जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र में 2 साल की देरी तो सीधे कोर्ट, 1 अक्टूबर से लागू होंगे नये नियम
जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र (सांकेतिक तस्वीर)
बिहार में जन्म या मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया में देरी अब भारी पड़ सकती है. 1 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले नए नियमों के तहत, 2 साल से अधिक की देरी पर मामला सीधे न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास जाएगा. यह बदलाव रिकॉर्ड को फर्जीवाड़े से बचाने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किया गया है.
Birth Death Certificate Latest Update बिहार में बच्चे के जन्म या परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु के बाद प्रमाण पत्र बनवाने में महीनों-सालों तक टालमटोल करना अब भारी पड़ सकता है. जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड को समय पर दर्ज कराने के लिए केंद्र सरकार ने पंजीकरण की प्रक्रिया में बदलाव किया है. संशोधित प्रावधान 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे. इसके बाद देर से पंजीकरण कराने वालों के लिए सत्यापन और मंजूरी की प्रक्रिया समय के साथ सख्त होती जायेगी. बिहार के लोगों के लिए भी यह बदलाव महत्वपूर्ण है. खासकर ऐसे परिवार, जिन्होंने किसी वजह से जन्म या मृत्यु का पंजीकरण समय पर नहीं कराया है, उन्हें पुराने मामलों में प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अतिरिक्त औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ सकती हैं.
21 दिन में पंजीकरण कराने पर नहीं देना होगा शुल्क
जन्म या मृत्यु की घटना के बाद पंजीकरण के लिए सामान्य समयसीमा 21 दिन निर्धारित है. इस अवधि में आवेदन करने पर पंजीकरण के लिए कोई शुल्क नहीं देना होता है. अस्पताल में बच्चे के जन्म या किसी व्यक्ति की मृत्यु होने पर संबंधित अस्पताल की ओर से भी जन्म-मृत्यु की सूचना दर्ज कराने की प्रक्रिया में भूमिका निभायी जाती है. वहीं घर पर होने वाली घटनाओं के मामले में परिवार को निर्धारित व्यवस्था के तहत सूचना देनी होती है.
समय निकलने के साथ बढ़ती जायेगी प्रक्रिया
21 दिन के भीतर पंजीकरण नहीं कराने पर मामला विलंबित पंजीकरण की श्रेणी में आ जाता है. इसके बाद निर्धारित नियमों के अनुसार अतिरिक्त शुल्क और आवश्यक अनुमति की जरूरत पड़ सकती है. इसलिए परिवार के लिए यह जरूरी है कि जन्म या मृत्यु के बाद प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को टालें नहीं. जितनी अधिक देर होगी, दस्तावेजों की जांच और संबंधित अधिकारियों से अनुमति लेने की प्रक्रिया उतनी ही महत्वपूर्ण हो सकती है.
बिहार से जुड़ी अन्य ताजा खबरों के लिए यहां क्लिक करें..
एक साल से ज्यादा, दो साल तक देरी पर अधिकारी की मंजूरी जरूरी
यदि जन्म या मृत्यु के एक साल से अधिक समय बाद, लेकिन दो साल के भीतर पंजीकरण कराया जाता है, तो इसके लिए निर्धारित अधिकारी की मंजूरी लेनी होगी. ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट (DM), अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के स्तर से आदेश की आवश्यकता होगी. आवेदन के साथ संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन भी किया जा सकता है और निर्धारित शुल्क का भुगतान करना होगा.
दो साल बाद मामला पहुंचेगा न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास
जन्म या मृत्यु के दो साल से ज्यादा समय बीत जाने के बाद पंजीकरण कराने की प्रक्रिया और लंबी हो सकती है. ऐसे मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate First Class) के आदेश की आवश्यकता होगी. यानी दो साल पुराने मामले में केवल स्थानीय स्तर पर आवेदन देकर प्रमाण पत्र बनवाना पर्याप्त नहीं होगा. संबंधित व्यक्ति को निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी. इसके बाद ही पंजीकरण की आगे की कार्रवाई हो सकेगी.
रिकॉर्ड को फर्जीवाड़े से बचाने पर जोर
जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड किसी भी व्यक्ति की पहचान और सरकारी दस्तावेजों के लिए महत्वपूर्ण आधार होता है. देर से दर्ज होने वाले मामलों में रिकॉर्ड की सत्यता को लेकर अतिरिक्त जांच की जरूरत पड़ सकती है. नये प्रावधानों का मकसद जन्म और मृत्यु के आंकड़ों को अधिक व्यवस्थित रखना, रिकॉर्ड में पारदर्शिता बढ़ाना और देर से होने वाले पंजीकरण में गलत जानकारी दर्ज होने की संभावना को कम करना है.
बिहार में ऑनलाइन आवेदन की सुविधा
बिहार में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़ी सेवाओं के लिए ऑनलाइन व्यवस्था भी उपलब्ध है. लोग निर्धारित सरकारी पोर्टल के माध्यम से आवेदन की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. हालांकि, देरी से होने वाले पंजीकरण के मामलों में आवेदन की श्रेणी और जरूरी दस्तावेज घटना की तारीख और देरी की अवधि के आधार पर अलग हो सकते हैं. अस्पताल में होने वाले जन्म और मृत्यु के मामलों में संबंधित संस्थान की ओर से रिकॉर्ड दर्ज कराने की प्रक्रिया पूरी की जाती है. इसके बावजूद परिवार को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि पंजीकरण हुआ है और प्रमाण पत्र उपलब्ध है.
किन कामों में जरूरी होता है जन्म प्रमाण पत्र?
जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल बच्चे के स्कूल में दाखिले से लेकर कई सरकारी और कानूनी प्रक्रियाओं में होता है. जन्मतिथि और जन्मस्थान के प्रमाण के तौर पर यह महत्वपूर्ण दस्तावेज है. इसी तरह मृत्यु प्रमाण पत्र के बिना बैंक खाते, बीमा, पेंशन, संपत्ति और दूसरी कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने में परेशानी आ सकती है. इसलिए परिवार के लिए जरूरी है कि जन्म या मृत्यु के बाद प्रमाण पत्र बनवाने की प्रक्रिया को प्राथमिकता दें.
बिहार के लोगों के लिए क्या है जरूरी?
परिवार में जन्म या मृत्यु होने के बाद प्रमाण पत्र बनवाने को लंबित रखना आगे चलकर अतिरिक्त दस्तावेज, सत्यापन और मंजूरी की वजह बन सकता है. इसलिए घटना के बाद निर्धारित समयसीमा में पंजीकरण कराना सबसे आसान रास्ता है. पुराने मामलों में देरी जितनी ज्यादा होगी, प्रक्रिया उतनी ही औपचारिक होती जायेगी.
Also Read : किसानों के खाते में फिर आएंगे ₹2,000, PM Kisan की 24वीं किस्त की तैयारी; KCC का भी मिलेगा फायदा
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए