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उड़ता बिहार: छोटे शहरों में भी बोनफिक्स बना रहा बच्चों को अपना शिकार, हेरोइन से भी होता है अधिक खतरनाक

Updated at : 31 Aug 2022 5:55 AM (IST)
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उड़ता बिहार: छोटे शहरों में भी बोनफिक्स बना रहा बच्चों को अपना शिकार, हेरोइन से भी होता है अधिक खतरनाक

बिहार के छोटे शहरों में भी बोनफिक्स बच्चों को अपना शिकार बना रहा है. शराब, गांजा व हेरोइन से भी अधिक खतरनाक बोनफिक्स का नशा होता है. शहर में छोटे-छोटे बच्चे में नशे की लत से परिजन परेशान हैं. छोटे शहर में भी बच्चे व किशोर इसके लत में पड़ते जा रहे हैं.

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कैमूर. अब इसे शराबबंदी का असर कहें या फिर आजकल की जीवन शैली का असर कि बड़े शहरों की तरह इन दिनों छोटे शहर में भी किशोर व छोटे बच्चों में एक अलग तरह के नशे की लत बढ़ती जा रही है. यह अनोखी और चिंतित करनेवाले नशा बोनफिक्स या सुलेशन का है. जानकारों की माने तो यह नशा शराब, गांजा और हेरोइन से भी अधिक खतरनाक है. छोटे शहर में भी बच्चे व किशोर इसके लत में पड़ते जा रहे हैं और हर जगह आसानी से मिलने वाले बोनफिक्स को प्लास्टिक के माध्यम से सूंध रहे हैं. इस नशे की चपेट में 10 से 15 वर्ष के बच्चे अधिक हैं.

नशा चार से पांच घंटे तक रहता है

छोटे बच्चे बोनफिक्स का एक पॉकेट खरीद कर कही एकांत जगह ढूंढ़ते है और फिर अकेले या वैसे संगत वाले साथियों ये साथ एकांत में बैठ कर प्लास्टिक के पन्नी पर उसे पहले तो निचोड़ते हैं. उसके बाद हथेली में बंद कर जोर लगा सूघंते हैं. सूंघने के पांच मिनट बाद ही अविकसित शरीर लिये वैसे बच्चों पर यह नशा हावी होने लगता है. जानकारों की माने तो बोनफिक्स का नशा चार से पांच घंटे तक रहता है. नशा टूटने पर वे फिर से वहीं प्रक्रिया दोहराते है. इस तरह दिन में दो बार और कभी कभी शाम में भी इस का एक डोज लेते हैं. यह नशा शरीर को सुन्न कर देता है.

यह नशा सेवन करने वाले को शिथिल कर देता है

बोनफिक्स का नशा करने वाला घंटों शांत बैठे रहते हैं. चार-पांच बच्चे अगर एक जगह बैठे भी हैं, तो आपस में बात तक नहीं करते हैं. खुद में सिमटे रहते हैं. इसी नशे का लगभग आदि हो चुके एक बच्चे से इस नशे के बारे में पूछा गया, तो बताया कि उसे सूंघने के बाद पूरा शरीर हलका हो जाता है. आंखों के सामने रंग बिरंगी तसवीरें नजर आने लगती हैं. कुछ कहने का मन नहीं करता है. मन करता है कि कहीं एकांत अकेले बैठे रहें. वैसे विशेषज्ञों की माने तो हेरोइन व गांजे की नशे की तरह इस का नशा होता है. यह नशा सेवन करने वाले को शिथिल कर देता है और इससे सोचने समझने की शक्ति खत्म हो जाती है.

शहर में कई जगह जुटते हैं सूंघनेवाले

शहर में बोनफिक्स सूंघने वाले बच्चे कम नहीं है. जगजीवन स्टेडियम हो या फिर, गर्ल्स हाइस्कूल या फिर राजेंद्र सरोवर, खाकी गोसाई, हवाई अड्डा आदि जगहों पर आसानी से बोनफिक्स का नशा करते किशोर मिल जायेंगे. शक्तिनगर के रहनेवाले दारा पंडित, असलम, आजाद सुलेमानी आदि ने बताया कि बुरे बच्चों के संगत से इसकी गिरफ्त में उनका बड़ा बेटा भी आ गया था. जानकारी होने पर उसका इलाज कराया गया. हालांकि, हमेशा उस पर नजर रखी जाती है. लेकिन गाहे बगाहे आज भी उनका बेटा नशा करने बहाने से निकल जाता है. इस नशे के शिकार कम उम्र के बच्चे हैं. सबसे बड़ी बात इस नशे वाले बोनफिक्स की हर जगह उपलब्धता. क्योंकि, यह कहीं भी किराना या स्टेशनरी की दुकान पर आसानी से किसी को भी मिल जाता है.

हृदय व फेफड़े पर पड़ता है बुरा असर

डॉक्टरों की माने तो इस नशे के सेवन से हृदय व फेफड़े पर जबर्दस्त असर पड़ता है. लगातार सेवन करने से जान भी जा सकती है. सदर अस्पताल के डॉ विनय कुमार तिवारी बताते हैं कि बोनफिक्स या सनफिक्स में रासायनिक तत्व होता है. बच्चे नशे के लिए जोर से सूंघते है. इससे रासायनिक तत्व सीधे फेफड़े में जाती है. लगातार सेवन से वही रासायनिक तत्व पानी में तब्दील हो जाता है. फेफड़े में सूजन आ जाती है व हर्ट पर इसका सीधा दुष्प्रभाव होता है. समय पर इस का इलाज नहीं हुआ तो मौत भी हो सकती है.

बच्चों पर नजर रखने की हैं जरूरत

इस मामले में इंस्पेक्टर सह थानाध्यक्ष व बाल सुधार पदाधिकारी रामानंद मंडल ने बताया कि बहुत दुःखद बात है कि हमारे शहर के बच्चे इस तरह के खतरनाक नशे के आदी होकर अपनी जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं. उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी. लेकिन, पुलिस ऐसे ठिकानों का पता लगा कर कार्रवाई करेगी. वैसे पुलिस भी अभिभावकों से अपील करती है कि अपने बच्चों पर नजर रखें. क्योंकि, उम्र के अनुसार बच्चे भी नादान होते है और उनको सही गलत की समझ नहीं होती है. अगर फिर भी बच्चा ना सुधरे तो वैसे बच्चों को वे मेरे पास ला सकते है. वैसे बच्चों को गंभीरता से समझाने की कोशिश की जायेगी.

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