सूर्यास्त होते ही बंद हो जाता है बिहार का ये मंदिर! जानें फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ से क्या है कनेक्शन?
बिहार का रहस्यमयी वन देवी मंदिर (फोटो- प्रभात खबर)
बिहार के बिहटा में स्थित मां वन देवी मंदिर इन दिनों अपनी किसी भव्यता या स्थापत्य के कारण नहीं, बल्कि सदियों से चली आ रही एक लोककथा की वजह से चर्चा में है. मान्यता है कि यहां कभी घना जंगल हुआ करता था और सूर्यास्त के बाद जंगल की ओर जाने से लोग बचते थे. अब इसी लोकविश्वास और रहस्यमयी जंगल की कहानी ने सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ को खास बना दिया है. फिल्म की कहानी को वन देवी मंदिर से जुड़ी इसी स्थानीय लोककथा से प्रेरित बताया जा रहा है.
Van Devi Temple Bihar शाम ढलते ही जिस जंगल की ओर जाने से लोग बचते थे,उसी इलाके का एक छोटा-सा मंदिर अब बॉलीवुड की बड़ी फिल्म की वजह से सुर्खियों में है. पटना के बिहटा के पास स्थित मां वन देवी मंदिर से जुड़ी लोककथाओं को सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’(The Vvaan: Force of the Forrest) की कहानी का आधार बताया जा रहा है. मंदिर से जुड़ी मान्यताएं सदियों पुरानी बतायी जाती हैं, लेकिन इनके पीछे किसी अलौकिक घटना का प्रमाण नहीं है. फिर भी यह मंदिर बिहार की उस लोकसंस्कृति की कहानी कहता है, जहां आस्था, जंगल और पीढ़ियों से चली आ रही कथाएं आज भी गांव की जिंदगी का हिस्सा हैं.
सूर्यास्त होते ही बंद हो जाता है बिहार का ये मंदिर
सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म ‘द वन: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ (The Vvaan: Force of the Forrest) 25 सितंबर 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. फिल्म की कहानी में जिस रहस्यमयी जंगल और सूर्यास्त के बाद वहां जाने पर रोक की बात सामने आती है, उसका संबंध वन देवी मंदिर से जुड़ी स्थानीय लोककथा से बताया जा रहा है. हालांकि, फिल्म की अलौकिक कहानी से अलग वन देवी मंदिर बिहार की उन जीवंत लोक परंपराओं की झलक देता है, जहां आस्था, प्रकृति, ग्रामीण जीवन और पीढ़ियों से चली आ रही कहानियां आज भी साथ-साथ मौजूद हैं.
कहां स्थित है मां वन देवी मंदिर?
मां वन देवी मंदिर पटना जिले में बिहटा के पास अमहारा, राघोपुर और कंचनपुर गांवों के आसपास स्थित है. पटना से इसकी दूरी करीब 35 किलोमीटर बताई जाती है. ग्रामीण परिवेश में स्थित इस मंदिर के आसपास कभी घना जंगल होने की स्थानीय मान्यता है. मंदिर की एक खास बात यह है कि यहां देवी की पूजा किसी भव्य प्रतिमा के बजाय पवित्र ‘पिंड’ के रूप में की जाती है. स्थानीय परंपराओं में इस देवी स्थल को उत्तर प्रदेश के विंध्याचल स्थित मां विंध्यवासिनी से भी जोड़ा जाता है.
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कितनी पुरानी है मंदिर की कहानी?
वन देवी मंदिर को स्थानीय लोग कई सदियों पुराना बताते हैं. फिल्म के लेखक अरुणाभ कुमार ने भी मंदिर से जुड़ी कहानी बताते हुए इसके 16वीं सदी में बनाए जाने की बात कही है. उन्होंने मंदिर पहुंचकर स्थानीय लोगों, पुजारियों और ग्रामीणों से बातचीत के बाद इस लोककथा को फिल्म की टीम के साथ साझा किया था. हालांकि, मंदिर की स्थापना की सटीक तारीख की पुष्टि करने वाला ठोस ऐतिहासिक या पुरातात्विक रिकॉर्ड सामने नहीं है. ऐसे में 16वीं सदी में इसकी स्थापना की बात को स्थानीय मौखिक परंपरा और लोकविश्वास के तौर पर ही देखना उचित है.
