Bihar: 1830 करोड़ रुपये कहां खर्च हुए? बिहार के मुखिया महासंघ ने दीपक प्रकाश के विभाग से मांगा हिसाब

Updated:
विज्ञापन

दीपक प्रकाश

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

Bihar: बिहार में पंचायतों से जुड़ी 1830 करोड़ रुपये की राशि को लेकर मुखिया महासंघ ने पंचायती राज विभाग से हिसाब मांगा है. महासंघ ने राशि के इस्तेमाल में पारदर्शिता की मांग की है. साथ ही कहा है कि समस्या नहीं सुलझी तो आंदोलन किया जाएगा और ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ कार्यक्रम होगा

विज्ञापन

Bihar: बिहार प्रदेश मुखिया महासंघ ने पंचायती राज विभाग से 1830 करोड़ रुपये का हिसाब देने की मांग की है. शनिवार को पटना में पंचायत प्रतिनिधियों और प्रखंड अध्यक्षों की बैठक हुई, जिसमें इस मुद्दे पर बात हुई.

विज्ञापन

महासंघ का कहना है कि पंचायतों को मिलने वाले पैसे का इस्तेमाल साफ तरीके से होना चाहिए. संगठन ने विभाग के कुछ अधिकारियों के काम करने के तरीके पर भी सवाल उठाए.

हिसाब नहीं मिला तो आंदोलन की तैयारी

महासंघ ने साफ कहा है कि अगर 1830 करोड़ रुपये की जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई और पंचायत प्रतिनिधियों की समस्याएं नहीं सुलझीं तो आंदोलन किया जाएगा. संगठन ने ‘घेरा डालो, डेरा डालो’ कार्यक्रम करने की भी बात कही है.

इन कामों पर भी उठे सवाल

बैठक में खराब सोलर लाइट का मुद्दा भी उठा. इसके अलावा पंचायत सरकार भवन और कन्या विवाह योजना को लेकर भी प्रतिनिधियों ने सवाल किए. पंचायत सचिवों के तबादले और जिला परिषद से जुड़े पैसों के मामले पर भी चर्चा हुई.

पंचायतों को पूरा सहयोग देने की बात

मुखिया महासंघ के अध्यक्ष मिथिलेश कुमार राय ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि सेवा संकल्प एवं कायाकल्प अभियान में पूरा साथ देंगे. उन्होंने यह भी कहा कि पंचायतों के अधिकार और पैसे के इस्तेमाल को लेकर साफ जानकारी जरूरी है.

बैठक में पंच-सरपंच संघ के अध्यक्ष अमोद कुमार निराला और प्रमुख संघ की कार्यकारी अध्यक्ष जयमाला कुमारी पासवान समेत दूसरे प्रतिनिधि भी मौजूद रहे.

उदित राज ने भी आंदोलन की बात कही

इसी दिन कांग्रेस नेता और पूर्व सांसद डॉ. उदित राज ने असंगठित कामगारों के मुद्दे पर बिहार में आंदोलन करने की बात कही.

सदाकत आश्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम के साथ उन्होंने कहा कि मजदूरों और कर्मचारियों को उनके काम के मुताबिक उचित वेतन, सुरक्षा और सम्मान मिलना चाहिए.

मनरेगा को लेकर उदित राज ने उठाया सवाल

उदित राज ने कहा कि पहले मनरेगा में काम मिलना कानूनी अधिकार था. उन्होंने दावा किया कि नई व्यवस्था में यह अधिकार खत्म हो गया है.

उन्होंने कहा कि बिहार में गरीबी और बेरोजगारी की समस्या को देखते हुए इसका असर मजदूरों पर पड़ सकता है.

बिहार की ताजा खबरों के लिए क्लिक करें

कर्मचारियों की समस्याओं का भी मुद्दा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि नगर निगम, सरकारी विभागों और दूसरी संस्थाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के सामने वेतन, नौकरी की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और काम की स्थिति से जुड़े कई सवाल हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन मुद्दों को लेकर आगे भी आवाज उठाती रहेगी.

इसे भी पढ़ें : बिहार के इस बाजार में बनेगा 2 KM का फोरलेन फ्लाईओवर, NHAI ने निकाला टेंडर, खर्च होंगे 148.90 करोड़

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन