भागलपुर के चर्चित काजवलीचक बम ब्लास्ट मामले में दो दोषियों को 10-10 साल की सजा, तीन अभियुक्त बरी

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वर्ष 2022 में काजीवलीचक में बम विस्फोट के बाद क्षतिग्रस्त मकान का फाइल फोटो.

वर्ष 2022 में काजीवलीचक में बम विस्फोट के बाद क्षतिग्रस्त मकान का फाइल फोटो.

Kajwalichak Bomb Blast Verdict : भागलपुर व्यवहार न्यायालय ने काजवलीचक बम ब्लास्ट मामले में अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने दो दोषियों को 10-10 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है, जबकि तीन अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है.

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भागलपुर से ऋषव कृष्णा मिश्रा की रिपोर्ट

Kajwalichak Bomb Blast Verdict : भागलपुर व्यवहार न्यायालय के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-11 ज्योति कुमार कश्यप की अदालत ने तातारपुर थाना क्षेत्र के काजवलीचक बम ब्लास्ट मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने हबीबपुर के चमेलीचक निवासी मो. आजाद और काजवलीचक निवासी नवीन मंडल को दोषी करार देते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई. वहीं इस मामले में आरोपित आशीष कुमार गुप्ता, अशोक मंडल उर्फ गुड्डू और धनंजय मंडल को साक्ष्यों के आधार पर बरी कर दिया गया.

आइपीसी और विस्फोटक अधिनियम के तहत सुनाई गयी सजा

अदालत ने दोनों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 304 के तहत नौ वर्ष के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई. अर्थदंड नहीं देने पर तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा. इसके अलावा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धाराओं 3, 4 और 5 के तहत दोनों अभियुक्तों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 10-10 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया गया. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी. मामले में सरकार की ओर से अपर लोक अभियोजक हेमकांत झा ने पैरवी की.

2022 के विस्फोट में 15 लोगों की हुई थी मौत

यह मामला तीन मार्च 2022 को तातारपुर थाना क्षेत्र के काजवलीचक स्थित एक भवन में हुए भीषण बम विस्फोट से जुड़ा है. इस हादसे में 14 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि एक घायल ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था. इसके अलावा 10 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे. यह घटना बिहार के सबसे बड़े बम विस्फोट मामलों में गिनी जाती है.

13 गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला

जांच के दौरान पुलिस ने पाया था कि विस्फोटक सामग्री को कथित रूप से पटाखा बनाने के उद्देश्य से अवैध रूप से एकत्रित कर रखा गया था, जिससे यह भीषण विस्फोट हुआ. मामले की प्राथमिकी तातारपुर थाने के तत्कालीन पुलिस अवर निरीक्षक पूर्णेंदु कुमार ने दर्ज कराई थी. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 13 गवाहों के बयान दर्ज किए गए. इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने दो अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई, जबकि अन्य तीन आरोपितों को बरी कर दिया.


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Amit Kr Sinha

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By Amit Kr Sinha

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