नालंदा : जैसा भाव रखोगे, वैसा ही अवतार लेकर भक्तों पर कृपा करेंगे भगवान : कृष्ण जी महाराज

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श्री संत उदासीन पंचायती अखाड़ा में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में मौजूद श्रद्धालु.

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श्री संत उदासीन पंचायती अखाड़ा में श्रीमद्भागवत कथा में कृष्ण जी महाराज ने बताया कि भगवान भक्त के भाव और रूप के अनुरूप ही अवतार धारण करते हैं. उन्होंने प्रलयकाल में सृष्टि के ज्ञान व अन्न के बीज रक्षा से लेकर समुद्र मंथन तक के अवतारों का महत्व समझाया.

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श्री संत उदासीन पंचायती अखाड़ा (डाकबंगला के सामने) में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में भगवान के विभिन्न अवतारों की कथा सुनायी गयी. कथा प्रवक्ता पं. कृष्ण जी महाराज रमणरेती वाले ने कहा कि भक्त भगवान को जिस भाव और रूप में याद करता है. प्रभु उसी भाव के अनुरूप उसके लिए अवतार धारण करते हैं.

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भगवान ने सृष्टि के ज्ञान तथा अन्न के बीजों की रक्षा की

उन्होंने कहा कि प्रलयकाल में भगवान ने सम्राट सत्यव्रत और ऋषियों के साथ सृष्टि के ज्ञान तथा अन्न के बीजों की रक्षा की. इसके बाद समुद्र मंथन के दौरान मंदराचल पर्वत को डूबने से बचाने के लिए भगवान ने कच्छप अवतार लेकर पर्वत को अपनी पीठ पर धारण किया। हिरण्याक्ष द्वारा पृथ्वी को समुद्र में छिपाने पर भगवान ने वाराह अवतार लेकर पृथ्वी को अपने दांतों पर धारण कर पुन: स्थापित किया.

श्रीराम ने मर्यादित जीवन का आदर्श प्रस्तुत किया

उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में भगवान के अवतारों की अवधारणा में जीव के विकास की विभिन्न अवस्थाओं का भी वर्णन मिलता है। मत्स्य, कच्छप, वाराह, नरसिंह, वामन, परशुराम, श्रीराम और श्रीकृष्ण सहित विभिन्न अवतारों के माध्यम से जीवन, धर्म, मर्यादा, प्रेम और कर्तव्य का संदेश दिया गया है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने मर्यादित जीवन का आदर्श प्रस्तुत किया, जबकि श्रीकृष्ण ने धर्म की रक्षा के लिए परिस्थितियों के अनुसार कर्म करने का संदेश दिया।

श्रद्धा-विश्वास के साथ की गयी भक्ति व्यर्थ नहीं जाती

पं. कृष्ण जी महाराज ने गौतम बुद्ध से जुड़े प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने भीतर के आत्मतत्व को पहचानने और सभी जीवों में परमात्मा का अंश देखने का प्रयास करना चाहिए. नाम जप, मंत्र साधना और ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास को उन्होंने आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग बताया. उन्होंने भगवान के अन्य अवतारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भक्त के भाव के अनुसार प्रभु द्रौपदी की रक्षा के लिए वस्त्रावतार, गजेंद्र के लिए रक्षावतार तथा समुद्र मंथन के समय अमृत वितरण के लिए मोहिनी अवतार जैसे विभिन्न रूपों में प्रकट हुए. उन्होंने कहा कि भगवान भक्त के भाव को समझते हैं और श्रद्धा व विश्वास के साथ की गयी भक्ति कभी व्यर्थ नहीं जाती.

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