तिनटंगा करारी–कहलगांव गंगा घाट पर नियमों को ताक पर रखकर रात तक चल रहे कार्गो: राजस्व व्यवस्था पर उठे सवाल

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गोपालपुर कहलगांव -तिनटंगा करारी गंगा घाट पर क्रूज का फोटो | Prabhat Khabar Network

भागलपुर जिले के तिनटंगा करारी–कहलगांव गंगा घाट पर इन दिनों नियमों को ताक पर रखकर बड़े पैमाने पर कार्गो का परिचालन किया जा रहा है. जिला प्रशासन के सख्त निर्देशों के बावजूद पांच से अधिक निजी संचालकों द्वारा दर्जनों कार्गो का संचालन देर रात तक धड़ल्ले से जारी है, जिससे जहां एक ओर सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बड़े पैमाने पर सरकारी राजस्व की चपत लगने की आशंका भी जताई जा रही है.

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स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था में कार्गो के माध्यम से नदी पार करने वाले वाहनों का कोई पारदर्शी लेखा-जोखा नहीं रखा जा रहा है. आपदा काल में शुरू की गई इस वैकल्पिक सेवा में अब खुले टेंडर (डाक) की प्रक्रिया अपनाने की मांग तेज हो गई है, ताकि सरकार को सही राजस्व मिल सके और अवैध परिचालन पर रोक लग सके.

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शाम 5 बजे तक ही है अनुमति, देर रात तक ढोए जा रहे भारी वाहन

तिनटंगा करारी निवासी जदयू के वरिष्ठ नेता चिरंजीवी राय और भाजपा के जिला सचिव बासुकी मंडल ने इस अवैध परिचालन पर गहरी चिंता व्यक्त की है:

  • प्रशासनिक आदेशों की अवहेलना: जिला प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से गंगा नदी में फेरी व कार्गो सेवा का परिचालन केवल शाम 5:00 बजे तक ही करने का निर्देश जारी किया है.
  • रात का खेल: प्रतिबंध के बावजूद मुनाफाखोरी के चक्कर में कई कार्गो संचालक देर रात तक भारी वाहनों को नदी पार करा रहे हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है.

पारदर्शिता का अभाव: न कोई रिकॉर्ड, न रसीद का अता-पता

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, गंगा घाट पर वर्तमान में चल रही व्यवस्था पूरी तरह अपारदर्शी है:

  1. सार्वजनिक नहीं है डेटा: प्रतिदिन कितने ट्रक, हाइवा, ट्रैक्टर और अन्य व्यावसायिक भारी वाहन इन कार्गो के जरिए इस पार से उस पार भेजे जा रहे हैं, इसका कोई स्पष्ट और प्रामाणिक रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं है.
  2. राजस्व को चपत: व्यवस्थित लेखा-जोखा और सरकारी निगरानी न होने के कारण टैक्स चोरी और अवैध वसूली के आरोप लग रहे हैं, जिससे बिहार सरकार के राजस्व को सीधे तौर पर नुकसान पहुंच रहा है.

आपदा की वैकल्पिक व्यवस्था को परमानेंट करने का विरोध

क्षेत्र के पूर्व सरपंच शंभू यादव और वर्तमान मुखिया नगीना पासवान सहित कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की उच्च स्तरीय समीक्षा करने की मांग की है:

"शुरुआती दौर में जब विक्रमशिला सेतु (पुल) पर मरम्मत कार्य या जाम के कारण आवागमन पूरी तरह प्रभावित हुआ था, तब आपदा जैसी स्थिति से निपटने के लिए एक वैकल्पिक माध्यम के रूप में इस फेरी सेवा की शुरुआत की गई थी, जो उस समय बेहद जरूरी थी. लेकिन अब इसका व्यावसायिक लाभ कुछ चुनिंदा लोग उठा रहे हैं. हमारी मांग है कि जिला प्रशासन इस घाट पर कार्गो परिचालन के लिए तत्काल 'खुली डाक' (ओपन टेंडर) की कानूनी प्रक्रिया अपनाए. टेंडर होने से न केवल व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता आएगी, बल्कि सरकार के खजाने में भी भारी राजस्व आएगा और आम जनता को भी एक सुरक्षित व रियायती दर पर व्यवस्थित सेवा मिल सकेगी." — शंभू यादव (पूर्व सरपंच) एवं नगीना पासवान (मुखिया), गोपालपुर

ग्रामीणों ने चेताया है कि यदि जिला प्रशासन ने इस मामले का संज्ञान लेकर रात में चलने वाले कार्गो पर रोक नहीं लगाई और टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं की, तो वे वरीय अधिकारियों को लिखित शिकायत सौंपकर आंदोलन का रास्ता अख्तियार करेंगे.


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