अमर सुहाग के लिए 13 दिन का मधुश्रावणी व्रत 3 अगस्त से, भागलपुर की नवविवाहिताओं ने शुरू की तैयारियां
नवदंपती की तस्वीर व दुकान में व्रत के लिए साड़ी खरीदते ग्राहक.
Madhu Shravani Vrat 2026 : मिथिलांचल में नवविवाहिताओं का सबसे पावन पर्व मधुश्रावणी व्रत 3 अगस्त से 15 अगस्त तक मनाया जाएगा. यह 13 दिवसीय व्रत अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए रखा जाता है. इस दौरान विशेष कथाओं का श्रवण कराया जाता है, जो पर्व के महत्व को और बढ़ाते हैं.
Madhu Shravani Vrat 2026 : मैथिल समाज की नवविवाहिताओं का सबसे महत्वपूर्ण पर्व मधुश्रावणी व्रत इस वर्ष 3 अगस्त से शुरू होकर 15 अगस्त तक चलेगा. अमर सुहाग, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की खुशहाली की कामना के लिए रखा जाने वाला यह 13 दिवसीय व्रत मिथिला की समृद्ध संस्कृति और परंपरा का अनूठा प्रतीक माना जाता है. इसे लेकर घरों से लेकर बाजार तक उत्साह का माहौल है.
बाजार में दिखने लगी हरियाली, बढ़ी खरीदारी
मधुश्रावणी व्रत को लेकर मैथिल समाज की नवविवाहिताएं हरी साड़ी, हरी चूड़ियां और पूजन सामग्री की खरीदारी में जुट गई हैं. कपड़ा और श्रृंगार की दुकानों पर इन दिनों हरियाली की छटा देखने को मिल रही है. स्थानीय कपड़ा कारोबारी कृष्णा गोयल ने बताया कि इस बार सूरत, अहमदाबाद और जयपुर से 400 से 1000 रुपये तक की आकर्षक हरी साड़ियां मंगाई गई हैं, जिन्हें खरीदने के लिए महिलाओं की अच्छी भीड़ उमड़ रही है.
ऐसे शुरू होता है मधुश्रावणी व्रत
नवविवाहिताओं के अनुसार सावन माह की पंचमी से व्रत की शुरुआत होती है. स्नान के बाद पूजन स्थल को सजाया जाता है और पंडितायन के मार्गदर्शन में विधि-विधान से पूजा संपन्न होती है. कमल या पुरइन के पत्ते पर पारंपरिक आकृतियां बनाई जाती हैं तथा भगवान शिव, माता गौरी और नाग-नागिन की प्रतिमाएं स्थापित कर नैवेद्य अर्पित किया जाता है. इसके बाद पूरे श्रद्धाभाव से व्रत और पूजा का क्रम शुरू होता है.
13 दिनों तक सुनाई जाती हैं धार्मिक कथाएं
विद्वानों के अनुसार मधुश्रावणी व्रत के दौरान प्रतिदिन अलग-अलग धार्मिक कथाओं का श्रवण कराया जाता है. इनमें मैना पंचमी, विषहरी, बिहुला, मनसा, मंगला गौरी, पृथ्वी जन्म, समुद्र मंथन और सती की कथा प्रमुख हैं. सुबह की पूजा में गोसांई और पावनी गीत गाए जाते हैं, जबकि शाम की पूजा में कोहबर और संझौती गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है.
15 अगस्त को होगा व्रत का समापन
सूर्यलोक कॉलोनी के पंडित शंकर मिश्रा ने बताया कि 15 अगस्त को तृतीया तिथि के दिन व्रत का समापन होगा. इस दिन विशेष पूजा के बाद भाई-बहन से जुड़ी पारंपरिक रस्म निभाई जाती है, जिसमें भाई अपनी बहन को उठाकर नैवेद्य ग्रहण करता है. मान्यता है कि यह व्रत नवविवाहिताओं के अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है. यही कारण है कि मैथिल समाज में इस पर्व का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है.
आपके शहर में
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए