बिहार में फ्लैट खरीदारों पर मेहरबान हुई सरकार, इस महीने से फिर शुरू हो सकता है दाखिल-खारिज
अपार्टमेंट की तस्वीर
Bihar Flat Mutation: बिहार में फ्लैट खरीदने वालों के लिए दाखिल-खारिज से जुड़ी परेशानी जल्द कम हो सकती है. सितंबर 2026 से फ्लैटों की जमीन का दाखिल-खारिज फिर शुरू होने की संभावना है. राजस्व विभाग इसके लिए नया सॉफ्टवेयर बना रहा है. नई व्यवस्था से रिकॉर्ड में एकरूपता आएगी और मालिकाना हक से जुड़े विवाद घट सकते हैं.
Bihar Flat Mutation: बिहार में फ्लैट खरीदने के बाद जमीन के रिकॉर्ड को लेकर आने वाली परेशानी जल्द कम हो सकती है. राज्य में फ्लैटों की जमीन के दाखिल-खारिज का काम सितंबर 2026 से दोबारा शुरू होने की उम्मीद है. राजस्व विभाग इस पूरी प्रक्रिया के लिए नया सॉफ्टवेयर तैयार कर रहा है. सरकार चाहती है कि काम का तरीका साफ हो और सभी जगह एक ही नियम के हिसाब से दाखिल-खारिज हो. नई व्यवस्था से फ्लैट की जमीन और उसके मालिक का रिकॉर्ड ठीक तरीके से दर्ज किया जा सकेगा.
आपके शहर में
बिहार में ऑनलाइन कैसे होता है पूरा काम?
जमीन और संपत्ति के जानकार सोमू धानपुरा के मुताबिक, बिहार में दाखिल-खारिज की प्रक्रिया ऑनलाइन की गई है. इसके लिए बिहार सरकार के भूमि रिकॉर्ड पोर्टल पर आवेदन किया जाता है. सबसे पहले आवेदक को ऑनलाइन फॉर्म भरना होता है. इसमें जमीन या संपत्ति की जानकारी के साथ जरूरी दस्तावेज भी देने पड़ते हैं.
दाखिल-खारिज का मतलब क्या है?
दाखिल-खारिज (Mutation) का सीधा मतलब है सरकारी रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज करना. जब कोई व्यक्ति जमीन, मकान या कोई दूसरी संपत्ति खरीदता है, तो रजिस्ट्री के बाद सरकारी रिकॉर्ड में उसका नाम दर्ज कराने की जरूरत होती है.
उदाहरण के लिए, अगर आपने किसी व्यक्ति से जमीन खरीदी है, तो रजिस्ट्री हो जाने के बाद भी सरकारी रिकॉर्ड में पुराने मालिक का नाम रह सकता है. नए मालिक का नाम सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए दाखिल-खारिज कराया जाता है. इसके बाद जमीन की जमाबंदी नए मालिक के नाम पर हो जाती है.
आवेदन के बाद जमीन की जांच कौन करता है?
आवेदन जमा होने के बाद इसकी जांच अंचल कार्यालय के राजस्व कर्मचारी करते हैं. वह जमीन के रिकॉर्ड और आवेदन में दी गई जानकारी का मिलान करते हैं. जरूरत पड़ने पर जमीन की स्थिति और उसकी चौहद्दी की भी जांच की जाती है. जांच पूरी होने के बाद राजस्व कर्मचारी अपनी रिपोर्ट तैयार करते हैं. इसके बाद यह रिपोर्ट आगे समीक्षा के लिए भेजी जाती है और मामला अंचलाधिकारी यानी CO के पास पहुंचता है.
किसी को आपत्ति हो तो क्या होगा?
दाखिल-खारिज के आवेदन के बाद आम सूचना जारी की जाती है. अगर किसी व्यक्ति को संबंधित जमीन को लेकर कोई आपत्ति है, तो वह तय समय के अंदर अपनी बात रख सकता है. अगर कोई आपत्ति नहीं आती और जांच में जमीन से जुड़ी जानकारी सही मिलती है, तो CO दाखिल-खारिज को मंजूरी देते हैं. मंजूरी मिलने के बाद जमाबंदी नए मालिक के नाम पर कायम कर दी जाती है.
आवेदन कहां तक पहुंचा, ऑनलाइन देख सकते हैं
दाखिल-खारिज का आवेदन करने के बाद आवेदक को कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है. आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देखी जा सकती है. इसके लिए पोर्टल पर 'दाखिल खारिज आवेदन स्थिति देखें' विकल्प खोलना होता है. यहां जिला और अंचल की जानकारी देने के बाद आवेदन संख्या या खाता-खेसरा नंबर के जरिए स्टेटस चेक किया जा सकता है.
दाखिल-खारिज के बाद ये दस्तावेज भी मिल सकते हैं
दाखिल-खारिज मंजूर होने के बाद जमीन से जुड़े दूसरे रिकॉर्ड भी ऑनलाइन देखे जा सकते हैं. जरूरत होने पर LPC यानी Land Possession Certificate भी लिया जा सकता है. इसके अलावा ऑनलाइन लगान की रसीद भी प्राप्त की जा सकती है.
बिहार की ताजा खबरों के लिए क्लिक करें
सरकारी जमीन पर भी रहेगी सरकार की नजर
दाखिल-खारिज की व्यवस्था में सरकार ने एक और जरूरी बदलाव किया है. जून 2026 में बिहार सरकार ने कहा था कि दाखिल-खारिज के हर मामले में सरकारी जमीन के रिकॉर्ड की जांच अनिवार्य होगी.
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं. अब आवेदन की जांच बिहार भूमि पोर्टल पर उपलब्ध सरकारी जमीन के रिकॉर्ड से भी की जाएगी.
सरकार का कहना है कि कुछ मामलों में सरकारी जमीन पर गलत तरीके से जमाबंदी कायम किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं. ऐसे गलत दावों और जमीन के रिकॉर्ड में गड़बड़ी को रोकने के लिए सरकारी जमीन की जांच को जरूरी किया गया है.
इसे भी पढ़ें: सितंबर में 4 दिन बंद रहेंगे बिहार के स्कूल, देखें छुट्टियों का पूरा कैलेंडर
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए