वहीं रक्तकोष से निकलने के बाद अगर दो घंटे के भीतर नहीं चढ़ाया जाता है, तो उसके खराब होने का खतरा पैदा हो जाता है. खराब ब्लड मरीज को चढ़ाया जाता है तो इससे कई तरह का खतरा पैदा हो सकता है. आशंका है कि कहीं दूषित ब्लड तो किसी को नहीं दिया गया.

चोरी के लॉकेट की तलाश में छापेमारी, फ्रीज से मिले 45 यूनिट ब्लड

लॉकेट कटवाने वाले गिरोह के पकड़े गये दो आरोपितों की निशानदेही पर शनिवार को पत्रकार नगर थाना क्षेत्र के संजय गांधी नगर के रोड नंबर 1 स्थित विजय चौधरी के मकान की तलाशी ली गयी. इस दौरान एक कमरे से फ्रिज में रखा 45 यूनिट ब्लड मिला है. भारी मात्रा में खून मिलने के बाद पुलिस विभाग से लेकर ड्रग विभाग में हड़कंप मच गया. इसकी सूचना एसएसपी मानवजीत सिंह ढिल्लो ने डीएम को दी, जिसके बाद ड्रग विभाग की टीम ने ब्लड जब्त कर लिया. कमरे से इंजेक्शन, टेस्ट ट्यूब आदि मेडिकल के कई सामग्री भी मिली हैं. पता लगाया जायेगा कि यह ब्लड कब लिया गया है. कमरे को सील कर दिया गया है.

दोनों खून की खरीद-बिक्री करते हैं

दरअसल, शुक्रवार को कोतवाली थाने की पुलिस ने संतोष और अजय द्विवेदी नाम के अपराधियों को पकड़ा था. दोनों छोटे-छोटे बच्चों का एक गिरोह बना कर महावीर मंदिर के आसपास बच्चों के गले से लॉकेट चोरी करवाते थे. पुलिस को शक है कि ये दोनों खून की खरीद-बिक्री करते हैं. गिरफ्तार आरोपितों में संतोष कुमार (30 वर्ष) जमुई के लक्ष्मीपुर थाना क्षेत्र के घोड़ापारण का निवासी है. अजय द्विवेदी (53 वर्ष) वैशाली के बिदुपुर थाना क्षेत्र का रहने वाला है. थानेदार के अनुसार इस मामले में ड्रग इंस्पेक्टर के बयान पर अलग से एक एफआरआर पत्रकार नगर थाना में दर्ज की जायेगी. फिलहाल पता लगाया जा रहा है कि इस अवैध धंधे में संतोष के साथ कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं.

दोनों को रिमांड पर लेकर होगी पूछताछ

पुलिस जल्द ही दोनों को रिमांड पर लेगी और पूछताछ करेगी. यह धंधा कब से चल रहा है और कौन-कौन लोग शामिल हैं. पुलिस ने देर शाम तक कई लोगों से इस मामले में पूछताछ भी की है. करीब 16 लोगों के संदिग्ध नंबर मोबाइल सेमिले हैं. चार डाइग्नोसिस सेंटर, तीन बड़े अस्पतालों के अलावे सात छोटे-छोटे अस्पतालों के नाम सामने आये हैं. फिलहाल इनके बारे में जांच चल रही ह

700 में खरीद कर चार से पांच हजार में बेच देते थे ब्लड

दोनों पैसे का लालच देकर आर्थिक रूप से कमजोर लोगों और ड्रग्स के आदि युवकों से खून लेते हैं. एक यूनिट खून का 700 से 750 रुपये देते थे. वहीं अस्पताल में चार से पांच हजार से अधिक रुपये में बेच देते थे, दाम तब बढ़ जाता था, जब दोनों खुद किसी को अपने जाल में फंसाते थे. ये खून को कई बड़े अस्पतालों में सप्लाइ करते थे. दोनों मरीज के परिजनों से मुंहमांगी कीमत पर खून लाकर देते थे, जिसके एवज में वह उन्हीं डाइग्नोसिस सेंटर और अस्पतालों का लेटर पैड देते थे जो पुलिस को कमरे में रखे संतोष के बैग से मिले हैं.

एक बड़े हॉस्पिटल का आइकार्ड मिला है

बैग से कंकड़बाग के कई बड़े अस्पतालों और डाइग्नोसिस सेंटर के लेटर पैड मिले हैं. एक बड़े हॉस्पिटल का आइकार्ड मिला है, जिसमें संतोष काम करता था. जांच में पता चला है कि संतोष काफी पढ़ा-लिखा है. ग्रेजुएशन के अलावा उसने अलग से आइटीआइ, आइटी के अलावे मेडिकल की भी पढ़ाई की है. पुलिस ने सारे डॉक्यूमेंट को जब्त करलिया है.

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