सूर्यास्त के बाद जंगल में जाने की क्यों थी मनाही?
वन देवी मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यताओं में सूर्यास्त के बाद जंगल में जाने पर रोक की कहानी शामिल है. स्थानीय परंपरा के अनुसार, जिस इलाके में आज मंदिर स्थित है, वहां कभी घना जंगल हुआ करता था. अंधेरा होने के बाद जंगल में जाना सुरक्षित नहीं माना जाता था और लोगों को सूर्यास्त के बाद वहां नहीं जाने की सलाह दी जाती थी. समय के साथ यह बात एक लोककथा का रूप लेती गई. इसी मान्यता ने फिल्म के निर्माताओं को भी आकर्षित किया. फिल्म की कहानी में रहस्यमयी जंगल और सूर्यास्त के बाद वहां जाने की मनाही को अहम आधार बनाया गया है.
वन देवी मंदिर की कहानी फिल्म तक कैसे पहुंची?
फिल्म के लेखक अरुणाभ कुमार मंदिर पहुंचे थे. उन्होंने स्थानीय लोगों, पुजारियों और ग्रामीणों से बातचीत की और मंदिर से जुड़ी लोककथाओं को समझा. अरुणाभ कुमार के मुताबिक, करीब दो साल पहले उन्होंने यह कहानी निर्देशक दीपक कुमार मिश्रा को बतायी. दोनों को यह लोककथा दिलचस्प लगी और बाद में उन्होंने इसे निर्माता एकता कपूर के सामने रखा. एकता कपूर को भी यह कहानी पसंद आयी और इसके बाद इसे बड़े पर्दे पर लाने की दिशा में काम शुरू हुआ.
फिल्म की कहानी में क्या है कनेक्शन?
‘द व्वान: फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ में एक शहर में पला-बढ़ा व्यक्ति अपने पुश्तैनी गांव लौटता है. वह गांव के लोगों की ओर से जंगल को लेकर बतायी जाने वाली मान्यताओं को अंधविश्वास मानता है. इसके बाद वह उस निषिद्ध जंगल में प्रवेश करता है और कहानी एक रहस्यमयी शक्ति तथा अलौकिक घटनाओं की ओर बढ़ती है. फिल्म में सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया मुख्य भूमिकाओं में हैं. फिल्म का निर्देशन दीपक कुमार मिश्रा और अरुणाभ कुमार ने किया है, जबकि अरुणाभ कुमार इसके लेखकों में शामिल हैं.
क्यों खास है वन देवी मंदिर?
वन देवी मंदिर किसी भव्य स्थापत्य या बड़े पर्यटन परिसर के लिए प्रसिद्ध नहीं है. इसकी खासियत इसकी ग्रामीण लोकेशन, स्थानीय आस्था और पीढ़ियों से चली आ रही लोकपरंपराओं में है. यह मंदिर बिहार के उस सांस्कृतिक पक्ष को समझने का मौका देता है, जहां धार्मिक आस्था केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं रहती, बल्कि गांव, प्रकृति और लोककथाओं के साथ भी जुड़ी होती है.
सूर्यास्त के बाद जंगल में जाने की मनाही वाली कहानी को भी इसी लोकपरंपरा के संदर्भ में समझना चाहिए. मंदिर से जुड़ी रिपोर्टों में इसे पुरानी स्थानीय मान्यता बताया गया है. रात में यहां किसी अलौकिक घटना के घटित होने की पुष्टि करने वाला कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है. इसलिए वन देवी मंदिर का आकर्षण उसके कथित रहस्य से ज्यादा उस लोकविश्वास में है, जो लंबे समय से इस इलाके की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा बना हुआ है.
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