पीरपैंती पावर प्लांट: रेलवे कॉरिडोर-सह-सड़क के लिए 161.01 एकड़ भूमि अधिग्रहण की अधिसूचना जारी
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Pirpainti Power Plant: भागलपुर जिले की बहुप्रतीक्षित पीरपैंती पावर प्लांट परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासनिक प्रक्रिया तेज हो गई है. पावर प्लांट के लिए प्रस्तावित रेलवे कॉरिडोर-सह-सड़क निर्माण को लेकर भू-अर्जन विभाग ने 161.01 एकड़ भूमि अधिग्रहण की अंतिम अधिसूचना (डिक्लेरेशन) जारी कर दी है. इस कदम से कॉरिडोर निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है.
भागलपुर से ब्रजेश माधुर्य की रिपोर्ट
Pirpainti Power Plant: जिला भू-अर्जन कार्यालय के अनुसार, यह अधिसूचना प्रभावित हितधारकों और भूमि मालिकों (रैयतों) से प्राप्त आपत्तियों के नियमानुसार निस्तारण, गहन जांच और जनसुनवाई की प्रक्रिया पूरी करने के बाद जारी की गई है. इस बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना के दायरे में पीरपैंती अंचल के सात मौजों की जमीन आ रही है, जिससे कुल 501 रैयत प्रभावित होंगे.
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इन 7 मौजों के 501 रैयतों की अधिग्रहित होगी भूमि
परियोजना के सफल क्रियान्वयन के लिए चिह्नित की गई 161.01 एकड़ भूमि का मौजा-वार और प्रभावित रैयतों का विवरण इस प्रकार है:
- बसंतपुर व हरिणकोल में सबसे बड़ा हिस्सा: सबसे अधिक भूमि बसंतपुर मौजा से 65.992 एकड़ (191 रैयत) और हरिणकोल मौजा से 56.4686 एकड़ (165 रैयत) अधिग्रहित की जा रही है.
- अन्य मौजों की स्थिति: खिदरपुर से 17.475 एकड़ (69 रैयत), इमामनगर से 10.2269 एकड़ (24 रैयत), ककरघट से 7.1906 एकड़ (31 रैयत), चौधरी बसंतपुर से 2.0969 एकड़ (13 रैयत) तथा महेशराम मौजा से 1.56 एकड़ (8 रैयत) भूमि शामिल है.
विस्थापन का खतरा नहीं, रैयतों को मिलेगा उचित मुआवजा
भू-अर्जन विभाग ने स्पष्ट किया है कि बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) के विकास के लिए भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, लेकिन इसके तहत किसी भी परिवार का विस्थापन (उजड़ना) नहीं होगा. प्रभावित होने वाले सभी 501 रैयतों को सरकार की नीतियों और भूमि अधिग्रहण पुनर्वास अधिनियम के तहत तय मानकों के अनुसार उचित वित्तीय मुआवजा और अन्य सभी वैधानिक लाभ प्रदान किए जाएंगे.
कैसा होगा 5 किलोमीटर लंबा रेल-सह-सड़क कॉरिडोर?
कोयले की सुगम आपूर्ति और क्षेत्र के बेहतर कनेक्टिविटी के लिए तैयार किए जा रहे इस कॉरिडोर की रूपरेखा तय कर ली गई है:
- लंबाई और चौड़ाई: इस विशेष गलियारे (कॉरिडोर) की कुल लंबाई 5 किलोमीटर और चौड़ाई 120 मीटर निर्धारित की गई है.
- रूट मैप: यह कॉरिडोर पीरपैंती के लक्ष्मीपुर होरंग हॉल्ट से शुरू होकर सुंदरपुर गांव तक जाएगा.
- दोहरा उपयोग: इसमें बिछने वाली रेलवे लाइन का उपयोग मुख्य रूप से पावर स्टेशन तक भारी मात्रा में कोयले की सीधी रैक ढुलाई के लिए होगा. वहीं, इसके साथ बनने वाली सड़क का उपयोग पावर प्लांट के वाहनों के अलावा आम जनता के आवागमन के लिए भी खुला रहेगा.
सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (SIA) रिपोर्ट: औद्योगिक क्रांति की उम्मीद
परियोजना की सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, इस पावर प्लांट और कॉरिडोर के निर्माण से भागलपुर सहित पूरे अंग क्षेत्र को कई दूरगामी लाभ मिलेंगे:
- रोजगार सृजन: निर्माण कार्य के दौरान और प्लांट के चालू होने के बाद स्थानीय कुशल व अकुशल श्रमिकों को बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर मिलेंगे.
- बुनियादी विकास: नई सड़क बनने से सुदूर ग्रामीण इलाकों की पहुंच मुख्य बाजार, उच्च शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं तक बेहद आसान हो जाएगी.
- बिजली संकट का समाधान: पावर प्लांट से उत्पादन शुरू होने पर राज्य में ऊर्जा संकट काफी हद तक कम होगा, जिससे क्षेत्र में औद्योगिक व व्यापारिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलेगी.
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