नालंदा की 44 आर्द्रभूमियों की डिजिटल निगरानी शुरू, 335.80 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिक्रमण पर रहेगी नजर
राजगीर का हंसराजपुर सरोवर
नालंदा की 44 आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए वन विभाग ने नई तकनीक अपनाई है. 'आर्द्रभूमि बचाएं' ऐप से इनका डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है, जिससे अतिक्रमण और जल प्रवाह में बदलाव पर नजर रखी जा सकेगी.
Nalanda Wetland Conservation: नालंदा की आर्द्रभूमियों को अतिक्रमण और प्राकृतिक जल प्रवाह में बदलाव से बचाने के लिए वन विभाग ने संरक्षण व्यवस्था को तकनीक से जोड़ना शुरू कर दिया है. नालंदा वन प्रमंडल की ओर से जिले की 44 महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों का स्थल सत्यापन कराया जा रहा है. करीब 335.80 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली इन आर्द्रभूमियों का वास्तविक स्वरूप, सीमा, क्षेत्रफल और मौजूदा स्थिति दर्ज कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है.
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‘आर्द्रभूमि बचाएं’ एप से तैयार होगा डिजिटल रिकॉर्ड
वन विभाग के ‘आर्द्रभूमि बचाएं’ एप के माध्यम से स्थल पर जुटायी जा रही सूचनाओं को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जा रहा है. इससे प्रत्येक आर्द्रभूमि का फील्ड-वेरिफाइड बेसलाइन रिकॉर्ड तैयार होगा. भविष्य में इसी रिकॉर्ड के आधार पर क्षेत्रफल में कमी, सीमा में बदलाव, अतिक्रमण अथवा जल संरचना में परिवर्तन की तुलना करना आसान होगा.
अतिक्रमण पर होगा डिजिटल पहरा
वन विभाग का मानना है कि आर्द्रभूमियों को केवल जलभंडारण स्थल मानकर उनका संरक्षण नहीं किया जा सकता. इनके अस्तित्व में जलागम क्षेत्र, प्राकृतिक जलस्रोत और पानी के आवक-जावक मार्ग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. इन मार्गों में निर्माण या अन्य गतिविधियों के कारण अवरोध पैदा होने पर पूरी आर्द्रभूमि की जलवैज्ञानिक व्यवस्था प्रभावित हो सकती है.
जिले में कृषि विस्तार, आवासीय निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियों के बीच आर्द्रभूमियों के स्वरूप में बदलाव की आशंका बनी रहती है. ऐसे में डिजिटल अभिलेख भविष्य में संरक्षण और निगरानी का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है.
जलागम और निकास तंत्र को भी सुरक्षित रखने पर जोर
वन विभाग के अनुसार स्थल सत्यापन का उद्देश्य केवल आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि आर्द्रभूमियों की मौजूदा स्थिति का प्रमाणिक आधार तैयार करना है. इससे किसी भी बदलाव को शुरुआती चरण में चिन्हित कर समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सकेगी. जलक्षेत्र के साथ उसके प्राकृतिक जलागम और निकास तंत्र को सुरक्षित रखने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा.
आर्द्रभूमियों के स्वामित्व और संरक्षण से जुड़े राजस्व एवं भूमि सुधार तथा जल संसाधन विभागों के साथ समन्वय में भी डिजिटल रिकॉर्ड उपयोगी होगा.
12 प्रखंडों के गांवों में तालाबों का होगा सर्वेक्षण
वन विभाग की ओर से राजगीर, गिरियक, सिलाव, इस्लामपुर, बिहारशरीफ, नूरसराय, एकंगरसराय, अस्थावां, परवलपुर, रहुई, हिलसा और हरनौत प्रखंड क्षेत्र के चिह्नित तालाबों का सर्वेक्षण किया जा रहा है.
- राजगीर: उजरपुर में 3 तालाब - 67.56 हेक्टेयर, हंसराजपुर - 3.52 हेक्टेयर और पिलखी - 2.99 हेक्टेयर.
- गिरियक: घोड़ाकटोरा - 11.02 हेक्टेयर, पोखरपुर - 13.57 हेक्टेयर.
- सिलाव: नगरी - 26.59 हेक्टेयर, सूरजपुर - 14.21 हेक्टेयर, बड़गांव - 6.67 हेक्टेयर.
- इस्लामपुर: अकबरपुर - 2.74 हेक्टेयर, पनहर - 7.30 हेक्टेयर, कोबिल - 13.41 हेक्टेयर, बेशवक - 2.52 हेक्टेयर.
- बिहारशरीफ: तेतरावां - 9.98 हेक्टेयर, तुंगी - 3.81 हेक्टेयर, नौबतपुर लोटन - 2.92 हेक्टेयर, बिहार नगर निगम क्षेत्र के 6 तालाब - 33.80 हेक्टेयर.
- नूरसराय: बेगमपुर के 2 तालाब - 30.25 हेक्टेयर, मुस्तफापुर - 3.65 हेक्टेयर, सरगांव - 3.20 हेक्टेयर, कथमपुरा - 6.48 हेक्टेयर, चंडासी - 2.76 हेक्टेयर.
- एकंगरसराय: रसीसा - 2.93 हेक्टेयर, सिरियावां - 3.86 हेक्टेयर, बरसियावां - 5.39 हेक्टेयर, रादिल - 2.66 हेक्टेयर, सुल्तानपुर - 3.87 हेक्टेयर, ओप - 3.00 हेक्टेयर.
- अस्थावां: जिअर - 17.92 हेक्टेयर, गिलानी - 5.88 हेक्टेयर, अमावां के 3 तालाब - 3.26 हेक्टेयर.
- परवलपुर: शंकरडीह - 3.38 हेक्टेयर.
- रहुई: सिकंदरपुर - 2.74 हेक्टेयर.
- हिलसा: कपसियावां - 2.40 हेक्टेयर, हिलसा नगर पंचायत - 3.03 हेक्टेयर.
- हरनौत: बस्ती - 3.50 हेक्टेयर और श्रीचंदपुर - 3.03 हेक्टेयर.
आर्द्रभूमियां प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन का आधार
डीएफओ राजकुमार एम ने कहा कि आर्द्रभूमि सिर्फ जल संचय का स्थान नहीं, बल्कि प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने वाला महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र है. यह भूजल संरक्षण, जैव विविधता, कृषि और स्थानीय आजीविका में अहम भूमिका निभाती है.
उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के माध्यम से लगातार निगरानी कर जलक्षेत्र में होने वाले बदलाव, अतिक्रमण या अवैध गतिविधियों की समय रहते पहचान की जा सकती है. इससे संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर आर्द्रभूमियों के संरक्षण और प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा.
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