भागलपुर के सब्जी किसानों के करीब 2 अरब रुपये जा रहे बिचौलिए की जेब में, 12895 हेक्टेयर में होती है खेती

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 31 Jan 2023 1:01 AM

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किसान को बाजार की ओर से कभी समय पर पैसा भी नहीं मिलता. बिचौलियों के फेर में औने-पौने भाव में बेचने को विवश भी हो जाते हैं. असमय बारिश, ठंड व गर्मी की मार झेलनी पड़ती है.

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दीपक राव, भागलपुर: जिले में 12895 हेक्टेयर भूमि में केवल हरी सब्जियों की खेती होती है. सब्जी किसानों को इसका मुंहमांगी कीमत नहीं मिलने के कारण उनकी खेती को बढ़ावा नहीं मिल रहा है. एक ओर जहां खाद्य प्रसंस्करण उद्योग का अभाव है, तो दूसरी ओर 90 दिनों में उनकी तैयार सब्जी से बिचौलिये दो घंटे में 1, 96, 90,41,320 रुपये तक कमा रहे हैं. यह केवल वर्तमान समय की मौसमी सब्जियों जैसे कद्दू, गोभी, बैगन, हरी मिर्च, विंस, टमाटर की कमाई है. इसके अलावा भी मटर, गाजर, मूली व अन्य हरी सब्जियाें की खेती होती है.

मजदूरी के सरकारी दर में भी किसान हासिये पर

पांच सदस्यीय किसान परिवार का आकलन सरकारी मजदूरी के दर पर करें, तो तीन माह में यदि किसान का पांच सदस्यीय परिवार सामान्य मजदूरी करे, तो उन्हें प्रति व्यक्ति प्रतिदिन कम से कम 300 रुपये मिलेंगे. इस प्रकार तीन माह के 90 दिन से 80 दिन भी वो काम करें, तो पांच लोगों की मजदूरी 1.20 लाख रुपये होती है. यह खेती-किसानी में मिले पैसे से बहुत अधिक है. ऊपर से पूंजी लगाने और दिनरात की परेशानी भी लेने की चिंता नहीं.

इन क्षेत्रों में सब्जी किसानों से की गयी पड़ताल

साहेबगंज दियारा (शहर से दूरी पांच किलोमीटर), मोहनपुर दियारा (शहर से दूरी सात किलोमीटर), नवगछिया के राघोपुर, शहर से दूरी 13 किलोमीटर व गोराडीह प्रखंड के कोढ़ा, सबौर के जीछो-सरधो (शहर से दूरी आठ किलोमीटर) के किसानों के पास पहुंची. किसानों ने एक फसल खासकर सब्जी कददू, गोभी, बैगन व टमाटर के संबंध में बताया कि तीन माह पूरे परिवार के साथ खटते हैं. इस दौरान तरह-तरह की समस्या भी आती है. जब फसल तैयार भी हो जाती है, तो उनसे ज्यादा फायदा दूसरे उठा ले जाते हैं.

परेशानी बनाम कमाई

एक सब्जी किसान अपने परिवार के साथ (कम से कम पांच सदस्य) एक बीघा जमीन में सब्जी की खेती करता है, तो उसे तीन माह मेहनत करनी होती है. इस दौरान वह कम से कम 6000 फूलगोभी के पौधे लगाता है. खेती पर उसे कम से कम18000 रुपये खर्च करने पड़ते हैं. फसल तैयार होने पर उसे एक गोभी के औसतन सात से आठ रुपये मिलते हैं. इससे उसे औसतन 48000 (आठ रुपये प्रति पीस के हिसाब से) रुपये मिलते हैं. इसमें खर्च राशि हटा दिया जाये, तो उसे 30000 रुपये कमाई होती है. यही गोभी बाजार में बिचौलिया या दुकानदार औसतन प्रति पीस 15 से 20 रुपये में बेचते हैं. इससे बाजार में 6000 गोभी का औसत मूल्य 1.20 लाख (प्रति पीस 20 रुपये के हिसाब से) रुपये आता है. इसमें से वो किसान को 48000 हजार रुपये चुकाता है. इस काम में उसे औसतन तीन दिन लगते हैं. इस प्रकार वह अधिक से अधिक तीन दिन में 72000 रुपये की कमाई करता है.

किसानों का संकट यह भी

किसान को बाजार की ओर से कभी समय पर पैसा भी नहीं मिलता. बिचौलियों के फेर में औने-पौने भाव में बेचने को विवश भी हो जाते हैं. असमय बारिश, ठंड व गर्मी की मार झेलनी पड़ती है.

कहते हैं किसान

  • दियारा के एक सब्जी किसान ने बताया कि विश्वविद्यालय परिसर व साहेबगंज दियारा में ठेका पर जमीन लेकर सब्जी की खेती करते हैं. प्रत्येक साल एक लाख रुपये खर्च करते हैं. सबकुछ ठीक रहा, तो डेढ़ लाख रुपये तक हो जाता है. इसमें काटकर 50 हजार रुपये ही कमाई होती है. डूब जाने पर पूरा का पूरा घाटा हो जाता है. बाजार में एक पोटरी का 12 से 15 रुपये तक आढ़त टैक्स लगता है. इसके बाद भी एक किलो सब्जी अलग से ले ली जाती है. यदि थोक में सब्जी बेचने जायेंगे, तो तीन प्रतिशत तक टैक्स लगेगा.

  • कंपनीबाग में रहकर विश्वविद्यालय परिसर में सब्जी की खेती करते हैं. एक बीघा में 35 हजार रुपये खर्च करने पर 50 से 60 हजार रुपये तक कमाते हैं. पांच से छह सदस्य खेत से लेकर बाजार तक लगे रहते हैं. खुद बाजार में जाकर बैठते हैं. यहां थोक व खुदरा दोनों भाव पर अपनी सब्जी बेच लेते हैं. अधिक होने पर दूसरे दुकानदारों को कम दाम पर बेचते है. इसके अलावा विश्वविद्यालय को ठेका का पैसा अलग से देना पड़ता है. मुन्ना मंडल, विश्वविद्यालय परिसर सब्जी किसान

  • बाजार वाला हावी है. परिवार के सभी सदस्य मिलकर काम करते हैं तब पेट भर पाता है. यदि मजदूर से काम करायेंगे, तो भूखों मरना पड़ेगा. एक दर्द यह भी है कि जब प्याज लगाते हैं, तो सस्ती हो जाती और कभी आलू लगाते हैं तो लागत से कम में बेचना पड़ता है. क्या करें, कहां जाये. खेती-किसानी छोड़कर कोई चारा नहीं है. कुमकुम मंडल, राघोपुर-नवादा के सब्जी किसान

  • सरकार की ओर से सब्जी किसानों के लिए कोई ऐसी व्यवस्था नहीं दी गयी, जहां वे अपनी सब्जियों का भंडारण कर सकें. साथ ही खाद्य प्रसंस्करण उद्योग नहीं लगाया गया, जिससे उनकी सब्जियों से अचार व अन्य प्रकार की टिकाऊ सामान तैयार किया जा सके. इससे उनके कच्चे माल को कीमत नहीं मिल पाता. बिचौलिये को इसका फायदा लेने का मौका मिल जाता है. शांतानंद, कोढ़ा के सब्जी किसान

बिचौलिये के कमाने का यह है गणित

जिला कृषि कार्यालय अंतर्गत उद्यान विभाग से जारी आंकड़ा व किसानों से लिये गये भाव के आधार पर बिचौलिये की कमाई निकाली गयी, जो कि किसानों के तीन माह की मेहनत से तैयार सब्जियों को बिचौलिये दो घंटे में लूट लेते हैं.

सब्जी का उत्पादन व मूल्य 

  • उद्यान विभाग के अनुसार सब्जी का उत्पादन – किसान का मूल्य – बाजार का मूल्य

  • कद्दू 30,74,000 किलोग्राम – 7684995 रुपये – 28178315 रुपये

  • फूलगोभी 2,96,45,000 किलो – 192692500 रुपये – 667012500 रुपये

  • बैगन 3,42,52,000 किलो – 342520000 रुपये – 856300000 रुपये

  • हरी मिर्च 1,58,90,000 किलो – 357525000 रुपये – 715050000 रुपये

  • बिंस 25,70,000 किलो – 57825000 रुपये – 115650000 रुपये

  • टमाटर 3,89,68,000 किलो – 253292000 रुपये – 681940000 रुपये

  • पत्ता गोभी 2,32,90,000 किलो – 87337500 रुपये – 203787500 रुपये

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