‘वन बचाओ, भविष्य बचाओ’ विषय पर पेंटिंग प्रतियोगिता, छात्राओं ने दिखाई रचनात्मक प्रतिभा
वन बचाओ भविष्य बचाओ प्रतियोगिता की तस्वीर
Begusarai News : बेगूसराय के परियोजना एसबीडी बालिका माध्यमिक विद्यालय में वन संरक्षण पर पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन, प्रधानाध्यापक ने छात्रों को पर्यावरण बचाने का संदेश दिया।
Begusarai News : प्रखंड के परियोजना एसबीडी बालिका माध्यमिक विद्यालय, दशरथपुर में इको क्लब के तहत ‘वन बचाओ, भविष्य बचाओ’ विषय पर छात्राओं के बीच पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. नोडल शिक्षक सचिन कुमार ठाकुर एवं शिक्षिका प्रज्ञा कुमारी के नेतृत्व में आयोजित प्रतियोगिता में छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और पेंटिंग के माध्यम से वन संरक्षण एवं पर्यावरण सुरक्षा का संदेश दिया.
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वन प्रकृति की अमूल्य संपदा : प्रधानाध्यापक
विद्यालय के प्रधानाध्यापक अनिल कुमार ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि वन प्रकृति की अमूल्य संपदा हैं. मनुष्य, पशु-पक्षी और समस्त जीव-जगत का जीवन प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वनों पर निर्भर है. वन हमें ऑक्सीजन, फल, फूल, औषधियां, लकड़ी और अनेक आवश्यक संसाधन प्रदान करते हैं. इसके साथ ही जलवायु संतुलन, वर्षा, मिट्टी के कटाव को रोकने और जैव विविधता के संरक्षण में भी वनों की महत्वपूर्ण भूमिका है. इसलिए ‘वन बचाओ, भविष्य बचाओ’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि मानव जीवन की सुरक्षा का संकल्प है.
प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में वनों की अहम भूमिका
प्रधानाध्यापक ने कहा कि वन पृथ्वी के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. पेड़ वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करके ऑक्सीजन छोड़ते हैं. इससे वायु शुद्ध होती है और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में सहायता मिलती है. वन वर्षा चक्र को भी प्रभावित करते हैं. पेड़ अपनी जड़ों के माध्यम से मिट्टी में पानी को रोकते हैं और भूजल संरक्षण में सहायता करते हैं. घने जंगल बाढ़ और मिट्टी के कटाव को कम करने में भी सहायक होते हैं.
वनों में संरक्षित है जैव विविधता
उन्होंने बताया कि वन अनेक प्रकार के जीव-जंतुओं का प्राकृतिक आवास हैं. हाथी, बाघ, हिरण, पक्षी, कीट और असंख्य वनस्पतियां जंगलों में अपना जीवन-चक्र पूरा करती हैं. ऐसे में वनों की रक्षा करना जैव विविधता की रक्षा करना भी है. वन संरक्षण के प्रति विद्यार्थियों और समाज के प्रत्येक वर्ग को जागरूक होना जरूरी है.
वनों की कटाई से पर्यावरण पर बढ़ रहा संकट
बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण, औद्योगीकरण, सड़क निर्माण और कृषि भूमि के विस्तार के कारण वनों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है. पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से पर्यावरण का संतुलन बिगड़ता है. वनों की कमी से तापमान बढ़ सकता है, वर्षा का स्वरूप प्रभावित हो सकता है तथा सूखा और बाढ़ जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. मिट्टी का कटाव बढ़ने से भूमि की उर्वरता भी कम होती है. जंगलों के नष्ट होने से अनेक पशु-पक्षियों के प्राकृतिक आवास समाप्त हो जाते हैं और कई प्रजातियां विलुप्ति के खतरे में पड़ जाती हैं.
जलवायु परिवर्तन से निपटने में जरूरी है वन संरक्षण
प्रधानाध्यापक ने कहा कि आज पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन की चुनौती का सामना कर रही है. वनों का संरक्षण इस समस्या से निपटने का एक महत्वपूर्ण उपाय है. पेड़ वातावरण में मौजूद कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं. इसलिए अधिक से अधिक पेड़ लगाना और मौजूदा जंगलों को बचाना जलवायु संरक्षण के लिए आवश्यक है. उन्होंने कहा कि केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं है. लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण भी जरूरी है, ताकि वे बड़े होकर स्वस्थ पेड़ बन सकें.
वन संरक्षण में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण
प्रधानाध्यापक ने कहा कि वनों को बचाने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की है. हम अपने आसपास पेड़ लगाकर और उनकी देखभाल कर योगदान दे सकते हैं. अनावश्यक रूप से कागज की बर्बादी रोकना, लकड़ी का विवेकपूर्ण उपयोग करना, प्लास्टिक प्रदूषण कम करना तथा जंगलों में आग और अवैध कटाई की सूचना संबंधित अधिकारियों को देना भी वन संरक्षण में सहायक है. उन्होंने कहा कि विद्यालयों और महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए. प्रत्येक व्यक्ति यदि अपने जीवन में कुछ पेड़ों की जिम्मेदारी लेकर उनकी रक्षा करे, तो इसका पर्यावरण पर बड़ा सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.
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