19 बेटियों के साथ 105 किमी की कांवड़ यात्रा पर निकले पिता
19 बेटियां, 105 किमी की कांवड़ और पिता का संकल्प
सुलतानगंज से देवघर तक 105 किमी की कांवड़ यात्रा पर निकले एक पिता की कहानी खास है. उन्होंने अपनी 19 बेटियों को सनातन परंपरा और संस्कारों से जोड़ने के लिए इस यात्रा में शामिल किया है.
Sultanganj Kanwar Yatra: सुलतानगंज से देवघर जाने वाली कांवड़िया पथ पर इन दिनों लाखों शिवभक्तों की भीड़ है. हर तरफ केसरिया रंग, कंधे पर कांवर और जुबां पर ‘बोल बम’ के जयकारे सुनाई दे रहे हैं. लेकिन इस भीड़ के बीच एक परिवार ऐसा भी है, जिसे देखकर राहगीर कुछ देर ठहर जा रहे हैं.
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झारखंड के गोड्डा जिले के रहने वाले संजीव कुमार अपनी 19 बेटियों के साथ 105 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा पर निकले हैं. सभी बेटियां केसरिया वस्त्र पहनकर कंधे पर कांवर लेकर सुलतानगंज से देवघर के बाबाधाम की ओर बढ़ रही हैं.
मुंगेर के असरगंज कच्ची कांवरिया पथ पर जब यह परिवार पहुंचा, तो बेटियों की एक साथ कांवर यात्रा देखकर आसपास के लोग उन्हें देखने के लिए रुक गए. किसी ने इस यात्रा को पिता की अनोखी भक्ति बताया, तो किसी के लिए यह परिवार और परंपरा से जुड़ाव की अलग तस्वीर थी.
40 साल से बाबा बैजनाथ की पैदल यात्रा कर रहे संजीव
संजीव कुमार के लिए सुलतानगंज से देवघर की यह यात्रा कोई पहली यात्रा नहीं है. वह पिछले 40 वर्षों से लगातार सावन में बाबा बैजनाथ धाम की पैदल यात्रा करते आ रहे हैं.
हर साल वह सुलतानगंज पहुंचकर उत्तरवाहिनी गंगा से गंगाजल लेते हैं और पैदल बाबाधाम की ओर रवाना होते हैं. लेकिन इस बार उनकी यात्रा पहले से अलग है.
इस बार उन्होंने अकेले या कुछ साथियों के साथ यात्रा करने के बजाय अपने परिवार की 19 बेटियों को भी इस धार्मिक यात्रा में शामिल किया है.
केसरिया कपड़ों में 19 बेटियां, कांवर देखकर ठहर जा रहे लोग
सुलतानगंज से देवघर तक करीब 105 किलोमीटर की दूरी कांवड़ियों के लिए आस्था और धैर्य दोनों की परीक्षा होती है. रास्ते में पैदल चलना, भीड़ के बीच आगे बढ़ना और लगातार यात्रा करना आसान नहीं होता.
ऐसे में एक साथ 19 बेटियों का कांवर लेकर इस यात्रा पर निकलना अपने आप में अलग दृश्य बना रहा है.
सभी बेटियां केसरिया वस्त्रों में यात्रा कर रही हैं. कच्ची कांवरिया पथ से गुजरते समय लोग उन्हें देखकर रुक रहे हैं और इस परिवार की यात्रा के बारे में जानने की कोशिश कर रहे हैं.
कांवड़िया पथ पर पहले से ही श्रद्धालुओं की बड़ी भीड़ है. ऐसे में यह परिवार स्थानीय लोगों और दूसरे कांवरियों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है.
‘मोबाइल और आधुनिकता के बीच बेटियों को जड़ों से जोड़ना जरूरी’
संजीव कुमार बताते हैं कि आज की युवा पीढ़ी धीरे-धीरे अपनी संस्कृति और सनातन परंपराओं से दूर होती जा रही है. मोबाइल और आधुनिक जीवनशैली के बीच युवा अपनी जड़ों को भूल रहे हैं.
इसी सोच के कारण उन्होंने अपनी बेटियों को इस यात्रा में शामिल करने का फैसला किया.
उनका कहना है कि बेटियों को धर्म, संस्कृति और संस्कार से जोड़ना भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है. वह चाहते हैं कि उनकी बेटियां अपनी परंपराओं को केवल सुनें नहीं, बल्कि उन्हें खुद अनुभव भी करें.
उनके लिए यह यात्रा केवल बाबा बैजनाथ के दर्शन और जलाभिषेक तक सीमित नहीं है. वह इसे परिवार के साथ आस्था और संस्कार को आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में देख रहे हैं.
बेटियों के लिए भी यह सिर्फ धार्मिक यात्रा नहीं
यात्रा में शामिल बेटियां भी इस अनुभव को लेकर उत्साहित हैं. उनका कहना है कि उन्हें परिवार के साथ इतनी लंबी कांवड़ यात्रा पर निकलकर गर्व महसूस हो रहा है.
उनके मुताबिक, पैदल यात्रा उन्हें शारीरिक रूप से मजबूत बनाने के साथ मानसिक रूप से भी दृढ़ कर रही है. साथ ही महादेव और सनातन परंपरा से उनका जुड़ाव और गहरा हो रहा है.
बेटियों ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि महादेव उनकी मनोकामनाएं पूरी करेंगे. उनके शब्दों में यात्रा के प्रति आस्था के साथ अपने पिता के संकल्प के प्रति भी भरोसा दिखाई देता है.
सुलतानगंज से देवघर तक उमड़ा है कांवड़ियों का सैलाब
सावन के दौरान सुलतानगंज से देवघर तक का कांवड़िया मार्ग देश के प्रमुख धार्मिक यात्रा मार्गों में शामिल हो जाता है. भागलपुर के सुलतानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का जल लेकर श्रद्धालु बाबाधाम के लिए पैदल रवाना होते हैं.
इस दौरान पूरे मार्ग पर ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे गूंजते हैं. जगह-जगह श्रद्धालुओं की सेवा के लिए शिविर लगाए जाते हैं और स्थानीय लोग भी कांवड़ियों की मदद में जुटते हैं.
ऐसे व्यस्त मार्ग पर 19 बेटियों के साथ संजीव कुमार की यात्रा लोगों का ध्यान इसलिए भी खींच रही है क्योंकि इसमें एक धार्मिक परंपरा के साथ परिवार और बेटियों को संस्कार से जोड़ने का संदेश भी दिखाई देता है.
Sultanganj Kanwar Yatra: अब बाबाधाम पहुंचकर जलाभिषेक का इंतजार
संजीव कुमार और उनकी 19 बेटियां फिलहाल सुलतानगंज से देवघर की यात्रा पर हैं. करीब 105 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद उनका लक्ष्य बाबा बैजनाथ धाम पहुंचकर भगवान शिव का जलाभिषेक करना है.
40 वर्षों से चली आ रही अपनी व्यक्तिगत आस्था की यात्रा को इस बार परिवार की 19 बेटियों के साथ आगे बढ़ा रहे संजीव के लिए यह सावन यात्रा यादगार बन गयी है.
कांवड़िया पथ पर गुजर रहे लोगों के लिए भी यह परिवार एक ऐसी तस्वीर छोड़ रहा है, जिसमें पिता की आस्था, बेटियों का उत्साह और परिवार को अपनी परंपराओं से जोड़े रखने का संकल्प एक साथ दिखाई दे रहा है.
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