कभी था पश्चिम चंपारण का पहला सोलर गांव, अब अंधेरे में 1200 जिंदगियां...हाथी-भालू-बाघ के बीच रोज पांच किमी का सफर

Updated:
विज्ञापन

स्कूल जाते बच्चे | Prabhat Khabar Network

WhatsApp चैनल से जुड़ेंगूगल पर प्रभात खबर चुनें

पश्चिम चंपारण के भतुंजला में कभी घर-घर रोशनी पहुंची थी, आज सोलर सिस्टम खामोश हैं. बच्चे 5 किमी जंगल और पहाड़ी नदियां पार कर स्कूल जाते हैं. आखिर कैसे बदल गया इस गांव का उजाला? जानिए.

विज्ञापन

पश्चिम चंपारण न्यूज: इंडो-नेपाल सीमा के करीब बसा गौनाहा प्रखंड का भतुंजला गांव आज भी विकास की मुख्यधारा से दूर है. घने जंगलों के बीच बसे इस थारू बहुल गांव की करीब 1200 आबादी सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रही है. गांव तक पहुंचने के लिए कच्चे रास्तों और जंगल का सहारा लेना पड़ता है. बरसात में यही रास्ते ग्रामीणों के लिए और मुश्किल बन जाते हैं.

विज्ञापन

जंगल के बीच पांच किमी पैदल स्कूल जाते हैं बच्चे

भतुंजला के बच्चों के लिए पढ़ाई किसी चुनौती से कम नहीं है. ग्रामीणों के अनुसार गांव में माध्यमिक स्तर का विद्यालय नहीं होने के कारण छात्र-छात्राओं को रोज करीब पांच किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाना पड़ता है. रास्ते में घना जंगल और दोहरम व सोखता जैसी पहाड़ी नदियां पड़ती हैं. बारिश के दिनों में नदियों का जलस्तर बढ़ने से बच्चों का सफर और जोखिम भरा हो जाता है.

जंगली जानवरों की रहती है मौजूदगी

ग्रामीणों के मुताबिक जंगल में हाथी, भालू और बाघ जैसे वन्यजीवों की मौजूदगी भी बनी रहती है. कई बार जंगली जानवर गांव तक पहुंच चुके हैं और मवेशियों को नुकसान भी हुआ है. ऐसे में शाम के बाद ग्रामीण जरूरत पड़ने पर ही घरों से बाहर निकलते हैं.

अस्पताल के लिए भी गांव से बाहर जाना मजबूरी

गांव में स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने से बीमार लोगों को इलाज के लिए दूसरे गांवों या गौनाहा प्रखंड मुख्यालय जाना पड़ता है. रोजगार के सीमित साधनों के कारण अधिकांश परिवार खेती, मजदूरी और पशुपालन पर निर्भर हैं. ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय सड़क, बिजली और दूसरी सुविधाओं के वादे तो किए जाते हैं, लेकिन वर्षों बाद भी गांव की तस्वीर नहीं बदली.

बीडीओ ने कहा

जंगल की वजह से सड़क नहीं बन पा रही है. बिजली, पानी, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए सरकार को लगातार लिखा जा रहा है. स्वीकृति मिलते ही कार्य कराए जाएंगे.”

ऋषभ देव प्रसाद, बीडीओ, गौनाहा

स्कूल जाते बच्चे, खराब पड़ा सोलर सिस्टम | Prabhat Khabar Network
स्कूल जाते बच्चे | Prabhat Khabar Network

2016 में बना था जिले का पहला सोलर गांव, अब सिस्टम बंद

भतुंजला को करीब एक दशक पहले 2016 में पश्चिम चंपारण का पहला सोलर गांव विकसित किया गया था. सोलर माइक्रो ग्रिड के जरिए घरों तक बिजली पहुंचाने की व्यवस्था की गयी थी. ग्रामीणों के अनुसार शुरुआती वर्षों में इस व्यवस्था से काफी राहत मिली, लेकिन रखरखाव के अभाव में धीरे-धीरे सोलर परियोजना बंद हो गयी. आज अधिकांश सोलर सिस्टम निष्क्रिय पड़े हैं और गांव फिर अंधेरे में रहने को मजबूर है.

मूलभूत सुविधाएं भी मयस्सर नहीं.

ग्रामीण रामलाल महतो, रामावतार धामी, प्रभु गुरो, बंधु महतो, चांदनी देवी, बिंदु देवी, संगीता देवी, सीताराम उरांव, सुनील उरांव और मोहन उरांव का कहना है कि यदि सड़क, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधाएं मिल जाएं तो सीमावर्ती गांव के लोगों का जीवन काफी आसान हो सकता है.

स्कूल जाते बच्चे, खराब पड़ा सोलर सिस्टम | Prabhat Khabar Network
खराब पड़ा सोलर सिस्टम | Prabhat Khabar Network

देखें आंकड़ों में कैसा है गांव

  • गांव : भतुंजला, गौनाहा प्रखंड
  • आबादी : करीब 1200
  • समुदाय : थारू जनजाति बहुल
  • प्रखंड मुख्यालय से दूरी : करीब 15 किमी
  • स्कूल की दूरी : करीब 5 किमी

आपके शहर में

विज्ञापन

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन