बिहार में बिजली संकट का सोलर समाधान! 2030 तक 24 GW रिन्यूएबल एनर्जी का लक्ष्य, ₹1.38 लाख करोड़ होंगे खर्च
बिहार का मिशन सोलर
बिहार अपनी बढ़ती बिजली की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा पर तेज़ी से ध्यान केंद्रित कर रहा है. राज्य सरकार ने 2030 तक 24 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विकसित करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है, जिसका मुख्य आधार सौर ऊर्जा होगी.
Bihar Solar Energy बिहार अपनी बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने के लिए अब पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ-साथ सौर और अन्य अक्षय ऊर्जा स्रोतों पर तेजी से निर्भरता बढ़ा रहा है. राज्य सरकार ने 2030 तक 24 GW की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता विकसित करने और 6 GWh का एनर्जी स्टोरेज सिस्टम तैयार करने का लक्ष्य रखा है. इसके केंद्र में सोलर पावर को रखा गया है. राज्य के ऊर्जा क्षेत्र के सामने हालांकि कई बड़ी आर्थिक चुनौतियां भी हैं. बिजली की खरीद पर होने वाला भारी खर्च और उपभोक्ताओं से होने वाली कम वसूली के बीच सरकार को लगातार अतिरिक्त वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में बिजली उपभोक्ताओं से राज्य ने 19,000 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली की, जबकि बाहर से बिजली खरीदने पर सालाना करीब 25,000 करोड़ से 35,000 करोड़ रुपये खर्च हो रहे हैं.
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मुफ्त बिजली और बढ़ती मांग से बढ़ा बोझ
इसके अलावा 2.2 करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ताओं में से करीब 1.89 करोड़ उपभोक्ताओं को हर महीने 125 यूनिट मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने की योजना पर भी सरकार को लगभग 3,800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार उठाना पड़ रहा है. बिहार में बिजली की औसत दैनिक मांग फिलहाल 7,300 से 7,400 MW के बीच रहती है. गर्मियों में यह मांग बढ़कर करीब 9,500 MW तक पहुंच जाती है. इसके मुकाबले राज्य की अपनी बिजली उत्पादन क्षमता महज 550 MW है. यानी बिजली की जरूरत और घरेलू उत्पादन के बीच बड़ा अंतर है, जिसे फिलहाल बाहरी स्रोतों से बिजली खरीदकर पूरा किया जा रहा है.
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बिहार का सोलर मिशन
एक अनुमान के अनुसार 2030 तक बिहार में बिजली की पीक डिमांड 11,747 MW तक पहुंच सकती है. इसी भविष्य की जरूरत को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में ऊर्जा क्षेत्र के लिए करीब 1.38 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना तैयार की है. इसमें रिन्यूएबल एनर्जी, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन इंफ्रास्ट्रक्चर को प्रमुखता दी गई है. हालांकि, ऊर्जा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अक्षय ऊर्जा पर बढ़ता फोकस केवल आर्थिक दबाव का नतीजा नहीं है. अधिकारियों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में राज्य की पावर कंपनियों की वित्तीय स्थिति में सुधार हुआ है और इसी दौर में ऊर्जा क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में बड़े कदम उठाए जा रहे हैं.
2030 तक 24 GW का लक्ष्य
'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार बिहार की 'रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी 2025' में 2030 तक करीब 24 GW रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है. इसके साथ 6 GWh का एनर्जी स्टोरेज सिस्टम भी विकसित किया जाएगा. इस पूरी रणनीति में सौर ऊर्जा की अहम भूमिका होगी. 2030 तक बढ़ने वाली बिजली की मांग को देखते हुए बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड बिजली उत्पादन से संबंधित परियोजनाओं पर करीब 82,679 करोड़ रुपये खर्च करेगी. इस राशि का इस्तेमाल पंप्ड-स्टोरेज पावर प्रोजेक्ट्स, सोलर इंस्टॉलेशन और बांका व सिवान में न्यूक्लियर पावर की संभावनाओं से जुड़ी फिजिबिलिटी स्टडी जैसी परियोजनाओं में किया जाएगा.
ऊर्जा क्षेत्र के लिए प्रस्तावित निवेश में ट्रांसमिशन नेटवर्क को भी बड़ा हिस्सा दिया गया है. इसके लिए करीब 24,683 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं. इस राशि से लगभग 680 सर्किट-किलोमीटर का ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर विकसित करने की योजना है. इसके अलावा बची हुई राशि का इस्तेमाल बिजली वितरण व्यवस्था, डिजिटल तकनीक के विस्तार और रखरखाव से जुड़े कामों में किया जाएगा. राज्य की अक्षय ऊर्जा योजना में लखीसराय का कजरा सोलर पावर प्लांट एक प्रमुख परियोजना है. करीब 2,866 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना में 301 MW क्षमता का सोलर प्लांट और 523 MWh का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम लगाया गया है. इससे दिन में पैदा होने वाली सौर ऊर्जा को स्टोर कर जरूरत के समय इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी.
बिहार में सौर ऊर्जा का विस्तार
बिहार बड़े सोलर प्लांट्स के साथ-साथ विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा व्यवस्था पर भी जोर दे रहा है. औरंगाबाद में 150 MW के सोलर पार्क पर शुरुआती काम शुरू हो चुका है. वहीं, सरकारी इमारतों पर रूफटॉप सोलर लगाने की दिशा में भी काम जारी है. केंद्र की 'सूर्य संकल्प' योजना के तहत राज्य की करीब 12,000 सरकारी इमारतों पर अब तक 115 MW क्षमता के रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं. इसके अलावा 500 MW की अतिरिक्त क्षमता को हाल ही में मंजूरी दी गई है.
ग्रामीण इलाकों में भी सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं. PM-KUSUM के तहत फीडर सोलराइजेशन परियोजनाओं के जरिए 457 MW क्षमता विकसित करने की योजना है. वहीं, PM सूर्य घर योजना के तहत करीब 10 लाख बिजली उपभोक्ताओं के घरों पर रूफटॉप सोलर लगाने का लक्ष्य रखा गया है.पिछले दो दशकों में बिहार के बिजली क्षेत्र में मांग और उपभोक्ताओं की संख्या दोनों में बड़ा बदलाव आया है. करीब 20 साल पहले राज्य में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 17 लाख थी, जो अब बढ़कर 2.2 करोड़ से अधिक हो गई है. इसी अवधि में प्रति व्यक्ति बिजली खपत में भी पांच गुना से ज्यादा वृद्धि हुई है.
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