सावन पूर्णिमा पर शिवालयों में उमड़ा आस्था का सैलाब, मंदार में विष्णु-लक्ष्मी के दर्शन को पहुंचे श्रद्धालु
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सावन पूर्णिमा के अवसर पर बांका जिले में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला. शिवालयों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर भक्तों की भीड़ उमड़ी, जिन्होंने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की. साथ ही, रक्षाबंधन पर बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके दीर्घायु जीवन की प्रार्थना की.
सावन पूर्णिमा के अवसर पर शुक्रवार को बांका जिले में आस्था का माहौल बना रहा. जिलेभर के शिव मंदिरों समेत प्रमुख धार्मिक स्थलों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. भक्तों ने भगवान के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की. वहीं रक्षाबंधन पर बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनके सुखी और समृद्ध जीवन की मंगलकामना की.
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सुबह से मंदिरों में गूंजे पूजा के मंत्र
सावन पूर्णिमा को लेकर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गयी. भयहरण स्थान, बाबूटोला स्थित पंचमुखी मंदिर, जगतपुर स्थित ठाकुरबाड़ी समेत अन्य मंदिरों के पट सुबह पांच बजे ही श्रद्धालुओं के लिए खोल दिये गये. पट खुलते ही भक्तों का मंदिर पहुंचना शुरू हो गया. श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा की और भगवान से मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना की.
मंदार के अष्टकमल मंदिर में विष्णु-लक्ष्मी की पूजा
मंदार पर्वत स्थित पापहरणी में विराजमान भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के अष्टकमल मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही. सुबह से ही दूर-दराज से पहुंचे भक्तों ने भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना की. मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्तिमय वातावरण बना रहा.
अष्टकमल मंदिर में सुबह 7.30 बजे पुजारी बिंदेश्वरी उर्फ पटल झा और लक्ष्मण झा ने भगवान का पंचामृत से स्नान कराया. इसके बाद चंदन लेपन सहित विधिवत पूजा-अर्चना की गयी. दोपहर 12 बजे भगवान को चावल, दाल, सब्जी समेत विभिन्न व्यंजनों का भोग अर्पित किया जाएगा. शाम छह बजे श्रृंगार पूजा और भव्य आरती का आयोजन होगा.
मधुसूदन मंदिर में सुबह पांच बजे खुले पट
मंदार स्थित प्रसिद्ध भगवान मधुसूदन मंदिर में भी सावन पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी. मंदिर का पट अहले सुबह पांच बजे खोल दिया गया. पट खुलते ही श्रद्धालुओं ने भगवान मधुसूदन के दर्शन और पूजा-अर्चना शुरू कर दी. सुबह 7.30 बजे आरती की गयी.
पुजारी बिंदेश्वरी उर्फ पटल झा और लक्ष्मण झा समेत अन्य पुजारियों ने भगवान की नित्य क्रियाएं संपन्न करायीं. पुजारी ने बताया कि आगामी 31 अक्टूबर तक भगवान की विशेष दिनचर्या पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी. भगवान को प्रतिदिन पंचामृत से स्नान कराया जाएगा और चंदन लेपन के बाद विधिवत पूजा होगी.
दोपहर में भोग के बाद शाम को भगवान का भव्य श्रृंगार किया जाएगा. रात में पूड़ी, दूध, चीनी, काजू, किशमिश, पेड़ा समेत विभिन्न मिष्ठानों का भोग लगाया जाएगा. रात 8.30 बजे मंदिर का पट बंद होगा.
रक्षाबंधन पर मजबूत हुआ भाई-बहन का रिश्ता
सावन पूर्णिमा के साथ रक्षाबंधन को लेकर भी लोगों में खास उत्साह रहा. बहनें अपने भाइयों के घर पहुंचीं और उनकी कलाई पर राखी बांधकर सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना की. भाइयों ने भी बहनों की रक्षा और हर सुख-दुख में साथ देने का संकल्प लिया. धार्मिक आस्था के साथ भाई-बहन के प्रेम ने पूरे जिले के माहौल को खास बना दिया.
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