पेपरलेस रजिस्ट्री लागू होते ही 80% से ज्यादा गिरा राजस्व, चार कार्यालयों से अब तक मिले 8.28 करोड़
जिला निबंधन कार्यालय
पश्चिम चंपारण में पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था लागू होने से सरकारी राजस्व में 80% से ज़्यादा की भारी गिरावट आई है. चार निबंधन कार्यालयों से अब तक केवल 8.28 करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं, जबकि पहले यह आय 35-40 करोड़ रुपये प्रतिमाह थी. लोगों में फैले भ्रम और तकनीकी अड़चनों को इस गिरावट का मुख्य कारण बताया जा रहा है.
Bettiah News: बेतिया. जमीन-मकान की खरीद-बिक्री में बिचौलियों की भूमिका खत्म करने और निबंधन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए लागू की गयी पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था से पश्चिम चंपारण में फिलहाल सरकारी राजस्व में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है. जिले के चार निबंधन कार्यालयों में व्यवस्था लागू होने के बाद अब तक 8 करोड़ 28 लाख 34 हजार 146 रुपये ही राजस्व प्राप्त हुआ है. जबकि पहले पांचों कार्यालयों से औसतन प्रतिमाह 35 से 40 करोड़ रुपये की आय होती थी. इस लिहाज से सामान्य मासिक कलेक्शन की तुलना में राजस्व में 80 फीसदी से अधिक की गिरावट बतायी जा रही है.
पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था के तहत ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग, दस्तावेज अपलोड करने और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं को अपनाया जा रहा है. अधिकारियों के अनुसार, नयी व्यवस्था को लेकर लोगों में फैले भ्रम और तकनीकी प्रक्रिया के कारण भी निबंधन प्रभावित हुआ है.
अगस्त में अलग-अलग चरणों में लागू हुई व्यवस्था
जिला निबंधन कार्यालय और चनपटिया में पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था 3 अगस्त से लागू हुई. वहीं लौरिया, शिकारपुर और बगहा में 17 अगस्त से इस व्यवस्था को लागू किया गया.
व्यवस्था लागू होने के बाद निबंधन की संख्या में भी काफी कमी आयी है. चार कार्यालयों के आंकड़ों के अनुसार जिला निबंधन कार्यालय में 640 दस्तावेजों का निबंधन हुआ, जिससे 6.20 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्त हुआ.
शिकारपुर में 271 दस्तावेजों से 1 करोड़ 22 लाख 74 हजार 427 रुपये, लौरिया में 120 दस्तावेजों से 41 लाख 97 हजार रुपये और बगहा में 86 दस्तावेजों से 43 लाख 62 हजार 719 रुपये राजस्व मिला.
पहले की तुलना में काफी कम हुए निबंधन
पेपरलेस व्यवस्था लागू होने से पहले इन कार्यालयों में निबंधन की संख्या काफी अधिक थी. जिला निबंधन कार्यालय में 2031 दस्तावेजों का निबंधन हुआ था. इसी तरह शिकारपुर में 1181, बगहा में 976 और लौरिया में 805 दस्तावेजों का निबंधन हुआ था.
इसके बाद नयी व्यवस्था लागू होने पर दस्तावेजों की संख्या में कमी आयी है. अधिकारियों के अनुसार, ऑनलाइन प्रक्रिया से जुड़ी तकनीकी जानकारी की कमी और लोगों में व्याप्त भ्रम भी इसका एक कारण है.
ऑनलाइन स्लॉट और बायोमेट्रिक सत्यापन की प्रक्रिया
पेपरलेस रजिस्ट्री में खरीदार और विक्रेता को ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग, आवश्यक दस्तावेज अपलोड करने और बायोमेट्रिक सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ रहा है.
नयी व्यवस्था का उद्देश्य निबंधन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और जमीन-मकान की खरीद-बिक्री में बिचौलियों की भूमिका को कम करना है. हालांकि शुरुआती दौर में तकनीकी प्रक्रिया को लेकर लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
डीएम ने दो बार किया निरीक्षण
व्यवस्था को सुचारु बनाने के लिए डीएम सह जिला निबंधक तरनजोत सिंह ने दो बार निबंधन कार्यालयों का निरीक्षण किया है. उन्होंने निबंधन प्रक्रिया में तेजी लाने और लोगों की परेशानी कम करने के निर्देश दिये हैं.
अब खरीदारों और विक्रेताओं को तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रशिक्षित कर्मचारियों, कंप्यूटर काउंटर और तकनीकी सहायता दल की व्यवस्था की जा रही है. इसके माध्यम से ऑनलाइन प्रक्रिया, दस्तावेज अपलोड और अन्य तकनीकी चरणों में लोगों की मदद करने की तैयारी है.
आगे व्यवस्था को आसान बनाने पर जोर
निबंधन कार्यालयों में तकनीकी सहायता की व्यवस्था शुरू होने के बाद लोगों को पेपरलेस रजिस्ट्री प्रक्रिया समझने में मदद मिलने की उम्मीद है. विभाग का जोर नयी व्यवस्था को सुचारु करने और निबंधन प्रक्रिया में तेजी लाने पर है.
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