सावन की पहली सोमवारी पर नीलकंठ महादेव मंदिर में उमड़ी आस्था, 10 हजार श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक

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सांकेतिक तस्वीर

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पश्चिम चंपारण के रामनगर स्थित ऐतिहासिक नीलकंठ महादेव मंदिर सावन की पहली सोमवारी पर शिवभक्ति में लीन रहा. ब्रह्ममुहूर्त से ही 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक कर परिवार की मंगलकामना की. मेले में बारिश के कारण थोड़ी रौनक फीकी रही, लेकिन भक्ति का माहौल चरम पर था.

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West Champaran News: श्रावण मास की पहली सोमवारी पर रामनगर स्थित ऐतिहासिक श्री नीलकंठ नर्मदेश्वर महादेव मंदिर शिवभक्ति में पूरी तरह सराबोर नजर आया. सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें मंदिर परिसर में लगनी शुरू हो गईं. अनुमानित 10 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना की. पूरे दिन मंदिर परिसर "हर-हर महादेव" और "बम-बम भोले" के जयघोष से गूंजता रहा.

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Ramnagar News: सुबह से देर शाम तक चलता रहा जलाभिषेक

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए संकीर्तन संघ एवं मंदिर के पुजारी अमित कुमार उपाध्याय ने अहले सुबह मंदिर के कपाट खोल दिए. इसके बाद जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का सिलसिला देर शाम तक लगातार चलता रहा. मंदिर परिसर में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला.

सुरक्षा के रहे व्यापक इंतजाम

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन की ओर से व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी. प्रभारी थानाध्यक्ष पंकज सिंह के नेतृत्व में पुलिस पदाधिकारी, महिला पुलिस बल एवं जवान सुबह से देर रात तक तैनात रहे. मंदिर परिसर और आसपास के प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई, जबकि बैरिकेडिंग कर श्रद्धालुओं के प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई.

स्वयंसेवकों ने संभाली व्यवस्थाएं

मंदिर परिसर की व्यवस्था बनाए रखने में संकीर्तन संघ के समाजसेवी सह शिक्षक संदीप मिश्र, राकेश सिंह राजपूत, राजेश तुलस्यान, भुवनेश्वर सिंह, समाजसेवी सह शिक्षक टुन्ना यादव, संतोष विक्रम शाह सहित कई स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई. वहीं सभापति प्रतिनिधि नागेंद्र साह, सुजल सिंह समेत कई गणमान्य लोगों ने भी भगवान शिव का जलाभिषेक किया.

बारिश से मेले की रौनक रही फीकी

मंदिर परिसर में इस वर्ष सौ से अधिक अस्थायी दुकानें सजाई गई थीं, जिनमें श्रृंगार सामग्री, खिलौने, पूजा सामग्री, फोटो फ्रेम, चाट, चाउमीन एवं अन्य खाद्य पदार्थों की दुकानें शामिल थीं. हालांकि दिनभर रुक-रुक कर हुई बारिश के कारण दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालु मेले का भरपूर आनंद नहीं ले सके. इसका असर दुकानदारों के कारोबार पर भी पड़ा.

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