शिकारियों पर शिकंजा कसने की तैयारी, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में शुरू हुई दो दिवसीय विशेष ट्रेनिंग

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प्रशिक्षण में उपस्थित वन अधिकारी | Prabhat Khabar Network

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वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में वन्यजीव अपराधों की रोकथाम के लिए वनकर्मियों को दो दिवसीय विशेष कानूनी प्रशिक्षण दिया गया। जानें इस पहल के बारे में विस्तार से।

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Valmiki Tiger Reserve: बिहार के इकलौते वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में वन्यजीव अपराधों की रोकथाम और जैव विविधता संरक्षण को और मजबूत बनाने की दिशा में नई पहल शुरू हुई है. गुरुवार से "वाइल्डलाइफ क्राइम प्रिवेंशन ट्रेनिंग (रिफ्रेशर मॉड्यूल-बी) 2026" के तहत दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया.

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यह प्रशिक्षण वाल्मीकिनगर वन सभागार में आयोजित किया जा रहा है.

वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पर जोर

दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) द्वारा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार के सहयोग से किया जा रहा है.

कार्यक्रम का उद्घाटन डीएफओ विकास अहलावत ने किया. उन्होंने कहा कि वन्यजीव अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए प्रशिक्षित, सतर्क और कानूनी रूप से दक्ष वनकर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है. ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम वन संरक्षण व्यवस्था को और मजबूत बनाते हैं.

पांचों वन प्रक्षेत्रों के अधिकारी और वनकर्मी शामिल

प्रशिक्षण में वीटीआर के पांचों वन प्रक्षेत्रों के वन प्रक्षेत्र पदाधिकारी सत्यम कुमार, नसीम अहमद अंसारी, मनोज कुमार, राजेश राम और अंशुमान कुमार सहित कुल 23 वनपाल और वनरक्षी भाग ले रहे हैं.

प्रतिभागियों को वन्यजीव अपराधों की जांच, साक्ष्य संकलन, अभियोजन प्रक्रिया और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़ी व्यावहारिक एवं कानूनी जानकारी दी जा रही है.

विशेषज्ञों ने बताए मजबूत जांच के तरीके

दुधवा टाइगर रिजर्व से आए डब्ल्यूटीआई के विधिक परामर्शदाता अधिवक्ता राकेश श्रीवास्तव और संजय राय ने वन्यजीव अपराधों की विवेचना, न्यायालयीन प्रक्रिया और मजबूत साक्ष्य संकलन के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी.

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक जांच और सुदृढ़ कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही वन्यजीव अपराधियों को प्रभावी ढंग से सजा दिलाई जा सकती है.

2021 से लगातार चल रही प्रशिक्षण श्रृंखला

वर्ष 2021 से संचालित इस प्रशिक्षण श्रृंखला का यह तीसरा रिफ्रेशर कार्यक्रम है.

कार्यक्रम का संचालन पावेल घोष ने किया, जबकि सुनील कुमार, मुरारी कुमार और मुकेश कुमार ने आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

वन विभाग का मानना है कि यह पहल भविष्य में वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी.


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