भागलपुर के आदमपुर चौक पर बनने जा रहा 5 करोड़ का भव्य धाम: 423 साल पुराने तेतरी मंदिर के स्वरूप में विराजेगी मां दुर्गा, जानिए क्या है पूरा प्लान

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तेतरी दुर्गा मंदिर में विराजेगी माता

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भागलपुर के आदमपुर चौक पर इस बार मां दुर्गा का स्वागत एक नए भव्य मंदिर में होगा. 5 करोड़ की लागत से 423 साल पुराने तेतरी दुर्गा मंदिर के स्वरूप में बन रहे इस दिव्य धाम का निर्माण 2027 तक पूरा हो जाएगा. यह मंदिर आस्था का एक स्थायी केंद्र बनेगा.

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Bhagalpur Durga Temple: रेशमी शहर भागलपुर के आदमपुर चौक पर इस बार शारदीय नवरात्र का रंग कुछ अलग ही नजर आने वाला है. वर्षों से जहां हर साल बांस-बल्ले और कपड़ों के विशाल पंडाल में जगदंबा की अगवानी होती थी, वहां अब एक नए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत हो चुकी है. आदमपुर की धरती पर अब मां दुर्गा का अस्थायी पंडाल नहीं, बल्कि 5 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से एक भव्य और दिव्य मंदिर आकार ले रहा है. नवगछिया के ऐतिहासिक और सिद्ध शक्तिपीठ तेतरी दुर्गा मंदिर के हूबहू स्वरूप में बनने वाला यह मंदिर साल 2027 में पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा. इसी नवनिर्मित स्थायी मंदिर में मां दुर्गा विराजेंगी. इस बड़े फैसले ने न केवल आदमपुर के श्रद्धालुओं में अपार उत्साह भर दिया है, बल्कि पूरे शहर में इस नए पावन स्वरूप की चर्चा छिड़ गई है.

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इस बार का बदला अंदाज और 50 कारीगरों का कमाल

मंदिर निर्माण की नींव खुद जाने की वजह से इस बार आदमपुर चौक पर बड़े और भव्य पंडाल के बजाय एक सादगी भरे छोटे पंडाल में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जाएगी. आदमपुर दुर्गापूजा महासमिति के पदाधिकारियों का कहना है कि भले ही बाहरी तामझाम और विशाल पंडाल को इस बार सीमित किया गया है, लेकिन भक्ति और विधि-विधान में कोई कमी नहीं रहेगी. मुख्य पुजारी पंडित सुनील झा और पंडित दुर्गानंद झा के संचालन में पूजा के सभी धार्मिक अनुष्ठान संपन्न होंगे. पिछले वर्षों की तरह ही महासप्तमी से लेकर विजयादशमी तक विशाल महाप्रसाद और भोग वितरण का आयोजन होगा. इस सपने को साकार करने के लिए प्रख्यात कलाकार शंभू मंडल के नेतृत्व में करीब 50 कुशल कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं.

37x30 वर्ग फीट में बन रही भूकंपरोधी नींव

आदमपुर महासमिति के सचिव राकेश दुबे उर्फ गुड्डू दुबे के अनुसार नए मंदिर का निर्माण बेहद आधुनिक और मजबूत संरचनात्मक दृष्टिकोण से कराया जा रहा है. 37 वाई 30 वर्ग फीट के क्षेत्र में आकार लेने वाले इस मंदिर की नींव को विशेष रूप से बेहद मजबूत और भूकंपरोधी बनाया जा रहा है. ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि भविष्य में तेज आंधी, मूसलाधार बारिश या भूकंप के झटकों में भी यह पावन ढांचा पूरी तरह सुरक्षित और अडिग रहे. यह मंदिर केवल एक धार्मिक इमारत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए आस्था का एक स्थायी केंद्र बनने जा रहा है.

1954 से शुरू हुआ था आस्था का सफर

आदमपुर चौक पर दुर्गा पूजा की शुरुआत की कहानी भी बेहद दिलचस्प और ऐतिहासिक है. वर्तमान अध्यक्ष डॉ. आनंद मिश्रा बताते हैं कि इस स्थान पर पहली बार सन 1954 में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा शुरू की गई थी. उस समय पंडित बैद्यनाथ झा ने पूरे विधि-विधान के साथ पहला पूजन कराया था, जबकि रोहित साह सचिव और वेदानंद झा अध्यक्ष के रूप में आयोजन की कमान संभाल रहे थे. तब से लेकर आज तक स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं के निरंतर सहयोग से यह परंपरा बिना रुके लगातार चली आ रही है. सात दशकों से चला आ रहा यह विश्वास अब 5 करोड़ के भव्य मंदिर के रूप में नया मोड़ ले रहा है.

423 साल पुराना तेतरी मंदिर का रहस्य और महिमा

जिस तेतरी दुर्गा मंदिर के स्वरूप में आदमपुर का नया मंदिर बन रहा है, उसका इतिहास बेहद चमत्कारिक और मुंगेर की प्रसिद्ध बड़ी दुर्गा महारानी से जुड़ा माना जाता है. लोक मान्यताओं के अनुसार लगभग 423 वर्ष पूर्व यानी सन 1600 ईस्वी के आसपास ग्रामीणों को एक स्वप्न आया था कि कलबलिया धार में माता का एक मेढ़ यानी प्रतिमा का ढांचा बहकर आया है. जब खरीक के काजीकौरेया गांव के लोगों ने उस मेढ़ को वापस ले जाने की कोशिश की, तो वह अपनी जगह से टस से मस नहीं हुआ. इसके बाद उसी पवित्र स्थान पर माता की स्थापना कर भव्य मंदिर बनाया गया, जिसे आज नवगछिया का प्रसिद्ध तेतरी दुर्गा मंदिर कहा जाता है.

Bhagalpur Durga Temple: आस्था, सामाजिक सहयोग और आगे का रास्ता

आदमपुर चौक पर तेतरी मंदिर के इस दिव्य स्वरूप का निर्माण केवल एक निर्माण कार्य नहीं है, बल्कि यह स्थानीय समाज की एकजुटता और श्रद्धा का प्रतीक है. 5 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना से पूरे क्षेत्र की धार्मिक और सामाजिक रौनक को नया आयाम मिलेगा. भले ही इस बार श्रद्धालुओं को थोड़ा सीमित पंडाल देखना पड़े, लेकिन 2027 में जब यह भव्य धाम बनकर तैयार होगा, तो भागलपुर ही नहीं बल्कि पूरे पूर्वी बिहार के श्रद्धालु आदमपुर में मां दुर्गा के इस अलौकिक रूप का दर्शन करने जुटेंगे.

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