VIDEO: छपरा में बाढ़ का खतरा बढ़ा, सड़क किनारे शरण लेने को मजबूर लोग; बोले- शौचालय तक की सुविधा नहीं

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AI से बनाई गई तस्वीर

बिहार में बाढ़ का खतरा एक बार फिर बढ़ गया है, जिससे छपरा समेत कई जिलों में लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. प्रशासन से राहत की उम्मीद लगाए लोग बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं.

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Bihar Flood update : बिहार में एक बार फिर नदियों के उफान के कारण बाढ़ का खतरा बढ़ गया है. नेपाल में बारिश और नदियों के बढ़ते जलस्तर के बाद सारण समेत कई जिलों को अलर्ट किया गया है. छपरा के बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी पहुंचने के बाद लोगों की मुश्किलें भी बढ़ने लगी हैं. ग्राउंड जीरो पर पहुंचे प्रभात खबर की टीम ने जब लोगों से बात की, तो उन्होंने प्रशासनिक तैयारियों और राहत व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठाए.

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बाढ़ आते ही घर छोड़ने की मजबूरी, सड़क किनारे कटती है जिंदगी

बाढ़ प्रभावित लोगों ने बताया कि पानी बढ़ने के साथ ही उनके घर डूब जाते हैं. ऐसे में परिवार के साथ घर छोड़कर सड़क या ऊंचे स्थानों पर शरण लेना पड़ता है. लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से मौके पर नियमित निरीक्षण या सहायता नहीं मिलती. मजबूरी में लोग प्लास्टिक और तिरपाल लगाकर खुले में रहने को विवश हैं.

रातभर मच्छरों का प्रकोप, महिलाओं के लिए शौचालय सबसे बड़ी समस्या

ग्रामीणों ने बताया कि सड़क किनारे रहने के दौरान सबसे बड़ी समस्या शौचालय और स्नान की होती है. खासकर महिलाओं और बच्चों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है. लोगों ने प्रशासन से मांग की कि बाढ़ के दौरान कम से कम अस्थायी सरकारी शौचालय की व्यवस्था की जाए. ग्रामीणों का कहना है कि एक नाव की व्यवस्था होने से भी लोगों को काफी राहत मिल सकती है.

मुआवजे और राहत पर भी उठे सवाल, बोले- सिर्फ आश्वासन मिलता है

बाढ़ प्रभावित लोगों ने कहा कि हर साल बाढ़ आती है और उनके घर, खेती और पशुओं को नुकसान होता है. इसके बावजूद उन्हें समय पर मुआवजा या राहत नहीं मिल पाती. ग्रामीणों के अनुसार, गरीब और झोपड़ी में रहने वाले परिवारों के लिए बाढ़ के दौरान भोजन, कपड़े और रहने की व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है.

खेती और पशुपालन पर बाढ़ की मार, फसल के साथ मवेशियों का भी नुकसान

ग्रामीणों ने बताया कि इलाके के अधिकांश लोगों की आजीविका खेती पर निर्भर है. पिछले साल परवल, नेनुआ, भिंडी समेत कई सब्जियों की खेती बाढ़ की चपेट में आ गई थी. इस बार भी बाढ़ का पानी बढ़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. गाय और भैंस समेत मवेशियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाना भी मुश्किल हो रहा है.

नाव और डेंगी की मांग, बोले- आने-जाने के लिए निजी नाव का सहारा

बाढ़ प्रभावित ग्रामीणों ने प्रशासन से छोटी नाव या डेंगी उपलब्ध कराने की मांग की है. उनका कहना है कि कई लोगों को अपने मवेशियों और जरूरी सामान के लिए पानी के पार जाना पड़ता है. फिलहाल कई परिवार अपने स्तर पर नाव की व्यवस्था कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी नाव उपलब्ध होने से काफी राहत मिलेगी.

राहत सामग्री की बात सुनते हैं, लेकिन जमीन पर नहीं मिलती मदद

लोगों ने आरोप लगाया कि अखबारों और खबरों में बाढ़ पीड़ितों के बीच चूड़ा, गुड़ और अन्य राहत सामग्री बांटे जाने की जानकारी मिलती है, लेकिन उनके इलाके में राहत सामग्री या भोजन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हो पाती. कुछ ग्रामीणों ने कहा कि बाढ़ के दौरान एक समय का भोजन जुटाना भी मुश्किल हो जाता है.

ग्रामीणों की मांग- पहले से मिले अलर्ट, तत्काल बने राहत की व्यवस्था

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की कि बाढ़ का पानी बढ़ने से पहले ही उन्हें स्पष्ट सूचना दी जाए. साथ ही सुरक्षित स्थान, नाव, शौचालय, भोजन और मवेशियों के लिए चारा-पानी की व्यवस्था की जाए. लोगों का कहना है कि हर साल उन्हें आश्वासन मिलता है, लेकिन जमीनी स्तर पर समय रहते तैयारी नहीं दिखती.

ग्राउंड जीरो से तस्वीर साफ है कि बाढ़ का पानी बढ़ने के साथ ही गरीब और झोपड़ी में रहने वाले परिवारों की मुश्किलें भी बढ़ रही हैं. लोगों को इस बार भी राहत और प्रशासनिक मदद का इंतजार है.

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