भागलपुर और बांका में 15 जुलाई तक गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट

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15 जुलाई तक होगी  बारिश, शनिवार से हो रही है लगातार बारिश

मानसून की बारिश के बाद की स्थिति | Prabhat Khabar Network

भागलपुर समेत पूरे दक्षिण बिहार में मॉनसून अब पूरी तरह से अपनी लय में लौट आया है, जिससे पिछले कई दिनों से जारी उमस भरी गर्मी से आम लोगों को बड़ी राहत मिली है. बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU), सबौर और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी संयुक्त पूर्वानुमान के अनुसार, क्षेत्र में 15 जुलाई तक गरज-चमक और तेज हवाओं के साथ मानसूनी बारिश का दौर जारी रहेगा.

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शुक्रवार की देर रात से शुरू हुई बूंदाबांदी शनिवार की सुबह मूसलाधार बारिश में तब्दील हो गई, जो लगातार जारी है. यह आसमानी बारिश खरीफ सीजन की मुख्य फसल 'धान' की खेती करने वाले किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. मौसम विभाग ने बांका और नवादा जिलों में एक-दो स्थानों पर भारी बारिश की भी चेतावनी जारी की है, वहीं कृषि वैज्ञानिकों ने इस अनुकूल मौसम को देखते हुए धान की बुआई और रोपाई के लिए विशेष सलाह दी है.

तापमान में आएगी गिरावट, 15 किमी की रफ्तार से चलेगी पछिया हवा

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आगामी 15 जुलाई तक आसमान में घने बादल छाए रहेंगे. इस अवधि के दौरान मौसम के मुख्य मानक निम्नलिखित रहने का अनुमान है:

  • तापमान: क्षेत्र का अधिकतम तापमान 31 से 32 डिग्री सेंटीग्रेड और न्यूनतम तापमान 26 से 27 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच दर्ज किया जाएगा, जिससे मौसम खुशनुमा बना रहेगा.
  • हवा की गति: पूर्वानुमान की अवधि में 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पछिया हवा चलने की संभावना जताई गई है.
  • आर्द्रता (नमी): हवा में सापेक्ष आर्द्रता सुबह के समय 90 से 95 प्रतिशत और दोपहर के वक्त 65 से 75 प्रतिशत तक रहेगी, जो फसलों के विकास के लिए बेहद अनुकूल है.

धान की खेती के लिए कृषि वैज्ञानिकों की विशेष एडवाइजरी

बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर के कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि वे इस मानसूनी बारिश के पानी का अधिकतम लाभ उठाएं और खेतों में नमी का उपयोग करते हुए धान की निम्नलिखित वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाएं:

1. इन उन्नत किस्मों की तुरंत करें बुआई:

किसान भाई धान की सबौर दीप, प्रभात, शुष्क सम्राट और सहभागी जैसी उन्नत एवं कम समय में तैयार होने वाली किस्मों की बुआई तुरंत शुरू कर दें.

2. बीज उपचार है बेहद जरूरी (Seed Treatment):

फसलों को फफूंद (फाउल) और जनित रोगों से बचाने के लिए बुआई से पहले बीजों का उपचार अवश्य करें. इसके लिए कार्बेन्डाजिम (Carbendazim) 2.0 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से मिलाकर बीजोपचार करने के बाद ही खेतों में डालें.

3. नर्सरी का रखरखाव और सीधी बुआई (DSR):

  • जो नर्सरी (बिचड़ा) 10 से 15 दिनों की हो चुकी है, उसमें समय पर खरपतवार निकालने के लिए निराई-गुड़ाई का कार्य पूरा कर लें.
  • मध्यम अवधि में तैयार होने वाली धान की मुख्य किस्में जैसे— राजेन्द्र नीलम, राजेन्द्र कस्तूरी और राजेन्द्र श्वेता की रोपाई का यह बिल्कुल सही समय है.
  • पानी की उपलब्धता वाले खेतों में किसान भाई सबौर मोती धान और सबौर सोना जैसी बेहतरीन किस्मों की सीधे खेतों में बुआई (Direct Seeding of Rice) भी कर सकते हैं.

लगातार हो रही इस बारिश से दियारा और मैदानी इलाकों के किसानों के चेहरे खिल गए हैं, क्योंकि इससे डीजल पंप सेट के सहारे सिंचाई करने की लागत में भारी कमी आएगी. कृषि विभाग ने किसानों को आकाशीय बिजली (वज्रपात) के खतरे को देखते हुए बारिश के दौरान ऊंचे पेड़ों और खुले खेतों में न जाने की भी चेतावनी दी है.


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ललित किशोर मिश्र

लेखक के बारे में

By ललित किशोर मिश्र

ललित किशोर मिश्र प्रिंट माध्यम में 15 वर्षों से व डिजिटल माध्यम में पिछले 3 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. करियर की शुरुआत दैनिक जागरण से की. अभी प्रभात खबर के भागलपुर कार्यालय में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, रेलवे और परिहवन में रुचि रखते हैं.

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