बिहारशरीफ : मूर्ति निर्माण सामग्री की कीमत में 20 से 25 प्रतिशत तक इजाफा, घटे ऑर्डर से मूर्तिकारों की बढ़ी चिंता

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मूर्ति बनाता कलाकार.

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Biharsharif Idol Making Costs Rising : त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही बिहारशरीफ में मूर्तिकार गणेश, दुर्गा और लक्ष्मी की प्रतिमाएं बनाने में जुटे हैं. लेकिन, कच्चे माल की कीमतों में 20-25% की भारी वृद्धि ने उनकी चिंता बढ़ा दी है. जूट, फाइबर ग्लास और पेंट जैसी सामग्री महंगी होने के बावजूद, अपेक्षित ऑर्डर न मिलने से कारोबार पर दबाव बढ़ गया है.

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Biharsharif Idol Making Costs Rising : गणेश चतुर्थी से लेकर विश्वकर्मा पूजा, शारदीय नवरात्रि, दुर्गा पूजा और दीपावली तक के लिए मां दुर्गा, गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती और भगवान विश्वकर्मा की मूर्तियों का निर्माण तेज हो गया है. जिले के मूर्तिकार छोटी-बड़ी प्रतिमाओं को तैयार करने में जुटे हैं. हालांकि, इस बार मूर्ति निर्माण पर भी महंगाई का असर दिख रहा है. 2025 की तुलना में 14 सितंबर 2026 तक निर्माण सामग्री की कीमतों में करीब 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है.

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त्योहारों को लेकर मूर्तिकारों ने तेज किया काम

त्योहारों का सिलसिला शुरू होने के साथ ही मूर्तिकारों की कार्यशालाओं में गतिविधियां बढ़ गयी हैं. गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा और इसके बाद दुर्गा पूजा व दीपावली के लिए अलग-अलग आकार की मूर्तियां तैयार की जा रही हैं. मूर्तिकार समय पर ऑर्डर पूरा करने के लिए दिन-रात काम कर रहे हैं.

कच्चे माल की बढ़ी कीमत ने बढ़ायी लागत

मूर्ति निर्माण में इस्तेमाल होने वाली चिकनी मिट्टी, भूसा, जूट फाइबर, फाइबर ग्लास, एफआरपी रेजिन, हार्डनर, पुट्टी, प्राइमर और ऐक्रेलिक पेंट समेत कई सामग्रियों की कीमत बढ़ गयी है. इसके साथ मजदूरी और ढुलाई खर्च में भी वृद्धि हुई है. इसका सीधा असर मूर्तियों की निर्माण लागत पर पड़ रहा है.

जूट के दाम में आया बड़ा उछाल

देवीसराय के मूर्तिकार रौशन के अनुसार, जूट की कीमत में काफी वृद्धि हुई है. पहले करीब 40 रुपये प्रति किलो मिलने वाला जूट अब करीब 140 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. मूर्ति निर्माण में जूट का बड़े स्तर पर इस्तेमाल होता है. इसलिए इसके दाम में बढ़ोतरी से लागत पर सीधा असर पड़ रहा है.

महंगाई बढ़ी, लेकिन ऑर्डर उम्मीद के मुताबिक नहीं

मूर्तिकार रौशन बताते हैं कि सामान्य तौर पर त्योहारों से कई महीने पहले ही मूर्तियों के ऑर्डर मिलने लगते हैं. इस बार अब तक अपेक्षित संख्या में ऑर्डर नहीं मिले हैं. एक तरफ कच्चे माल की कीमत लगातार बढ़ रही है, तो दूसरी ओर मांग में अपेक्षित तेजी नहीं दिख रही है. इससे मूर्ति निर्माण के कारोबार पर दबाव बढ़ गया है.

ग्राहकों पर पूरा बोझ डालना भी मुश्किल

मूर्तिकारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती बढ़ी लागत और ग्राहकों के सीमित बजट के बीच संतुलन बनाने की है. पूजा समितियां और आम लोग पहले से तय बजट के अनुसार मूर्तियों का ऑर्डर देते हैं. ऐसे में कच्चे माल की बढ़ी कीमत का पूरा बोझ ग्राहकों पर डालना मूर्तिकारों के लिए आसान नहीं है.

फाइबर ग्लास और रेजिन के भाव भी बढ़े

मूर्तिकारों के अनुसार, 2025 की तुलना में 14 सितंबर 2026 तक जूट फाइबर का भाव करीब 80-120 रुपये से बढ़कर 90-140 रुपये प्रति किलो हो गया है. फाइबर ग्लास की कीमत 180-280 रुपये से बढ़कर 200-320 रुपये और एफआरपी रेजिन 100-160 रुपये से बढ़कर 120-180 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है.

पेंट और दूसरी सामग्री भी हुई महंगी

ऐक्रेलिक पेंट की कीमत भी बढ़ी है. 2025 में करीब 200-500 रुपये प्रति किलो मिलने वाला ऐक्रेलिक पेंट अब 220-550 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है. पुट्टी, प्राइमर, हार्डनर और अन्य सामग्री की कीमतों में भी बढ़ोतरी से प्रतिमाओं की कुल लागत बढ़ गयी है.

मुनाफे पर पड़ रहा असर

मूर्तिकारों का कहना है कि निर्माण सामग्री महंगी होने के बावजूद मूर्तियों की कीमत उसी अनुपात में बढ़ाना संभव नहीं है. इससे उनकी लागत बढ़ रही है और मुनाफा प्रभावित हो रहा है. त्योहारों के मौसम में काम बढ़ने की उम्मीद है, लेकिन महंगी सामग्री और अपेक्षाकृत सीमित ऑर्डर कारोबार के लिए चुनौती बने हुए हैं.

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