बाढ़ में डूबता शहर: किरायेदारों ने छोड़ा घर, रिश्तेदारों के यहां शरण ले रहे मकान मालिक

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गंगा के पानी के सागंगा के पानी के साथ-साथ नाले का गंदा पानी भरता जा रहा है.

गंगा के बढ़ते जलस्तर ने भागलपुर शहर के निचले इलाकों में हाहाकार मचा दिया है. आदमपुर घाट से किलाघाट तक पानी भर चुका है, जिससे लोगों को घर छोड़ना पड़ रहा है. मच्छरों, सड़ांध और जहरीले जीवों के खतरे के बीच लोग सुरक्षित ठिकानों की तलाश कर रहे हैं.

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भागलपुर. गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ भागलपुर शहर के निचले इलाकों में लोगों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है. चार दिनों से अधिक समय बीतने के बाद भी आदमपुर घाट, बैंक कॉलोनी, मानिक सरकार घाट, गोलाघाट और किलाघाट समेत कई इलाकों में गंगा के पानी के साथ नाले का गंदा पानी भरता जा रहा है. जलजमाव, सड़ांध, मच्छर और जहरीले जीव-जंतुओं के कारण लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो गया है. स्थिति यह है कि कई किरायेदार घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर चले गये हैं, जबकि कुछ मकान मालिक भी सगे-संबंधियों के घर में शरण लेने को मजबूर हैं.

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बड़े नाले में बढ़ता जा रहा पानी, सड़ांध से जीना मुश्किल

शहरी क्षेत्र के बड़े नाले में पानी भरने से आसपास के इलाकों में गंदगी और सड़ांध की समस्या बढ़ गयी है. स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क और घरों के आसपास पानी जमा रहने से आवागमन मुश्किल हो गया है. लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है और लोगों को बीमारियों का डर सता रहा है.

मच्छर, सांप और जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा

दीपनगर क्षेत्र की झुग्गी बस्ती समेत करीब 200 घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश करने की बात सामने आयी है. डीवाइएफआई नेता मनोज गुप्ता ने बाढ़पीड़ितों के लिए सरकार से राहत उपलब्ध कराने की मांग की है.

बैंक कॉलोनी निवासी सूरज प्रभात दुबे ने बताया कि इलाके के अधिकतर घरों के ग्राउंड फ्लोर में पानी भरने लगा है. सड़क पर घुटने तक पानी जमा है, जिससे बाइक से आना-जाना भी मुश्किल हो गया है. उन्होंने बताया कि सड़क पर कीचड़ के कारण वह खुद फिसलकर गिर चुके हैं. उनके अनुसार मच्छरों की समस्या लगातार बढ़ रही है और कई किरायेदार घर छोड़कर गांव या सगे-संबंधियों के यहां शरण ले रहे हैं. घरों में सांप और बिटगोय जैसे जहरीले जीव-जंतु घुसने की भी समस्या बनी हुई है.

अपार्टमेंट के बेसमेंट में पानी, वाहनों की सुरक्षा की चिंता

मानिक सरकार मुहल्ले में कई घरों में पानी घुसने की बात कही जा रही है. आसपास के अपार्टमेंट के बेसमेंट में भी पानी भरने लगा है. इससे लोगों को अपने वाहनों को सुरक्षित स्थान पर रखने की चिंता सताने लगी है.

सखीचंद घाट निवासी आनंद मिश्रा ने बताया कि कई लोगों को घर छोड़ना पड़ा है. वहीं दीपनगर घाट के समीप रहने वाले राज कुमार ने बताया कि आसपास पानी जमा होने से सड़ांध फैल रही है और घर में रहना मुश्किल हो गया है.

साहेबगंज में 500 से अधिक घरों में पानी घुसने का दावा

राजद नेता तिरूपतिनाथ यादव ने बताया कि साहेबगंज मोहल्ले के बिंद टोली, मोहनपुर, साकम, रामतोलपुर, लालूचक, नीलकोठी और आसपास के इलाकों में 500 से अधिक घरों में बाढ़ का पानी घुस गया है. नीलकोठी में लोगों का घरों से निकलना मुश्किल होने की बात कही गयी है. रमण कुमार ने बताया कि पानी भरने के कारण मवेशियों के लिए चारे की समस्या उत्पन्न हो गयी है. लोगों के घरों में ही फंसे रहने से रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी मुश्किल हो रहा है.

बूढ़ानाथ मार्ग और पार्क में भी जमा है पानी

गंगा का जलस्तर बढ़ने के साथ शहर के निचले इलाकों में बाढ़ का असर और स्पष्ट दिखाई देने लगा है. सखीचंद घाट की पुलिया के ऊपर से गंगा का पानी बहने की बात सामने आयी है. बूढ़ानाथ मार्ग में भी पानी भर गया है. बूढ़ानाथ मंदिर के नीचे स्थित मशानी काली परिसर और पार्क में पानी जमा होने से तालाब जैसा दृश्य बना हुआ है. स्थानीय लोगों के अनुसार पार्क में करीब 10 दिनों से पानी जमा है.

बीमारी और आवागमन की चिंता बढ़ी

लंबे समय से जलजमाव के कारण लोगों को आवागमन के साथ स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की चिंता भी सताने लगी है. मच्छरों और गंदे पानी के बीच रहने से लोगों में संक्रमण और अन्य मौसमी बीमारियों का डर बना हुआ है. स्थानीय लोगों ने प्रभावित इलाकों से पानी निकालने, साफ-सफाई कराने और बाढ़पीड़ित परिवारों को राहत उपलब्ध कराने की मांग की है.

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