पश्चिम चंपारण में पेयजल जांच योजना फाइलों में कैद, 308 पंचायतों में नहीं दिखा असर

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फोटो कैपसन : बेतिया पीएचईडी भवन | Prabhat Khabar Network

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पश्चिम चंपारण में 5 साल पहले शुरू हुई पेयजल गुणवत्ता जांच योजना अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है. पंचायत चुनावों से पहले इस महत्वाकांक्षी योजना पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि जनप्रतिनिधियों से लेकर जिला प्रशासन तक निगरानी में ढिलाई बरत रहा है.

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बेतिया: पश्चिम चंपारण जिले की सभी 308 पंचायतों में पेयजल की गुणवत्ता की नियमित जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शुरू की गई योजना पांच साल बाद भी पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी है. पंचायत चुनाव से पहले एक बार फिर इस महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठने लगे हैं. स्थिति यह है कि जनप्रतिनिधियों से लेकर जिला प्रशासन तक किसी स्तर पर इस योजना की प्रभावी निगरानी नहीं दिख रही है.

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2021 में हर पंचायत को मिली थी टेस्ट किट

ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) ने वर्ष 2021 में प्रत्येक पंचायत को मल्टी पैरामीट्रिक फील्ड टेस्ट किट (FTK) उपलब्ध कराई थी. योजना के तहत हर महीने सभी वार्डों से पानी के नमूने लेकर उनकी गुणवत्ता की जांच की जानी थी.

इन जांचों में पीएच (pH), टर्बिडिटी, टीडीएस (TDS), अवशिष्ट क्लोरीन, नाइट्रेट समेत अन्य मानकों की जांच का प्रावधान था. वहीं, आर्सेनिक, फ्लोराइड और आयरन प्रभावित क्षेत्रों के लिए अलग-अलग रसायन भी उपलब्ध कराए गए थे.

पोर्टल पर रिपोर्ट अपलोड करने का था निर्देश

योजना के अनुसार, प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा जांच कर उसकी रिपोर्ट भारत सरकार के WQMIS (Water Quality Management Information System) पोर्टल पर अपलोड की जानी थी. इससे पेयजल की गुणवत्ता की ऑनलाइन निगरानी और समय पर सुधारात्मक कार्रवाई संभव हो सकती थी.

पांच साल बाद भी स्पष्ट नहीं है रिकॉर्ड

हालांकि, पांच वर्षों के बाद भी यह स्पष्ट नहीं है कि जिले की 308 पंचायतों में कितनी नियमित जांच हुई, कितनी रिपोर्ट WQMIS पोर्टल पर अपलोड की गई और कितने जलस्रोतों में प्रदूषण की पुष्टि हुई. इस कारण योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं.

विशेषज्ञों ने जताई चिंता

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल टेस्ट किट उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं है. नियमित सैंपलिंग, ऑनलाइन रिपोर्टिंग, सतत निगरानी और जवाबदेही तय किए बिना ग्रामीण क्षेत्रों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा.

विभाग ने समीक्षा का दिया भरोसा

इस संबंध में पीएचईडी के कार्यपालक अभियंता नीतीन कुमार ने कहा कि पुराने फील्ड टेस्ट किट, उपलब्ध रसायनों और पूरी योजना के क्रियान्वयन की विस्तृत समीक्षा की जाएगी. उन्होंने कहा कि योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने का प्रयास किया जाएगा. अब यह देखना होगा कि पांच साल पुरानी इस योजना को नई गति मिलती है या यह फिर सरकारी दावों तक ही सीमित रह जाती है.

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