जलवायु संकट पर भूटान में महामंथन, भारत की ओर से पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने रखा पक्ष

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भूटान में आयोजित दक्षिण एशियाई संसदीय संवाद के शुभारंभ के अवसर पर अन्य प्रतिनिधियों के साथ दीप प्रज्ज्वलित करते पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल. | Prabhat Khabar Network

भूटान में दक्षिण एशियाई संसदीय संवाद में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे डॉ. संजय जायसवाल ने जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण और सतत विकास पर क्षेत्रीय सहयोग की जरूरत बतायी. जानिए, हरित और जलवायु-लचीले दक्षिण एशिया को लेकर क्या कहा.

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South Asian Parliamentary Dialogue: पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और सतत विकास को लेकर दक्षिण एशियाई देशों के बीच संवाद के लिए भूटान में दो दिवसीय संसदीय कार्यक्रम आयोजित किया गया. इसमें पश्चिम चंपारण के सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने भारत का प्रतिनिधित्व किया. कार्यक्रम में जलवायु परिवर्तन की बढ़ती चुनौतियों के साथ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के मुद्दों पर चर्चा हुई.

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समृद्ध जलवायु भविष्य को लेकर हुआ मंथन

कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में Towards South Asia’s Prosperous Climate Future विषय पर चर्चा हुई. इसमें दक्षिण एशिया के देशों के लिए बेहतर और सुरक्षित जलवायु भविष्य की दिशा में उठाये जाने वाले कदमों पर विचार-विमर्श किया गया. जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए क्षेत्रीय स्तर पर सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया गया.

भूटान के क्लाइमेट एजेंडे पर उच्चस्तरीय चर्चा

कार्यक्रम में आयोजित Bhutan’s Climate Change Agenda: A High-Level Roundtable में भी डॉ. संजय जायसवाल शामिल हुए. इस दौरान भूटान के जलवायु एजेंडे के साथ पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई. बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच दक्षिण एशियाई देशों की भूमिका और सामूहिक प्रयासों पर भी विचार रखे गये.

बोले डॉ. जायसवाल, मिलकर करना होगा जलवायु चुनौती का सामना

डॉ. संजय जायसवाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन किसी एक देश की समस्या नहीं है. इसका असर पूरे दक्षिण एशिया पर पड़ रहा है. ऐसे में क्षेत्रीय सहयोग और सामूहिक प्रयासों के माध्यम से ही इस चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है. उन्होंने हरित, समृद्ध और जलवायु-लचीले दक्षिण एशिया के निर्माण के लिए देशों के बीच सहयोग और संवाद को आगे बढ़ाने की आवश्यकता बतायी.

पर्यावरण संरक्षण सभी की साझा जिम्मेदारी

सांसद ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के लिए सभी देशों को मिलकर प्रयास करना होगा. संसदीय संवाद जैसे मंच साझा अनुभवों और विचारों को सामने लाने के साथ-साथ क्षेत्रीय समस्याओं के सामूहिक समाधान तलाशने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य तैयार करने के लिए इन प्रयासों को और गति देने की जरूरत है.

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