नालंदा : सूख रहे गर्म जलकुंड, राजगीर की पहचान पर मंडराया संकट, धरोहर बचाने को सैकड़ों लोग सड़क पर

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फोटो - राजगीर में आयोजित महापंचायत में शामिल लोग | Prabhat Khabar Network

फोटो - राजगीर में आयोजित महापंचायत में शामिल लोग | Prabhat Khabar Network

Nalanda News : राजगीर की पहचान माने जाने वाले गर्म जलकुंडों और झरनों के सूखने के खतरे को लेकर 'धरोहर बचाओ अभियान' के तहत एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया. स्थानीय लोगों ने सरकार से तत्काल भूवैज्ञानिक जांच और बोरिंग पर रोक लगाने की मांग की है.

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Nalanda News : राजगीर की ऐतिहासिक और पौराणिक पहचान माने जाने वाले गर्मजल कुंड एवं झरनों को बचाने की मांग को लेकर रविवार को शहर में 'धरोहर बचाओ अभियान' के तहत एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया. कुंड बचाओ अभियान समिति के अध्यक्ष उमराव प्रसाद निर्मल की अध्यक्षता में आयोजित इस महापंचायत में सैकड़ों की संख्या में स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया.

सभी ने एक स्वर में इस प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण के लिए सरकार से तुरंत ठोस और प्रभावी पहल करने की मांग की.

लगातार सूख रही हैं जलधाराएं, अस्तित्व पर मंडराया संकट

महापंचायत को संबोधित करते हुए अध्यक्ष उमराव प्रसाद निर्मल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गर्मजल के कुंड और झरने ही राजगीर की मुख्य पहचान हैं. लेकिन पिछले कुछ समय से इनकी जलधाराएं लगातार सूखती जा रही हैं, जिससे इनका अस्तित्व ही अब गहरे संकट में पड़ गया है.

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मांग की है कि अविलंब भूगर्भ वैज्ञानिकों की एक उच्च स्तरीय टीम गठित की जाए, जो इन जलस्रोतों में आ रही कमी के वास्तविक कारणों की विस्तृत वैज्ञानिक जांच करे. इसके साथ ही उन्होंने कुंड क्षेत्र और उसके आसपास किए गए सभी गहरे बोरिंग को तत्काल प्रभाव से बंद करने तथा नए निर्माण कार्यों पर पूरी तरह रोक लगाने की जरूरत बताई.

पर्यटन उद्योग और रोजगार पर पड़ेगा सीधा असर

जन सुराज पार्टी के व्यावसायिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष उपेंद्र कुमार विभूति ने कहा कि गर्म कुंडों की जलधाराओं का बंद होना राजगीर के पर्यटन के लिए एक गंभीर खतरे का संकेत है. यदि समय रहते इसका वैज्ञानिक समाधान नहीं निकाला गया, तो इसका सीधा और नकारात्मक असर राजगीर के पर्यटन उद्योग और इस पर टिके स्थानीय रोजगार पर पड़ेगा.

पूर्व पार्षद इंद्र मोहन सिंह निराला ने एक चौंकाने वाला तथ्य सामने रखते हुए कहा कि कभी प्रचुर गर्मजल प्रवाह के लिए प्रसिद्ध रहे 'गंगा-जमुना कुंड' की दोनों जलधाराएं अब पूरी तरह से बंद हो चुकी हैं, जो बेहद चिंताजनक है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इन कुंडों पर ही राजगीर की पूरी अर्थव्यवस्था और हजारों परिवारों की आजीविका निर्भर है.

बोरिंग पर स्थायी रोक लगाने की पुरजोर मांग

नगर परिषद के वरीय वार्ड पार्षद डॉ. अनिल कुमार ने भी ब्रह्मकुंड क्षेत्र की बंद हो रही जलधाराओं की वैज्ञानिक जांच कराने तथा आसपास के रिहायशी व व्यावसायिक इलाकों में बोरिंग पर स्थायी प्रतिबंध लगाने की मांग उठाई. मुखिया मंजू कुमारी ने कहा कि सदियों से देश-दुनिया के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करने वाली इन ऐतिहासिक जलधाराओं के संकट का कारण तत्काल पता लगाया जाना चाहिए.

महिला प्रतिनिधि साबो देवी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि गर्मजल स्रोतों को बचाने के लिए शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो स्थानीय लोगों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा. इसके अलावा सामाजिक कार्यकर्ता संजय कुमार ने भी कुंड क्षेत्र के आसपास अवैध या अनियंत्रित रूप से किए गए सभी बोरिंग को तत्काल सील करने की मांग दोहराई.

महापंचायत में कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

इस महत्वपूर्ण महापंचायत में अनीता गुप्ता, रमेश पान, राकेश कुमार उपाध्याय, गोपाल, बिरजू राजवंशी, सुवेन्द्र राजवंशी, सुरेंद्र यादव, उपेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में विभिन्न संगठनों के सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक मुख्य रूप से उपस्थित रहे. सभी ने मिलकर राजगीर की इस बहुमूल्य प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की.

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