Bihar Student Protest: TRE-4 के विरोध में 22 अगस्त को राजभवन मार्च, PhD स्कॉलर्स और छात्र अब आर-पार के मूड में
प्रेस वार्ता के दौरान की तस्वीर
Bihar Student Protest: बिहार में शिक्षक भर्ती और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर छात्र, रिसर्च स्कॉलर्स और गेस्ट टीचर्स का आंदोलन उग्र हो गया है. TRE-4 परीक्षा वापस लेने और असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती नियमों में बदलाव की मांग को लेकर 22 अगस्त को राजभवन मार्च का आह्वान किया गया है.
Bihar Student Protest: बिहार में शिक्षक भर्ती और उच्च शिक्षा से जुड़े मुद्दों को लेकर छात्रों, रिसर्च स्कॉलर्स और गेस्ट टीचर्स का आंदोलन तेज हो गया है. दो-स्तरीय शिक्षक भर्ती परीक्षा-4 (TRE-4) को वापस लेने, असिस्टेंट प्रोफेसर की प्रस्तावित भर्ती नियमों में बदलाव और लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की मांग को लेकर 22 अगस्त को राजभवन मार्च का आह्वान किया गया है. प्रदर्शनकारी छात्र और रिसर्च स्कॉलर्स आर-ब्लॉक स्थित वीर कुंवर सिंह पार्क से मार्च निकालकर लोक भवन पहुंचेंगे.
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बिहार के ऑल Ph.D. होल्डर्स एंड रिसर्च स्कॉलर्स एसोसिएशन के संयोजक कुमुद पटेल ने बताया कि बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से रिसर्च स्कॉलर्स, गेस्ट टीचर्स और छात्र बड़ी संख्या में पटना पहुंचेंगे. उन्होंने कहा कि मार्च शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाएगा और इसका उद्देश्य सरकार के सामने शिक्षा और भर्ती से जुड़ी मांगों को मजबूती से रखना है.
यह एक सप्ताह के भीतर राजभवन मार्च का दूसरा आह्वान है. इससे पहले विपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव भी छात्रों के धरनास्थल पर पहुंचे थे. उसके अगले दिन उन्होंने राजभवन मार्च किया उन्होंने TRE-4 की सिंगल-लेवल परीक्षा कराने की मांग का भी समर्थन किया है. इस भर्ती प्रक्रिया के तहत 32,388 रिक्त पदों के लिए 1 सितंबर से आवेदन प्रस्तावित हैं.
छह सूत्रीय मांगों पर अड़े रिसर्च स्कॉलर्स
PhD स्कॉलर्स और रिसर्चर्स की छह प्रमुख मांगें हैं. इनमें सबसे अहम मांग असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती में UGC रेगुलेशन 2018 के टेबल-3A को लागू करना है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उम्मीदवारों का मूल्यांकन उनकी शैक्षणिक और पेशेवर उपलब्धियों के आधार पर 100 अंकों के पैमाने पर किया जाना चाहिए, न कि केवल लिखित परीक्षा या मनमाने स्क्रीनिंग मानकों के आधार पर.
इसके अलावा रिसर्च स्कॉलर्स असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए अधिकतम आयु सीमा को 43 वर्ष से बढ़ाकर 55 वर्ष करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि बिहार के विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्तियां स्थायी और नियमित आधार पर होनी चाहिए.
प्रदर्शनकारियों की अन्य मांगों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती में बिहार के लिए डोमिसाइल नीति लागू करना, विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप रोकना और वर्षों से काम कर रहे गेस्ट असिस्टेंट प्रोफेसरों को नियमित नियुक्ति होने तक 65 वर्ष की आयु तक सेवा का लाभ देना शामिल है.
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TRE-4 के साथ खाली पदों का मुद्दा भी गरमाया
छात्र नेता दिलीप कुमार ने कहा कि आंदोलन अब केवल TRE-4 की दो-स्तरीय परीक्षा वापस लेने तक सीमित नहीं है. विभिन्न विभागों में वर्षों से खाली पड़े पदों को भरने की मांग भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा बन गई है. पटना के गर्दनीबाग में छात्र संगठनों का प्रदर्शन लगातार जारी है. यहां एक समूह लाइब्रेरियन के लंबे समय से खाली पदों को भरने के लिए तत्काल अधिसूचना जारी करने की मांग कर रहा है, जबकि दूसरे समूह की मांग स्कूलों और कॉलेजों में संगीत शिक्षकों के रिक्त पदों को जल्द से जल्द भरने की है.
छात्रों और रिसर्च स्कॉलर्स का कहना है कि 22 अगस्त का मार्च इन सभी मांगों को एक साझा मंच पर उठाने का प्रयास है. अब नजर इस बात पर है कि सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती है.
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By अभिनंदन पांडेय
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